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100 साल पुरानी वक्फ मस्जिद के ध्वस्तीकरण का विरोध, न्यायिक जांच की मांग

 100 साल पुरानी वक्फ मस्जिद के ध्वस्तीकरण का विरोध, न्यायिक जांच की मांग

चंदौली। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित करीब 100 वर्ष पुरानी वक्फ मस्जिद के ध्वस्तीकरण के विरोध में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के चंदौली जिलाध्यक्ष डॉ. अलाउद्दीन कादरी ने राष्ट्रपति और जिलाधिकारी चंदौली को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से मामले की न्यायिक जांच कराने, कार्रवाई की निष्पक्ष जांच करने और ध्वस्त की गई मस्जिद के पुनर्निर्माण की मांग की गई।

ज्ञापन में दावा किया गया कि सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद करीब 100 वर्ष पुरानी थी और उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अभिलेखों में दर्ज थी। आरोप लगाया गया कि कलेक्ट्रेट परिसर के निर्माण से पहले से मौजूद इस मस्जिद को एक निजी व्यक्ति की शिकायत के आधार पर सरकारी भूमि बताते हुए प्रशासन ने बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया।

डॉ. अलाउद्दीन कादरी ने कहा कि धार्मिक स्थल से जुड़ी इस कार्रवाई से लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। ज्ञापन में संविधान में प्रदत्त समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन से जुड़े अधिकारों का हवाला देते हुए कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि जिस भूमि को सरकारी बताया जा रहा है, उसे वक्फ संपत्ति होने का दावा किया गया है। ऐसे में संबंधित भूमि के दस्तावेजों और वक्फ बोर्ड के अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराए जाने की आवश्यकता है। साथ ही धार्मिक स्थलों से संबंधित न्यायिक आदेशों का हवाला देते हुए कहा गया कि किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित पक्ष को नोटिस, सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।

AIMIM जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सहारनपुर में मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उन्होंने धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में प्रशासन से निष्पक्षता और सभी पक्षों के लिए समान कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।

ये हैं प्रमुख मांगें

ज्ञापन में मांग की गई कि पूरे मामले की हाईकोर्ट के सिटिंग जज से न्यायिक जांच कराई जाए। जांच में यदि किसी अधिकारी की भूमिका नियमविरुद्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इसके अलावा ध्वस्त की गई मस्जिद का उसी स्थान पर वक्फ बोर्ड की निगरानी में पुनर्निर्माण कराने की मांग भी की गई।

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