चंदौली में एक ऐसा गांव जहां रास्ता ही नहीं, पगडंडियों के सहारे आने-जाने को मजबूर स्कूली बच्चें
चंदौली में एक ऐसा गांव जहां रास्ता ही नहीं, पगडंडियों के सहारे आने-जाने को मजबूर स्कूली बच्चें

चंदौली की तस्वीरे बहुत विचलित करती है खासकर विकास के दावों की पोल खोलती  है। तमाम राजनीतिक पार्टियों के दावों के जुंमले ही यहां भी देखने को मिले। 2022 विधानसभा चुनाव भी गया, इससे पहले भी कई चुनाव लोकसभा,विधानसभा, पंचायत चुनाव हुए लेकिन यहां के हालात नही बदले। हम आपको बरहनी विकास खण्ड के खेदाई नरायनपुर गांव की तस्वीरे दिखा रहे हैं जो सैयदराजा विधानसभा में आता है और सैयदराजा नगर से सिर्फ 5 किलोमीटर दूर है और जिस मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने किया था उससे महज़ 2 किलोमीटर की दूरी पर यह गांव स्थित है जो खुद अपने ही बदहाली पर आंसू बहा रहा है। विकास कार्यो का जायज़ा लेने के लिए जब हम गांव में गए तो देखा कि एक स्कूल में बच्चे पढ़ाई कर रहे थे लेकिन चौकाने वाली बात यह रही कि स्कूल जाने का कोई रास्ता ही नही था। मतलब बच्चे किसी निजी जमीन से होते हुए स्कूल आते जाते हैं। 

चंदौली में एक ऐसा गांव जहां रास्ता ही नहीं, पगडंडियों के सहारे आने-जाने को मजबूर स्कूली बच्चें
इस संबंध में जब हमनें वहां मौजुद प्रधानाचार्य अवनीश कुमार पांडेय से बात किया तो  उन्होंने कहा कि यह जटिल समस्या है। इसकी शिकायत लिखित रूप से वह बेसिक शिक्षा कार्यालय से लेकर सीडीओ साहब तक अवगत करा दिए वहां से आस्वासन भी मिला की रास्ता बनेगा लेकिन अभी तक रास्ता नही बना। किसी की निजी जमीन से बच्चे चलकर आते अगर वह रास्ता जिनका जमीन है बन्द कर देंगे फिर स्कूल भी बन्द हो जाएगी। वही उन्होंने बताया कि रास्ते के लिए वर्तमान प्रधान को भी पत्र लिखा गया है. 

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इस संबंध में वर्तमान प्रधान शैलेन्द्र कुमार यादव ने कहा कि हमारे गांव में नाली निकासी की समस्या है। साथ ही साथ पंचायत भवन नहीं है कुछ विवाद गांव में है। पोखरे की हालत दयनीय है। इस गांव में कुछ लोग विकास होने देना नही चाहते। रास्ते की बहुत बड़ी जटिल समस्या है उन्होंने इस संबंध में वीडियो से लेकर के वर्तमान विधायक तक को अवगत करा दिया है जिससे उनको आस्वासन मिला है।

 ग्रामीणों की माने तो कुछ ग्रामीण वर्षों से इस गांव में विकास ही नही देखें है और वर्तमान प्रधान शैलेन्द्र यादव के बनने से एक बार फिर इनकी उम्मीद बढ़ी है लेकिन अब देखना यह होगा कि वर्तमान प्रधान कितना करिश्मा करते है।यहां मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र भी देखने को मिला मिडिल स्कूल भी देखने को मिला लेकिन उसके हालात भी खस्ताहाल है यहाँ न तो चहारदीवारी थी ना ही बच्चों को खेलने के लिए सही ढंग से खेल मैदान ही था।

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गांव के रहने वाले ग्रामीण हीरालाल राजभर ने बताया कि न तो रास्ता, न ही नाली, न ही आवास और न ही इस गांव में पंचायत भवन है हम लोग किसी तरह रहकर पखडण्डी के सहारे आने जाने को मजबूर है और अब  फिर से उम्मीद के आस्वासन की बाट जोह रहे हैं।

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वहीं ग्रामीण बाल चंद्र यादव जिनकी उम्र 70 वर्ष थी हमारी टीम पर नाराज भी हुए की बहुत लोग आए और गए अब रास्ता और नाली बन जाये तभी उन्हें यकीन होगा क्योंकि उनकी अवस्था जो है उन्होंने कभी भी इस गांव का विकास होते नही देखा है।

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गांव के रहने वाले लालता प्रसाद ने कहा कि यहां पोखरा तक नही जिससे छठ व्रती महिलाओं को दिक्कतें होती है यहां के अब तक बहुत से प्रधान हुए लेकिन इस गांव की तकदीर नही बदली अब आप परफेक्ट मिशन अखबार के लोग आए कुछ उम्मीद जगी है कि शायद तकदीर बदले हमारे गांव की।

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