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विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए उपजाऊ जमीन अधिग्रहण का विरोध, किसानों ने आंदोलन का किया ऐलान

विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए उपजाऊ जमीन अधिग्रहण का विरोध, किसानों ने आंदोलन का किया ऐलान

चंदौली। प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण की संभावना को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। गुरुवार को चंदौली जनपद के चिरईगांव गांव में भारतीय किसान संगठन के पदाधिकारियों और किसानों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें किसानों के हितों की रक्षा के लिए आंदोलन की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि विंध्य एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए जिन क्षेत्रों को चिन्हित किए जाने की चर्चा है, उनमें बड़ी मात्रा में उपजाऊ कृषि भूमि शामिल है। यदि किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया जाता है तो हजारों परिवारों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा। किसानों का कहना है कि कृषि योग्य भूमि केवल संपत्ति नहीं बल्कि उनके जीवन और रोजगार का आधार है।

किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण क्षेत्र की कृषि व्यवस्था को कमजोर करेगा और किसानों के भविष्य को संकट में डाल देगा। उन्होंने मांग की कि सरकार परियोजना के लिए ऐसे वैकल्पिक मार्गों पर विचार करे, जिससे खेती योग्य जमीन को नुकसान न पहुंचे और किसानों के हित सुरक्षित रह सकें।

बैठक की अध्यक्षता भारतीय किसान संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष सारनाथ सिंह ने की। उन्होंने कहा कि संगठन किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगा और किसी भी स्थिति में किसानों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी। वहीं बैठक का संचालन अशोक सिंह ने किया। उन्होंने किसानों से एकजुट रहने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।

बैठक में मौजूद किसानों और संगठन के पदाधिकारियों ने विंध्य एक्सप्रेसवे के नाम पर कृषि भूमि अधिग्रहण का विरोध करते हुए आगे की रणनीति तय की। निर्णय लिया गया कि आवश्यकता पड़ने पर धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन सौंपने और जनजागरण अभियान चलाकर किसानों की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाया जाएगा।

इस दौरान जयशंकर सिंह प्रधान, जनार्दन सिंह, महेश्वर सिंह, संत विलास सिंह, जितेंद्र यादव, अरुण सिंह, अशोक सिंह समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

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