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चाइनीज मांझे से हो रही मौतों पर आजाद अधिकार सेना ने उठाई आवाज, राष्ट्रपति से सख्त कार्रवाई की मांग

प्रतिबंधित मांझे की बिक्री, भंडारण और इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगाने के साथ अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग

 

चंदौली। प्रतिबंधित चाइनीज मांझे से होने वाली मौतों और गंभीर दुर्घटनाओं पर चिंता जताते हुए आजाद अधिकार सेना ने इसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की मांग उठाई है। संगठन की ओर से राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी, चंदौली के माध्यम से भेजा गया। ज्ञापन में प्रतिबंधित मांझे के निर्माण, आयात, भंडारण, बिक्री, वितरण और इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगाने के साथ ही संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

 

संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से प्रतिबंधित चाइनीज मांझे से नागरिकों के जीवन और सुरक्षा को उत्पन्न खतरे की ओर राष्ट्रपति का ध्यान आकर्षित किया। संगठन का कहना है कि अक्टूबर 2026 में गोरखपुर और वाराणसी में मांझे से संबंधित घटनाओं में हुई मौतों की खबरें बेहद चिंताजनक हैं। ऐसी घटनाएं प्रतिबंध के बावजूद बाजार में मांझे की उपलब्धता और रोकथाम के लिए लागू व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती हैं।

ज्ञापन में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के 11 जुलाई 2017 के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि नायलॉन, सिंथेटिक और अन्य प्रतिबंधित गैर-जैव-अपघटनीय मांझे पर रोक लगाने तथा संबंधित अधिकारियों को प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। संगठन ने मांग की कि प्रतिबंधित मांझे की उपलब्धता और इससे होने वाली दुर्घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मौजूदा कानूनी व्यवस्था की समीक्षा की जाए, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हो सके।

आजाद अधिकार सेना ने प्रतिबंधित मांझे की ऑनलाइन बिक्री और वितरण पर भी प्रभावी रोक लगाने की मांग की है। संगठन के अनुसार, इसके लिए नियमित जांच अभियान चलाने, प्रतिबंधित मांझे को जब्त करने और दोषियों के खिलाफ कानून के तहत दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करना आवश्यक है। साथ ही, प्रतिबंध के अनुपालन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने तथा जरूरत पड़ने पर केंद्रीय स्तर पर स्पष्ट कानूनी प्रावधान बनाने या मौजूदा कानूनों में संशोधन पर विचार करने की मांग की गई है।

संगठन ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में प्रतिबंधित मांझे से संबंधित न्यायिक आदेशों एवं कानूनी प्रावधानों का कड़ाई से पालन कराने पर जोर दिया। उसका कहना है कि नागरिकों की जान की सुरक्षा के लिए केवल प्रतिबंध लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन भी जरूरी है। इसके लिए संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर अंकुश लगाया जा सके तथा भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

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