मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड: “शादी, बेवफाई और खौफनाक कत्ल! नीले ड्रम में मिला था सौरभ का शव, मुस्कान-साहिल को मौत की सजा”
मेरठ। मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में 14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई। यह मामला सौरभ राजपूत की हत्या और उनके शव को नीले प्लास्टिक के ड्रम में सीमेंट व रेत के बीच छिपाने से जुड़ा है। 30 सितंबर 2026 को अदालत दोनों को दोषी करार दे चुकी थी। करीब 13 महीने चली सुनवाई में 126 पेशियां हुईं और अभियोजन पक्ष के 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
इस मामले ने देशभर में सुर्खियां बटोरीं। इसकी वजह केवल हत्या नहीं, बल्कि शव को छिपाने का तरीका, जांच में सामने आए घटनाक्रम और लंबी न्यायिक प्रक्रिया भी रही। आइए, सौरभ राजपूत की शादी से लेकर हत्या के खुलासे, गिरफ्तारी, अदालत में सुनवाई और सजा के फैसले तक की पूरी कहानी सिलसिलेवार समझते हैं।
शादी, परिवार और विदेश में नौकरी का दौर- 2016: परिवार की मर्जी के खिलाफ हुई शादी
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मेरठ निवासी सौरभ राजपूत और मुस्कान रस्तोगी ने वर्ष 2016 में परिवार की इच्छा के खिलाफ घर से निकलकर शादी की थी। बाद में दोनों परिवारों ने इस रिश्ते को स्वीकार कर लिया। शादी के बाद दोनों साथ रहने लगे और उनके परिवार में एक बेटी का जन्म हुआ।
शुरुआती वर्षों में दोनों के जीवन में पारिवारिक जिम्मेदारियां और रोजगार प्रमुख हिस्सा थे। बाद में उनके रिश्ते में तनाव और साहिल शुक्ला से मुस्कान के संबंधों की बात जांच के दौरान सामने आई। अभियोजन पक्ष ने इसी पृष्ठभूमि को हत्या की साजिश से जोड़कर अदालत में अपना पक्ष रखा।
2019: सौरभ की नौकरी और बेटी का जन्म
सौरभ पहले मर्चेंट नेवी में काम कर चुके थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बाद में उन्होंने विदेश में नौकरी की और लंदन में एक मॉल में सेल्स मैनेजर के रूप में काम किया। इसी अवधि में उनकी बेटी का जन्म हुआ। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच सौरभ का विदेश में रहना और मुस्कान का बेटी के साथ मेरठ में रहना भी इस मामले की पृष्ठभूमि का हिस्सा रहा।
24 फरवरी 2025: लंदन से मेरठ लौटे सौरभ
सौरभ 24 फरवरी 2025 को लंदन से मेरठ लौटे थे। रिपोर्टों के अनुसार, उनका उद्देश्य परिवार के साथ समय बिताना और पत्नी व बेटी के जन्मदिन से जुड़े अवसरों पर साथ रहना था। 25 फरवरी को मुस्कान का जन्मदिन और 28 फरवरी को बेटी का जन्मदिन था।
उस समय परिवार के लिए ये सामान्य अवसर थे। लेकिन कुछ ही दिनों बाद सौरभ की हत्या हो गई। पुलिस जांच और अभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार, हत्या के पीछे मुस्कान और साहिल की साजिश थी।
हत्या और नीले ड्रम में शव छिपाने का मामला- 3 मार्च 2025: सौरभ की हत्या
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 3 मार्च 2025 को सौरभ की हत्या की गई। जांच में आरोप लगाया गया कि मुस्कान ने सौरभ को नशीली या नींद लाने वाली दवा दी। इसके बाद साहिल शुक्ला को बुलाया गया और दोनों ने कथित तौर पर चाकू से हमला किया।
सौरभ की मौत के बाद उनके शव के टुकड़े किए गए। इस घटना से जुड़े विवरण पुलिस की जांच और अदालत में पेश अभियोजन के मामले का हिस्सा बने। मुकदमे में अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोनों की भूमिका स्थापित करने का प्रयास किया।
3–4 मार्च 2025: नीले ड्रम में छिपाया गया शव
हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए नीले प्लास्टिक के ड्रम का इस्तेमाल किया गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, शव के टुकड़ों को ड्रम में रखकर सीमेंट और रेत से ढक दिया गया, ताकि हत्या का पता न चले।
यही ड्रम आगे चलकर इस पूरे मामले की पहचान बन गया। शव को छिपाने का तरीका और उसके बाद सामने आए घटनाक्रम ने जांच को गंभीर बना दिया। पुलिस ने मकान से जुड़े साक्ष्य जुटाए और आरोपियों की गतिविधियों की पड़ताल की।
4 मार्च 2025: मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश गए
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हत्या के बाद मुस्कान अपनी बेटी को मायके छोड़कर साहिल के साथ हिमाचल प्रदेश चली गई थी। दोनों की यात्रा और वहां की गतिविधियां बाद में जांच का हिस्सा बनीं।
रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि इस अवधि में सौरभ के फोन से परिवार के लोगों को संदेश भेजे गए। पुलिस ने इन घटनाओं, यात्रा से जुड़े तथ्यों और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की। हालांकि, किसी भी घटना के पीछे की मंशा को लेकर निष्कर्ष अदालत में पेश साक्ष्यों और न्यायिक निर्णय के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
मार्च 2025: परिवार को हुआ शक
सौरभ से संपर्क नहीं होने और परिस्थितियां संदिग्ध लगने पर उनके परिजनों की चिंता बढ़ने लगी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुस्कान ने बाद में अपने मायके पक्ष को हत्या के बारे में बताया, जिसके बाद पुलिस तक मामला पहुंचा।
पुलिस ने मेरठ स्थित उस मकान की जांच की, जहां सौरभ रहते थे। इसी जांच के दौरान नीले ड्रम में छिपाए गए शव का मामला सामने आया। इसके बाद पुलिस ने हत्या, शव छिपाने और साक्ष्य मिटाने से जुड़े पहलुओं पर जांच तेज कर दी।
17 मार्च 2025: नीले ड्रम से बरामद हुए शव के अवशेष
17 मार्च 2025 को पुलिस ने मेरठ में नीले ड्रम से सौरभ राजपूत के शव के अवशेष बरामद किए। इस बरामदगी के बाद मामला व्यापक रूप से चर्चा में आ गया।
पुलिस ने घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य जुटाए और शव की पहचान, हत्या की परिस्थितियों तथा इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच की। मामले में फॉरेंसिक साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों का महत्व बढ़ गया। आगे चलकर अभियोजन पक्ष ने इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अदालत में अपना मामला रखा।
18 मार्च 2025: मुस्कान और साहिल गिरफ्तार
शव बरामद होने के बाद पुलिस ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में हत्या, शव छिपाने और हिमाचल प्रदेश की यात्रा से जुड़े पहलुओं की जांच की गई।
गिरफ्तारी के बाद मामला पुलिस जांच से आगे बढ़कर न्यायिक प्रक्रिया में दाखिल हो गया। जांचकर्ताओं ने गवाहों के बयान, घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड एकत्र किए, ताकि अदालत में आरोपों को साबित करने के लिए सामग्री पेश की जा सके।
19 मार्च 2025: न्यायिक हिरासत में भेजे गए दोनों आरोपी
गिरफ्तारी के बाद दोनों को अदालत में पेश किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, 19 मार्च 2025 को उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच और साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया जारी रखी। इस चरण में घटनास्थल, शव की बरामदगी, आरोपियों की गतिविधियों और कथित साजिश से जुड़े तथ्यों को जांच में शामिल किया गया।
चार्जशीट से अदालत के फैसले तक-12 मई 2025: पुलिस ने दाखिल की चार्जशीट
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने 12 मई 2025 को अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया। मीडिया रिपोर्टों में चार्जशीट करीब एक हजार पन्नों की बताई गई है। इसमें हत्या और साक्ष्य मिटाने से संबंधित आरोपों के साथ जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री शामिल थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, चार्जशीट में गवाहों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों का उल्लेख था। मामले से जुड़े परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों के बयान भी जांच का हिस्सा बने। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत में मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ी।
24 नवंबर 2025: जेल में बच्ची को दिया जन्म
मुकदमे की सुनवाई के दौरान मुस्कान ने 24 नवंबर 2025 को जेल में एक बच्ची को जन्म दिया। मीडिया रिपोर्टों में मां और नवजात की देखभाल से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख किया गया। इसी अवधि में सौरभ के परिवार की ओर से बच्ची के पितृत्व की पुष्टि के लिए डीएनए जांच की मांग किए जाने की खबरें भी सामने आईं।
यह घटनाक्रम मामले की सुनवाई के दौरान चर्चा में रहा, लेकिन अदालत में हत्या और साक्ष्य मिटाने से जुड़े आरोपों पर कानूनी प्रक्रिया अलग से जारी रही।
मार्च 2025 से सितंबर 2026: 126 पेशियां और 22 गवाह
चार्जशीट दाखिल होने के बाद मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ी। अभियोजन पक्ष ने अदालत में गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्य पेश किए। रिपोर्टों के अनुसार, सुनवाई के दौरान अभियोजन के 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और कुल 126 पेशियां हुईं।
मामले में प्रत्यक्षदर्शी की अनुपस्थिति के बावजूद अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य, फॉरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित करने की कोशिश की। अदालत ने सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया।
17 सितंबर 2026: अंतिम बहस पूरी
सितंबर 2026 में मुकदमा अपने अंतिम चरण में पहुंचा। 17 सितंबर को अंतिम बहस पूरी होने की जानकारी सामने आई। अभियोजन पक्ष ने अदालत में पेश साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अपना पक्ष रखा।
अभियोजन ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए दोनों दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की। इसके बाद अदालत ने फैसले की दिशा में अगला चरण पूरा किया।
30 सितंबर 2026: मुस्कान और साहिल दोषी करार
30 सितंबर 2026 को मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले में दोषी करार दिया। यह फैसला करीब 13 महीने चली सुनवाई के बाद आया।
दोषसिद्धि के बाद अदालत ने सजा सुनाने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की। इसके बाद अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों के बीच सजा की मात्रा पर फैसला सुनाए जाने का इंतजार किया जाने लगा।
14 अक्टूबर 2026: दोनों को मृत्युदंड की सजा
14 अक्टूबर 2026 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई। दोनों दोषी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जेल से अदालत में जुड़े थे। कोर्ट रूम में सौरभ राजपूत की मां रेनू राजपूत और उनके भाई मौजूद रहे।
अभियोजन पक्ष ने अपराध को दुर्लभतम श्रेणी का बताते हुए मृत्युदंड की मांग की थी। अदालत ने दोषसिद्धि के बाद सजा पर फैसला सुनाया। इस फैसले के साथ मामले की सुनवाई का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ। हालांकि, मृत्युदंड सुनाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि सजा पर सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं; आगे अपील और कानून के तहत अन्य न्यायिक प्रक्रियाएं लागू हो सकती हैं।
नीला ड्रम हत्याकांड क्यों चर्चा में रहा?
इस मामले की चर्चा के पीछे कई प्रमुख वजहें रहीं...
सौरभ राजपूत की हत्या और शव को नीले ड्रम में छिपाने का मामला। पुलिस जांच में सामने आए घटनाक्रम और हिमाचल प्रदेश की यात्रा। फॉरेंसिक तथा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर चला मुकदमा। 126 पेशियों और 22 अभियोजन गवाहों के बाद आया फैसला। 30 सितंबर 2026 को दोषसिद्धि और 14 अक्टूबर को मृत्युदंड की सजा।
मेरठ का नीला ड्रम हत्याकांड एक हत्या की जांच से शुरू होकर लंबी न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचा। मार्च 2025 में शव के अवशेष मिलने के बाद पुलिस ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया। मई 2025 में चार्जशीट दाखिल हुई, इसके बाद गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर मुकदमा चला। 30 सितंबर 2026 को दोनों दोषी करार दिए गए और 14 अक्टूबर को अदालत ने
मृत्युदंड की सजा सुनाई।
यह फैसला मामले की न्यायिक प्रक्रिया का अहम पड़ाव है। मृत्युदंड के बाद भी कानून के तहत अपील और अन्य न्यायिक विकल्प उपलब्ध रहते हैं, इसलिए आगे की कानूनी प्रक्रिया पर भी नजर बनी रहेगी।
