गंगा दशहरा पर काशी में आस्था का सैलाब, विधायक नीलकंठ तिवारी ने 51 बटुकों संग किया मां गंगा का दुग्धाभिषेक
वाराणसी। गंगा दशहरा के पावन अवसर पर मंगलवार को काशी के घाट श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आए। इस खास मौके पर पूर्व मंत्री एवं शहर दक्षिणी विधायक नीलकंठ तिवारी ने 51 बटुकों के साथ मां गंगा का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दुग्धाभिषेक कर विधिवत पूजन-अर्चन किया।
गंगा तट पर आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा और स्थानीय लोग शामिल हुए। हर-हर महादेव और गंगा मैया के जयघोष से पूरा घाट क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया।
51 बटुकों ने किया विशेष पूजन
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 51 बटुकों द्वारा एक साथ मां गंगा का वैदिक विधि से पूजन और दुग्धाभिषेक रहा। वैदिक मंत्रों की गूंज और श्रद्धालुओं की आस्था ने घाटों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालुओं ने मां गंगा से सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।
सनातन संस्कृति पर विधायक नीलकंठ तिवारी का बड़ा संदेश
पूजन-अर्चन के बाद मीडिया से बातचीत में विधायक नीलकंठ तिवारी ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को जोड़ने वाली जीवन शैली है। उन्होंने कहा कि काशी सदियों से आध्यात्मिक चेतना और भारतीय संस्कृति का केंद्र रही है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराएं समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य करती हैं। आधुनिकता के इस दौर में भी लोगों को अपनी जड़ों और संस्कारों से जुड़े रहना चाहिए।
युवाओं से की परंपराओं से जुड़ने की अपील
विधायक नीलकंठ तिवारी ने युवाओं से धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील करते हुए कहा कि नई पीढ़ी यदि अपनी परंपराओं से जुड़ी रहेगी, तो भारतीय संस्कृति आने वाले समय में भी सुरक्षित और जीवंत बनी रहेगी।
उन्होंने कहा कि काशी केवल एक शहर नहीं, बल्कि सनातन सभ्यता और भारतीय संस्कृति की आत्मा है।
