महाकुंभ में चमके घाट अब बदहाल, छठ पूजा से पहले व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
प्रयागराज। महाकुंभ के दौरान करोड़ों रुपये की लागत से विकसित किए गए छतनाग समेत झूंसी क्षेत्र के कई पक्के स्नान घाटों की सुंदरता अब बदहाली की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। रखरखाव और नियमित देखरेख के अभाव में घाटों पर लगी सुविधाएं धीरे-धीरे खराब हो रही हैं। स्थिति यह है कि बिजली के खंभे उखड़ चुके हैं, कई जगह रेलिंग टूटकर गायब हो गई हैं और लोहे के दरवाजे तक नहीं बचे हैं। दीवारों पर बनाई गई आकर्षक वॉल पेंटिंग भी टूटकर जमीन पर बिखरी पड़ी हैं।
वार्ड संख्या 45, छतनाग क्षेत्र के इन घाटों पर दीपावली और छठ पूजा जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। इसके बावजूद घाटों पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। नगर निगम की ओर से साफ-सफाई की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं होने की शिकायत है। घाटों पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण रात के समय आम नागरिकों और श्रद्धालुओं को आवागमन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय पार्षद शिवनारायण यादव घुन्नू ने घाटों की बदहाल स्थिति को लेकर कई बार लिखित रूप से संबंधित उच्चाधिकारियों को अवगत कराया है। इसके बावजूद अब तक समस्या के समाधान की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
इधर, छठ पूजा का महापर्व नजदीक है और घाटों पर तैयारियां शुरू होने वाली हैं। ऐसे में गंदगी, अंधेरे और क्षतिग्रस्त व्यवस्थाओं के बीच श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। घाटों तक जाने वाले इंटरलॉकिंग रास्तों पर भी जगह-जगह मिट्टी और सिल्ट जमा है। कई स्थानों पर रास्ते बाधित होने से आवागमन प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की मांग है कि छठ पूजा से पहले छतनाग समेत तीनों स्नान घाटों की विशेष साफ-सफाई कराई जाए। साथ ही टूटे बिजली के खंभों, रेलिंग और दरवाजों की मरम्मत कराकर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। रास्तों से मिट्टी और सिल्ट हटाकर आवागमन सुगम बनाया जाए, ताकि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के अलग-अलग घाटों तक पहुंच सकें और किसी एक घाट पर भीड़ का अतिरिक्त दबाव न पड़े।
