वाराणसी ज्ञानवापी मस्जिद मामले में कल कोर्ट सुनाएगी फैसला, अलर्ट पर है बनारस
Supreme Court's big decision on Gyanvapi Masjid case, District Judge should hear on his own

वाराणसी। ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी विवाद मामले में पोषणीयता के मामले में वाराणसी के जिला जज ए.के. विश्वेश की अदालत में सुनवाई पूरी।

इस मामले में रूल 7/11 लागू होगा या रुल 6/11 लागू होगा इसी बात की है मुख्य बहस। सिविल के अभी तक के मामलों में पोषणीयता पर हुई सुनवाई में सबसे लंबी सुनवाई हुई है इस मामले में।  21 दिन की सुनवाई के बाद इस मामले में जिला जज वाराणसी ए.के. विश्वेश ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

मुस्लिम पक्ष ने अदालत में यह दावा किया था की ज्ञानवापी मस्जिद 1991 के वरशिप एक्ट से बंधी हुई है। इसीलिए यह मुकदमा सुनने योग्य नहीं है। इसके अलावा अदालत में मुगल काल से लेकर अन्य धार्मिक ग्रंथों का जिक्र किया गया।


मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभय नाथ यादव पक्ष रख रहे थे उनकी असामयिक निधन के बाद शमीम अहमद ने इस मामले में अदालत में अंजुमन इंतजामिया कमेटी का पक्ष।

हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील हरीश शंकर जैन एवं विष्णु जैन सहित अन्य लोगों ने अदालत में पक्ष रखा। हिंदू पक्ष की ओर से अदालत में वेद पुराण सहित अन्य धार्मिक ग्रंथों का भी जिक्र किया गया है।

कल यानी 12 सितंबर सोमवार को इस मामले में आएगा फैसला। फैसला आने से पहले हिंदू पक्ष ने धार्मिक यात्रा निकालने का कर दिया है ऐलान।

वही फैसले के मद्देनजर वाराणसी जिला प्रशासन एवं वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट ने सुरक्षा व्यवस्था की पूरी तैयारी कर ली है। वाराणसी शहर में आईबी एटीएस सहित अन्य खुफिया विभागों ने अपना डेरा डाल लिया है। ज्ञानवापी एवं जिला कचहरी के आसपास सुरक्षा अत्यंत कड़ी कर दी गई है। सोशल मीडिया सहित हर पोस्ट पर नजर रखी जा रही है कंट्रोल रूम से पूरे शहर की मॉनिटरिंग की जा रही है।

पुलिस कमिश्नर ने काशी की जनता से अपील की है कि – "किसी भी सोशल मीडिया पोस्ट के बहकावे में ना आएं जिससे धार्मिक उन्माद पैदा हो ऐसी चीजों की सूचना तत्काल कंट्रोल रूम को या अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन को दें। वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट हर प्रकार से सुरक्षा के लिए तत्पर है।"

मां शृंगार गौरी-ज्ञानवापी प्रकरण सुनवाई योग्य है या नहीं है। इस बहुचर्चित मसले पर वाराणसी के जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की कोर्ट 12 सितंबर यानी कल सोमवार को अपना फैसला सुनाएगी। इसे लेकर वाराणसी में पुलिस और प्रशासनिक अमला हाई अलर्ट पर है। सोशल मीडिया की निरंतर निगरानी करने के साथ ही पुलिस धर्म गुरुओं और संभ्रांत लोगों के लगातर संपर्क में हैं। वहीं, ज्ञानवापी प्रकरण की चार वादिनी महिलाओं के पैरोकार डॉ. सोहन लाल आर्य ने कहा है कि अदालत का फैसला आने पर हम काशी में एक भव्य धर्म यात्रा निकालेंगे। हालांकि इसके लिए अभी प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई है। मगर, जैसे ही हमारे पक्ष में फैसला आएगा हम प्रशासन से अनुमति लेकर हिंदू समाज को जागृत करने के लिए धर्म यात्रा निकालेंगे।

काशी के लोगों को प्रोत्साहित करेंगे

डॉ. सोहन लाल आर्य ने कहा कि 12 सितंबर को लेकर हम पूरी तरह आशान्वित हैं। अदालत में दोनों पक्षों की बहस में हिंदू पक्ष का पलड़ा भारी रहा है। मुस्लिम पक्ष की दलीलें बहुत प्रभावी नहीं रही है। इसलिए फैसला यही आएगा कि मां शृंगार गौरी केस सुनवाई योग्य है। फैसला आने के बाद देवाधिदेव महादेव के लिए हम धर्म यात्रा निकाल कर काशी के लोगों को प्रोत्साहित करना चाहते हैं। यात्रा की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। सबसे आगे तकरीबन 200 दोपहिया वाहन चलेंगे। उनके पीछे 50 सदस्यीय डमरू दल रहेगा। फिर 300 माताएं-बहनें सिर पर कलश में गंगाजल रख कर चलेंगी। उनके पीछे चार रथ रहेंगे। उन रथों में भगवान आदि विश्वेश्वर, मां शृंगार गौरी, एडवोकेट हरि शंकर जैन और विष्णु शंकर जैन रहेंगे। इन रथों के बीच ऊं नम: शिवाय की आवाज सुनाता हुआ डीजे चलेगा। सबसे आखिरी में भक्ति भाव में डूबे सनातन धर्मी चलेंगे। ]

कानून व्यवस्था को बरकरार रखना प्राथमिकता है

अपर पुलिस आयुक्त (क्राइम/हेडक्वार्टर) संतोष सिंह ने कहा कि अदालत का जो भी फैसला आएगा उसका पालन कराना पुलिस का कर्तव्य है। सोशल मीडिया की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। अफवाह फैलाने और माहौल बिगाड़ने वालों से पुलिस बहुत सख्ती से पेश आएगी। हमारी अपील है कि सभी लोग शांतिपूर्वक रहते हुए कानून व्यवस्था को बरकरार रखने में पुलिस का सहयोग करें। कोई ऐसा काम न करें जिसके चलते उनके खिलाफ पुलिस को कार्रवाई करनी पड़े।

ज्ञानवापी प्रकरण


18 अगस्त 2021 को विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जीतेंद्र सिंह विषय के नेतृत्व में राखी सिंह सहित पांच महिलाओं ने सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर के कोर्ट पर एक मुकदमा दाखिल किया।

मुकदमे में पांचों महिलाओं ने मांग की कि ज्ञानवापी परिसर स्थित मां श्रृंगार गौरी के मंदिर में नियमित दर्शन पूजन की अनुमति मिले ज्ञानवापी परिषद में अन्य देवी देवताओं के विग्रह की सुरक्षा का मुकम्मल इंतजाम है। 

इस मुकदमे में सुनवाई का सिलसिला जारी रहा लगभग 8 महीने की सुनवाई के बाद सिविल जज सीनियर डिवीजन ने 8 अप्रैल को एक एडवोकेट कमिश्नर कमीशन की कार्यवाही के लिए नियुक्त किया लेकिन किन्ही कारणों बस उस वक्त कमीशन की कार्यवाही नहीं हो पाई।

उसके बाद 26 अप्रैल 2022 को कोर्ट ने एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्र को नियुक्त करते हुए यह कहा की ईद के बाद 6, 7, 8 मई को वीडियोग्राफी फोटोग्राफी के साथ सर्वे कर 10 मई तक अदालत में रिपोर्ट पेश करें।


28 अप्रैल 2022 को एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्र ने वादी पक्ष के पांचों महिलाओं को नोटिस जारी किया प्रतिवादी पक्ष की तरफ से उत्तर प्रदेश सरकार के जरिए डीएम पुलिस कमिश्नर अंजुमन इंतजा मियां मसाजिद कमेटी के मुख्य प्रबंधक और बाबा विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के सचिव को नोटिस जारी किया गया सभी को बताया गया कि परिषद में सर्वे का काम 6 मई की दोपहर 3:00 बजे से शुरू करेंगे।

6 मई 2022 को दोपहर 3:30 बजे एडवोकेट कमिश्नर ने दोनों पक्षों की मौजूदगी में सर्वे शुरू किया शाम 5:45 तक सर्वे का काम चला पहले दिन मस्जिद के पश्चिमी दीवाल के बाहर का सर्वे किया गया 6 मई को शुक्रवार था यानी जुम्मा था लिहाजा बड़ी संख्या में मुसलमान भी वहां आए हुए थे। 

7 मई 2022 को सर्वे करने के लिए फिर टीम पहुंची 2:00 बजे के लगभग इस दिन वो अंदर जाना चाहते थे लेकिन अंदर नहीं जा पाए क्योंकि अदालत में अंदर जाने का स्पष्ट आदेश नहीं है का हवाला अंजुमन इंतजाम या मसाजिद कमेटी के वकील दे रहे थे प्रशासन से भी चाबी नहीं मिली लिहाजा उस दिन अंदर नहीं जा पाए बाहर निकलने पर हिंदू पक्ष के लोगों ने कहा कि बड़ी संख्या में मस्जिद के अंदर मौजूद मुसलमानों ने अंदर जाने से रोका और प्रशासन ने भी चाबी देने में हीला हवाली की। 


7 तारीख को ही अंजुमन इंतजाम या मसाजिद कमेटी ने एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्र पर निष्पक्षता का आरोप लगाते हुए एडवोकेट कमिश्नर बदलने की अपील की। 

अदालत ने वादी और प्रतिवादी पक्ष को एडवोकेट कमिश्नर को पक्ष रखने के लिए 9 मई की डेट फिक्स की। 

12 मई को अदालत ने वादी प्रतिवादी और एडवोकेट कमिश्नर की दलील सुनने के बाद कहा कि एडवोकेट कमिश्नर नहीं बदले जाएंगे लेकिन दो और एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किए जाएंगे इसमें एक स्पेशल एडवोकेट कमिश्नर विशाल सिंह और असिस्टेंट एडवोकेट कमिश्नर अजय प्रताप सिंह को नियुक्त किया गया अदालत ने कहा कि सर्वे का काम अब सुबह 8:00 बजे से 12:00 बजे तक होगा। 

इस फैसले में अदालत ने पहली बार स्पष्ट रूप से डीएम और पुलिस कमिश्नर को कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी है कि सर्वे को संपन्न कराएं अंदर मस्जिद के जाने की व्यवस्था करें तहखाने में ताला खुलवाएं और अगर जरूरत पड़े तो ताला भी तोड़ व्हाय और जो भी इसके खिलाफ सहयोग करें उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर सकते हैं। 

14 15 और 16 मई की तारीख नियत हुई 17 तारीख को रिपोर्ट अदालत में पेश करने के लिए कहा गया। 


इस बीच 13 मई 2022 को ज्ञानवापी परिषद के सर्वे को तत्काल प्रभाव से रुकवाने के लिए अंजुमन इंतजा मियां मसाजिद कमेटी के लोग सुप्रीम कोर्ट चले गए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले वह पूरी फाइल देखेंगे फिर निर्णय लेंगे। 


14 और 15 मई को सुबह 8:00 से 12:00 के बीच तीनों एडवोकेट कमिश्नर और वादी प्रतिवादी पक्ष की मौजूदगी के बीच सर्वे का काम हुआ सभी तहखाने देखे गए और उम्मीद की गई कि 2 दिन में सर्वे का काम खत्म हो गया लेकिन बाहर निकलने पर हिंदू पक्ष के लोगों ने कहा कि 1 दिन अभी शेष है लिहाजा ऊपर जो वजू खाना है उसका पानी निकाल कर के भी देखेंगे कि आखिर उसके अंदर क्या है 16 मई को पानी निकाला गया उसमें एक पत्थर पाया गया जिसे हिंदू पक्ष ने दावा किया कि आज विश्वेश्वर का शिवलिंग मिल गया तो मुस्लिम पक्ष ने कहा कि यह फव्वारा है। 

इस बीच जैसे ही यह मिला चुपके से हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन मंदिर से बाहर निकलते हैं अदालत ने उनके पिता हरिशंकर जैन उनके फोन पर एक एप्लीकेशन तैयार करते हैं और अदालत ने इस आशय में एक अर्जी दाखिल करते हैं कि वहां बाबा शिवलिंग मिल गए हैं लिहाजा उसे कोई क्षति न पहुंचा सके इसलिए फौरन उस इलाके को सील कर दिया जाए अदालत बिना विपक्ष को सुने उनकी इस अपील को मानती हुई वजू खाने को सील करने का आदेश दे दिया इस आदेश से अंजुमन इंतजा मियां मसाजिद कमेटी के लोग हतप्रभ रह गए क्योंकि उन्हें लगा कि यह एकतरफा आदेश हुआ है। 


17 मई को ही एक दिलचस्प घटना हुई एडवोकेट कमिश्नर विशाल सिंह अदालत के समक्ष उपस्थित होकर जहां सर्वे रिपोर्ट को पेश करने के लिए 2 दिन का वक्त मांगा तो वही एडवोकेट कमिश्नर के खिलाफ शिकायत की कि अजय कुमार मिश्रा सर्वे रिपोर्ट तैयार करने में सहयोग नहीं कर रहे हैं और उनके निजी फोटोग्राफर आरती सिंह मीडिया में सूचनाएं लिक कर रहे हैं इसके बाद अदालत ने एडवोकेट अजय मिश्रा को इस कार्रवाई से हटा दिया और कहा कि अब रिपोर्ट विशाल सिंह के सिग्नेचर से पेश होगी। 

2 दिन के समय मिलने पर एडवोकेट कमिश्नर को 19 मई को अपनी रिपोर्ट पेश करनी थ इस बीच हटाए गए एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्र 6 और 7 मई की अपनी रिपोर्ट को अदालत में पेश कर दिया जो तत्काल मीडिया में लिख दी हो गई उधर 19 मई को एडवोकेट कमिश्नर विशाल सिंह दी 10:30 बजे अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश कर दी। 


19 मई 2022 को मसाजिद कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बनारस की कोर्ट इस मामले में कोई आदेश न दें 20 मई तक बनारस की कोर्ट इस मामले में सुनवाई टाल दें। 


20 मई 2022 को अंजुमन इंतजा मियां मसाजिद कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला बनारस के जिलाध्यक्ष खुद देखें जिला जज 8 हफ्ते में सुनवाई पूरी करें तब तक 17 मई की सुनवाई के दौरान दिए गए निर्देश जारी रहेंगे। 


सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सबसे पहले मसाजिद कमेटी की उस एप्लीकेशन को सुना जाएगा कि यह मेंटेनेबल है कि नहीं है इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जिला जज ने दोनों पक्षों को सुना और फिर 26 मई की तारीख नियत की 26 मई को मसाजिद कमेटी के वकील अभय नाथ यादव 2 घंटे बहस चली लेकिन उनकी बहस पूरी नहीं हो पाई लिहाजा 30 मई को फिर डेट लगी। 


इसके बाद सुनवाई 30 मई को हुई। 30 मई को प्रतिवादी अधिवक्ता अभयनाथ यादव ने 1937 के दीन मुहम्मद केस का जिक्र करते हुए वाद खारिज करने का तर्क दिया था। इसके साथ ही हिंदू पक्ष की दायर याचिका के लगभग 50 से ज्यादा बिंदुओं पर मस्जिद पक्ष के वकीलों ने बिंदु और अपने तर्क दिए जिसकी सुनवाई 12 जुलाई तक चली । 


12 जुलाई को ही मस्जिद पक्ष के वकील की दलील खत्म होने के बाद हिंदू पक्ष ने अपनी बहस कोर्ट में जारी रखी है जो कि अभी पूरी नहीं हो पाई. इसके लिए कोर्ट ने 13 जुलाई को नई तारीख दी है, जिसमें हिंदू अपने दावे पेश किया। 


13 जुलाई को भी हिंदू पक्ष की दलील पूरी नहीं हो पाई लिहाजा 14 जुलाई को भी कोर्ट में सुनवाई हुई और हिंदू पक्ष ने अपनी दलील रखी है हिंदू पक्ष की दलील आगे के कुछ देशों पर भी चली । 


उसके बाद उनकी इस दलील का काउंटर मस्जिद पक्ष के वकीलों को देना था लेकिन इस बीच एक असामायिक घटना घट गई अंजुमन इंतजा मियां मसाजिद कमेटी के मुख्य वकील अभय नाथ यादव का अचानक देहांत हो गया उनके मृत्यु के बाद मस्जिद पक्ष काउंटर दाखिल करने के लिए 15 दिन का समय मांगा अदालत ने 15 दिन का समय दिया। 


18 अगस्त को ज्ञानवापी केस में मस्जिद पक्ष के वकील ने फिर से तारीख मांगा जिस पर अदालत खफा हो गई और 500 रुपये जुर्माना लगाते हुए अगली तारीख 22 अगस्त तय की है. साथ ही कहा है कि इस तारीख को पूरी तैयारी से आएं। 


 22 अगस्त को बहस पूरी नहीं कर सका मुस्लिम पक्ष 23 अगस्त की तारीख मिली । 


23 अगस्त को मस्जिद पक्ष की दलील पूरी नहीं हो पाई तो. इस मामले की सुनवाई को लिए कोर्ट ने 24 अगस्त सुबह 11:30 बजे का समय निर्धारित किया है। 

सुनवाई में दोनों पक्षों की बहस पूरी हो गई. दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. ज्ञानवापी प्रकरण में कोर्ट 12 सितंबर को अपना फैसला सुनाने की तारीख मुकर्रर की लिहाजा 12 सितंबर को कोर्ट यह निर्णय ले सकता है कि इस पूरे प्रकरण में दायर मुकदमा सुनवाई योग्य है या नहीं। 

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