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चंदौली में शिक्षक दिवस पर सपा का अनोखा प्रदर्शन, 26 हजार बंद स्कूल खोलने की मांग

चंदौली में शिक्षक दिवस पर सपा का अनोखा प्रदर्शन, 26 हजार बंद स्कूल खोलने की मांग

चंदौली। शिक्षक दिवस के अवसर पर समाजवादी पार्टी ने सरकारी स्कूलों को लेकर चंदौली में विरोध-प्रदर्शन किया। अखिलेश यादव के आह्वान पर सैयदराजा विधानसभा क्षेत्र के मनराजपुर गांव में आयोजित कार्यक्रम में पार्टी नेताओं ने प्रदेश में बंद पड़े सरकारी स्कूलों को दोबारा शुरू करने की मांग उठाई।

कार्यक्रम का आयोजन विधानसभा अध्यक्ष रामजनम यादव के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान शिक्षकों के सम्मान के साथ सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का संदेश दिया गया।

पूर्व विधायक ने शिक्षकों को किया सम्मानित

कार्यक्रम में सपा के राष्ट्रीय सचिव और सैयदराजा के पूर्व विधायक मनोज सिंह ‘डब्लू’ ने शिक्षकों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल बच्चों को शिक्षा देने का काम नहीं करते, बल्कि समाज के निर्माण में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शिक्षकों का सम्मान और उनकी भूमिका को प्राथमिकता देना जरूरी है।

26 हजार बंद स्कूलों को फिर खोलने की मांग

सपा नेताओं ने प्रदेश में बंद बताए जा रहे करीब 26 हजार सरकारी स्कूलों को दोबारा संचालित करने की मांग की। पार्टी की ओर से कहा गया कि सरकारी विद्यालयों को बंद करने के बजाय उनमें आवश्यक सुविधाएं बढ़ाकर शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया जाना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान ‘सुनो पाठशाला की पुकार, सरकारी शिक्षा को बचाएगी समाजवादी सरकार’ का संदेश भी दिया गया।

भाजपा सरकार पर पूर्व विधायक का निशाना

मनोज सिंह ‘डब्लू’ ने भाजपा सरकार पर सरकारी स्कूलों को बंद करने का आरोप लगाया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि अलग-अलग सरकारों के दौरान स्कूलों को लेकर अलग-अलग काम हुए। उनका आरोप था कि बसपा सरकार ने शिलान्यास किया, सपा सरकार ने उद्घाटन किया, जबकि भाजपा सरकार के कार्यकाल में स्कूल बंद किए गए।

पूर्व विधायक ने दावा किया कि प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर बंद किए गए 26 हजार स्कूलों को फिर से खोला जाएगा।

शिक्षक संघ के पदाधिकारी भी रहे मौजूद

कार्यक्रम में समाजवादी शिक्षक संघ के राष्ट्रीय सचिव हरदेव सिंह कुशवाहा समेत पार्टी के अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। नेताओं ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था को बचाने और स्कूलों को दोबारा संचालित करने की मांग को आगे भी उठाने की बात कही।

कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों के सम्मान के साथ शिक्षा से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रमुखता से उठाने का संदेश दिया गया।

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