मृदा स्वास्थ्य सुधारनें को जैविक खेती अपनायें किसान
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कृषक समूहों को जैविक खेती का प्रशिक्षण

वाराणसी। बढ़ते मृदा प्रदूषण को दृष्टिगत रखते हुए और बिष मुक्त खाद्यान्न उत्पादन के लिए जरूरी है कि किसान रसायनिक कीटनाशकों की वजाय जैविक कीटनाशकों का प्रयोग करें।उक्त सलाह खण्ड तकनीकी प्रबंधक देवमणि त्रिपाठी ने  मंगलवार को हड़ियाडीह गाँव मे कृषक प्रशिक्षण मे उपस्थित किसानों को दी।उन्होंने कहा कि खराब हो रही मृदा की सेहत को सुधारने के लिए किसान जैविक खेती अपनाएं।सहायक विकास अधिकारी कृषि शिवदास ने किसानों से कहा कि वे फसल की कटाई के बाद फसल अवशेषों को न जलाएं बल्कि डिकम्पोजर का प्रयोग करके जैविक खाद बनाकर खेतों मे प्रयोग करें।

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उप कृषि निदेशक अखिलेश कुमार सिंह के आदेशानुसार नमामि गंगे योजनान्तर्गत जैविक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।नमामि गंगे योजना के प्रोजेक्ट हेड स्वामी शरण कुशवाहा ने किसानों को बीजामृत,जीवामृत,दशपर्णी अर्क को बनाने की विधि का किसानों के समक्ष प्रदर्शन किया।जैविक खेती समूह के किसानों को हड़ियाडीह के प्रगतिशील किसान श्यामजी पाण्डेय के जैविक प्लाट का विजिट कराया गया।इस दौरान पंकज भास्कर, रमाशंकर मौर्या,रामचंदर पटेल,जगदीश सिंह,राजेश राम आदि उपस्थित रहे।

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