नाबार्ड ने जिला सहकारी बैंक प्रयागराज के सम्मेलन हॉल में कृषि क्लीनिक और कृषि व्यवसाय केंद्र पर कार्यशाला का आयोजन
नाबार्ड ने जिला सहकारी बैंक प्रयागराज के सम्मेलन हॉल में कृषि क्लीनिक और कृषि व्यवसाय केंद्र पर कार्यशाला का आयोजन

 
एग्री-क्लिनिक और एग्री-बिजनेस सेंटर (एसीएबीसी) कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की प्रमुख योजना है, जिसे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन मैनेजमेंट (मैनेज), हैदराबाद द्वारा राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के सहयोग से लागू किया गया है। इसका उद्देश्य कृषि और संबद्ध विषयों के स्नातकों को प्रशिक्षण देना है ताकि वे अपने स्वयं के कृषि उद्यम शुरू कर सकें और किसानों को विस्तार सेवाएं प्रदान कर सकें। एग्री-क्लिनिक और एग्री-बिजनेस सेंटर (एसी एंड बीसी) योजना कृषि उद्यम स्थापित करने के लिए कृषि उद्यमियों के लिए एक लॉन्चपैड है। कृषि उद्यमी किसानों के दरवाजे पर मूल्य वर्धित विस्तार सेवाएं प्रदान करके और उनकी आजीविका के लिए आय उत्पन्न करके एक जीत की स्थिति बनाते हैं।
 
समय के साथ, वे व्यवसाय में वृद्धि करते हैं, स्थानीय ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करते हैं, बाजार समर्थन सहित विविध सेवाएं प्रदान करके किसानों की समृद्धि सुनिश्चित करते हैं। कई कृषि उद्यमी प्रसंस्करण क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं जो "वोकल टू लोकल" को दोहराता है।

नाबार्ड ने जिला सहकारी बैंक प्रयागराज के सम्मेलन हॉल में कृषि क्लीनिक और कृषि व्यवसाय केंद्र पर कार्यशाला का आयोजन
 
कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने 9 अप्रैल, 2002 को नाबार्ड के सहयोग से एक अनूठी योजना अर्थात कृषि-क्लीनिक और कृषि-व्यवसाय केंद्र (एसी और एबीसी) शुरू की। योजना का उद्देश्य सार्वजनिक विस्तार सेवाओं को मजबूत करना है और साथ ही बेरोजगार स्नातकों की क्षमता का दोहन करें और उन्हें उद्यमी बनाकर रोजगार के अवसर प्रदान करें।
 
उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने इस योजना को इस तरह से तैयार किया है कि कृषि स्नातकों और कृषि डिप्लोमा धारकों को नौकरियों की तलाश में शहरों की ओर भागने की जरूरत नहीं है और वे अपने सेवा केंद्रों के माध्यम से अपनी आजीविका कमा सकते हैं, साथ हीं साथ वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अच्छा योगदान देते हैं। श्री अनिल शर्मा, डीडीएम, नाबार्ड ने इस विषय पर एक प्रस्तुति दी और बैंकरों, सरकारी अधिकारियों और अन्य प्रतिभागियों को समझाया कि यदि कृषि स्नातकों को एसीएबीसी के तहत ऋण प्रदान किया जाता है, तो न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में विस्तार सेवाओं में वृद्धि होगी, बल्कि ऐसे कृषि का स्वरोजगार भी होगा। श्री विनोद शर्मा, उप निदेशक कृषि, श्री सोरन सिंह, क्षेत्रीय प्रबन्धक, बड़ौदा यूपी ग्रामीण बैंक और पीडी आत्मा, केवीके वैज्ञानिक तथा बैंकरों ने कार्यशाला में भाग लिया।

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