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Prayagraj News: इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 2011 में चयनित 12,091 शिक्षकों की नियुक्ति के लिए काउंसलिंग की मंजूरी

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Prayagraj News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में वर्ष 2011 में चयनित 12,091 शिक्षकों की नियुक्ति के लिए काउंसलिंग कराने का ऐतिहासिक आदेश जारी किया है। यह फैसला न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी द्वारा किया गया है और इसमें कई याचिकाओं का समावेश है। इस आलेख में हम इस ऐतिहासिक फैसले की अधिकारिक विवरण, याचियों के दावों का परीक्षण, और कोर्ट के द्वारा निर्धारित की गई काउंसलिंग की तिथि पर चर्चा करेंगे।

फैसले का संक्षेप: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2011 में 72,825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती में 12,091 शिक्षकों की चयनित याचिकाओं के लिए नियुक्ति की मांग करते हुए एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया है। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद से मांग की है कि वह 22 से 25 जनवरी के बीच सभी जिलों में विज्ञापन निकाले और पांच फरवरी के आसपास नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करें।

याचिकाओं की दावेदारी: न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने विनय कुमार पांडेय, राम प्रसाद विश्वकर्मा समेत कुल 30 याचिकाओं को एक साथ निस्तारित करते हुए फैसला किया है। याचीगण का दावा है कि उनका चयन 2011 में हो चुका था, लेकिन बेसिक शिक्षा परिषद ने उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं दिया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली और मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया।

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काउंसलिंग की तिथि: हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए बेसिक शिक्षा परिषद से जवाब मांगा था और उसने तय किया कि 22 जनवरी से 25 जनवरी 2024 के बीच विज्ञापन निकालकर पांच फरवरी के आसपास कोई निश्चित तिथि तय कर काउंसलिंग कराने का आदेश जारी किया है।

काउंसलिंग की शर्तें: हाईकोर्ट ने याचियों को इस आशय का हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है कि वे पूर्व की काउंसलिंग में हाजिर नहीं हुए थे। चयनित अभ्यर्थियों को काउंसलिंग फीस के बतौर बेसिक शिक्षा परिषद के समक्ष दो हजार रुपये भी जमा कराने के लिए कहा गया है।

कोर्ट का सामाजिक संदेश: हाईकोर्ट ने फैसले में कबीरदास के दोहे का उल्लेख करते हुए कहा है कि शिक्षक (गुरू) बनने की श्रेणी में होने वाले याचीगण बहुत सम्मानजक पेशे से जुड़े हैं, जो भगवान से ऊपर हैं। कोर्ट ने याचियों के द्वारा दाखिल हलफनामे को गंभीरता से देखा है और इसे आपसी समझदारी की दिशा में निर्णय लिया है। हाईकोर्ट ने इस महत्वपूर्ण फैसले के माध्यम से सामाजिक न्याय की प्रक्रिया को पुनर्स्थापित किया है, और चयनित शिक्षकों को उनकी नियुक्ति के लिए न्याय मिलने का मार्ग प्रदान किया है। यह आदेश एक नई दिशा में शिक्षा क्षेत्र में न्याय की ऊंचाईयों की ओर एक कदम है।

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