23 नवंबर 2007 को सीरियल बम ब्‍लास्‍ट में दहल गया था बनारस का कचहरी परिसर, नौ लोगों ने गवाई थी जान
kachari

आज ही के दिन वर्ष 2007 में कचहरी परिसर बम के धमाकों से थर्रा उठा था। इस हादसे में जान गंवाने वाले अधिवक्‍ताओं और अन्‍य लोगों को वाराणसी की कचहरी में मंगलवार को श्रद्धांजलि दी गई तो अपनों और अपने साथियों को गंवाने वाले अधिवक्‍ताओं के आंखों के कोर गीले हो उठे। इस वारदात के दौरान तीन अधिवक्‍ताओं सहित कुल नौ लोगों की मौत हुई थी। मंगलवार को बम विस्फोट कांड की बरसी पर वकीलों ने कचहरी परिसर में श्रद्धांजलि दी।

चौदह साल पूर्व कचहरी परिसर में हुए सीरियल बम ब्लास्ट में मारे गए अधिवक्ताओं तथा वादकारियों को अधिवक्ताओं ने मंगलवार को नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। अधिवक्ताओं ने विस्फोट स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित की तथा मोमबत्ती जलाकर श्रद्धासुमन अर्पित किये। साथ ही घटना के विरोध में पूरे दिन न्यायिक कार्य से विरत रहे।

बता दें कि 23 नवंबर 2007 को कचहरी परिसर में सीरियल बम ब्लास्ट हुआ था। इस घटना में तीन अधिवक्ताओं भोला सिंह, बह्म प्रकाश शर्मा व बुद्धिराज वर्मा समेत नौ लोगों की मौत हो गई थी जबकि 50 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए थे। दुःखद पहलू यह है कि इस आतंकी घटना को बीते 14 वर्ष हो गए लेकिन आज तक न तो इसका खुलासा हुआ और न ही वारदात में शामिल किसी की गिरफ्तारी ही हुई। इस घटना के विरोध में बार एसोसिएशन ने मंगलवार को पूरे दिन न्यायिक कार्य नहीं करने का निर्णय लिया। इस अवसर पर सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार उपाध्याय ने कहा कि घटना के 14 वर्ष बीत जाने के बाद ही अब तक किसी की गिरफ्तारी न होना शासन-प्रशासन की का कार्यप्रणाली की विफलता दर्शाती है। कचहरी काफी संवेदनशील स्थान है। परिसर की समुचित सुरक्षा को लेकर कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है।

सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रशासन और शासन द्वारा स्पेशल फोर्स तैनात किये जाना चाहिए।

श्रद्धांजलि देने वालों में प्रदेश बार काउंसिल सदस्य हरिशंकर सिंह,सेंट्रल बार अध्यक्ष अशोक कुमार उपाध्याय, महामंत्री कन्हैयालाल पटेल, बनारस बार अध्यक्ष विनोद कुमार पांडेय, महामंत्री विवेक कुमार सिंह, उपाध्यक्ष सत्येंद्र कुमार श्रीवास्तव, सुजीत कुमार पांडेय, प्रशांत कुमार श्रीवास्तव, विनय कुमार सिंह पिंटू, धीरेंद्र नाथ शर्मा, सुनील कुमार मिश्रा, राजा आनंद ज्योति, नित्यानंद राय, प्रभु नारायण पांडेय, मुरलीधर सिंह, रत्नेश्वर पांडेय, शशांक श्रीवास्तव आदि मौजूद थे।

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