गंगा घाट पर पितरों का तर्पण कर किया पिडदान
गंगा घाट पर पितरों का तर्पण कर किया पिडदान

मीरजापुर। पितृपक्ष के अंतिम दिन बुधवार को लोगों ने श्राद्ध, पिडदान व तर्पण कर पितरों को तृप्त किया। गंगा घाटों पर पिडदान और तर्पण करने वालों की भीड़ भोर से जुटनी शुरू हो गई। वहीं लोगों ने घरों में पुरोहितों को बुलाकर पितरों, ऋषियों और देवताओं को जल अर्पित कर सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। बाद में ब्राह्मणों को भोजन करा व दान-दक्षिणा देकर विदा किया। इस दौरान नगर के सुंदरघाट, बरियाघाट एवं नारघाट के अलावा विध्याचल के शिवपुर स्थित रामगया घाट पर लोगों की भीड़ जुटी रही।

आश्विन माह की कृष्ण पक्ष तिथि को पितृपक्ष के नाम से भी जाना जाता है। इस पखवारा में तिथि के अनुसार अपने पूर्वजों के नाम से तर्पण, पिडदान और जलदान किया जाता है। बड़े पैमाने पर लोग श्राद्ध करने के लिए बिहार के गया भी जाते हैं, जहां सरयू नदी किनारे श्राद्ध व पिडदान करते हैं। हालांकि इस वर्ष कोरोना संक्रमण का खतरा कम दिखने के कारण लोगों की भीड़ गंगा घाटों पर अधिक देखी गई। इसके पूर्व लोगों ने घरों की साफ-सफाई की और बाल बनवाए। घाटों पर पुरोहितों को सिध्धा देकर लिया आशीर्वाद पिडदान करने के बाद गंगा घाटों पर लोगों ने पुरोहितों को सिध्धा, फल, मिष्ठान व दक्षिणा देकर उनसे आशीर्वाद लिया। इस दौरान नगर के लोग अधिक संख्या में सुंदरघाट, बरियाघाट एवं नारघाट पर पिडदान करने के लिए पहुंचे थे। वही ग्रामीण इलाकों के लोग विध्याचल के रामगया घाट पहुंचे। मान्यता है कि यहां पर भगवान राम ने पिडदान किया था। कौआ, कुत्ते व गाय को खिलाया पकवान महिलाओं ने घरों की साफ-सफाई कर बनाए एक से बढ़कर एक पूड़ी पकवान। गंगा घाट से पिडदान करने के बाद घर पहुंचकर लोगों ने तैयार पकवान को कौआ, गाय, कुत्ते व चींटी आदि को खिलाया।

 सैलून पर भोर से रही भीड़-----

पितरों को लगातार पंद्रह दिन तक जल चढ़ाने के साथ दाढ़ी, मूंछ व बाल को नहीं बनवाया था। अंतिम दिन लोग सुबह से ही सैलून की दुकानों पर पहुंचकर अपनी बारी का इंतजार करने लगे। इस दौरान सैलून संचालक भी पिडदान करने वालों को प्राथमिकता देते हुए रोज के ग्राहकों का मनाकर उन्हें दोपहर बाद आने को कहा।

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