×

अयोध्या में एक शाम ग्रामर्षि के नाम कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन

अयोध्या में एक शाम ग्रामर्षि के नाम कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन

कवि सम्मेलन में विभिन्न विधाओ के कवियों ने अपनी रचनाओं से रात्रिभर श्रोताओं को गुदगुदाये रखा और प्रचंड ठंड में भी गर्मी का एहसास कराया।


कवि सम्मेलन का शुभारंभ भाजपा के अयोध्या जिलाध्यक्ष संंजीव स़िह ने महाविद्यालय के प्रबंधक और एमएलसी हरिओम पांडेय ,प्राचार्य डा राकेशच़द्र  तिवारी सहित सहयोगियों के साथ मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित कर और पुष्प अर्पित कर  किया। कवि सम्मेलन की शुरुआत कवियत्री अर्चना द्विवेदी ने मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत कर की। संचालन बिहारी लाल अंबर  ने किया।अध्यक्षता वरिष्ठ कवि अशोक टाटंबरी ने की।

ओज के कवि अभय सिंह निर्भीक ने ..'भारत माता का हरगिज़ सम्मान नही खोने देंगे,

अपने पूज्य तिरंगे का अपमान नहीं होने देंगे। पढ़कर सबको देशभक्ति से ओतप्रोत कर दिया।

कवि अशोक टाटंबरी ने  कि ..'पुण्य सरयू सलिल आचमन के लिए,

राम जी को ह्दय से नमन के लिए,

बानवे हो या बाईस न घबराइये,

टूटती है अयोध्या सृजन के लिए|

पढ कर अयोध्या में टूट रहे लोगो को सचेत किया।

कवियत्री अर्चना द्विवेदी ने ..' फूल खिलते रहे इस चमन में सदा,

दिल मचलते रहे इस चमन में सदा,

क्या पता आज है, कल रहें ना रहें,

हसके मिलते रहे इस चमन में सदा।' पढ़कर सबका दिल जीत लिया और आपसी प्रेम,भाईचारे व एकता की सीख दी।

प्रख्यात गीतकार कुंवर जावेद ने....' प्यार यहां त्यवहार बनाया जाता है,

बम तो सरहद पार बनाया जाता है।' पढ़ कर खूब तालियां बटोरी।कवियत्री डा निरुपमा श्रीवास्तव ने ...'हमको उम्मीद है खुशबू से तरबतर होगा,

ये नया साल गये साल से बेहतर होगा।'पढ़कर श्रोताओं को सकारात्मक चिंतन के लिए प्रेरित किया।

कवि पवन शुक्ल ने ...' मैं ही देवो का महादेव,मैं ही कालो का काल महाकाल,

मैं दुनिया में कंकर हूं। मैं ही घरो और मंदिरों में शंकर हूं।' पढ़ कर सब को भक्ति रस से सराबोर कर दिया।

कब नदीम मुबारकपुरी ने जब प्रेम की रचना पढ़ी, तब युवाओं को दिल मचल उठे। उन्होंने पढ़ा कि...' बहुत बेचैन लगते हो मोहब्बत हो गई है क्या,

किसी से दिल लगाने की हिमाकत हो गई है क्या,

सुना है आजकल तुम दोस्तों से दूर रहते हो,

किसी की याद में जीने की आदत हो गई है क्या।'

कवियत्री वंदना शुक्ला की ये रचना ....' सुख समृद्धि और प्रसन्नता की बेल को काट देते हैं,

जिसने बोलना सिखाया उसे ही डांट देते हैं,

आज हम अपने थोड़े स्वार्थ के कारण,

घर,आंगन दालान क्या - मां बाप को भी डांट देते हैं।' की ये पंक्तियां श्रोताओं द्वारा खूब पसंद की गई।

इसके अलावा हलचल टांडवी,अजय उपाध्याय  और चांदनी शबनम आदि कई  कवियो ने अपनी रचना पढ़ी।


इस अवसर पर भाजपा नेता राघवेंद्र पांडे, प्राचार्य डा राकेशचंद्र तिवारी, डॉ अनुपम पांडे, डॉक्टर हरीश सिंह, मुख्य कुलानुशासक  डॉ राजेश मिश्रा, महेश जायसवाल, डॉ दिनेश मिश्र, गिरीश चतुर्वेदी, अवनीश पांडे, डा राजेश तिवारी,डॉ विनोद तिवारी, डॉक्टर नरेंद्र कुमार पांडे, डॉ सुधांशु चतुर्वेदी, पुस्तकालयाध्यक्ष  विजय उपाध्याय, कार्यालय अधीक्षक शिव शंकर मिश्र, डॉक्टर विनोद गौड़, डॉक्टर शैलेंद्र सिंह, डॉक्टर नीरज मिश्र, डॉ कालीसहाय पाठक, अवनीश मिश्रा, बीटीसी विभाग के डॉ राजेश मिश्रा  दिनेश तिवारी आदि लोग उपस्थित रहे।

Share this story