×

प्रयागराज में करोड़ों की लागत से बने छतनाग घाट की बदहाली, शंख बेनी माधव मंदिर की सीढ़ियां खंडहर में तब्दील

प्रयागराज के छतनाग घाट की बदहाली, शंख बेनी माधव मंदिर की सीढ़ियां खंडहर में तब्दील
महाकुंभ के दौरान जिस घाट और मंदिर की सीढ़ियों को नया स्वरूप दिया गया था, अब उन्हीं सीढ़ियों के टूटने से उनकी स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।

प्रयागराज। महाकुंभ के दौरान करोड़ों रुपये की लागत से विकसित किए गए प्रयागराज के छतनाग घाट की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं।

 

झूंसी के वार्ड नंबर 45 स्थित छतनाग क्षेत्र में प्राचीन शंख बेनी माधव मंदिर से लगा घाट अब बदहाली का शिकार बताया जा रहा है। मंदिर की सीढ़ियां और स्टेप टूटने के बाद उनकी हालत खंडहर जैसी दिखाई दे रही है।

 

महाकुंभ के दौरान हुआ था घाट का विकास

छतनाग घाट, सदा फलदेव आश्रम से सटा हुआ है। महाकुंभ के दौरान इस क्षेत्र में पर्यटन और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए घाट और प्राचीन शंख बेनी माधव मंदिर के जीर्णोद्धार से जुड़े कार्य कराए गए थे।

स्थानीय जानकारी के अनुसार, मंदिर के जीर्णोद्धार और सीढ़ियों को नया स्वरूप देने में प्रयागराज के पार्षद शिवनारायण यादव ‘घुन्नू’ और महापौर गणेश केसरवानी के प्रयासों की भी भूमिका रही।

प्रयागराज में करोड़ों की लागत से बने छतनाग घाट की बदहाली, शंख बेनी माधव मंदिर की सीढ़ियां खंडहर में तब्दील

टूट गईं मंदिर की सीढ़ियां, रखरखाव पर सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि शंख बेनी माधव मंदिर की सीढ़ियों के कई हिस्से टूट चुके हैं। सीढ़ियों और स्टेप की मौजूदा स्थिति से साफ तौर पर रखरखाव की कमी नजर आ रही है। ऐसे में यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।

लोगों का सवाल है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च करके घाटों और धार्मिक स्थलों को विकसित किया गया था, तो निर्माण के बाद उनके नियमित रखरखाव की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

छतनाग घाट की मौजूदा स्थिति को लेकर पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि महाकुंभ के दौरान घाटों पर कराए गए कई विकास कार्यों के बाद अब उनकी नियमित देखरेख नहीं हो रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रयागराज में ऐसे कई घाट हैं, जहां महाकुंभ के दौरान करोड़ों रुपये की लागत से पक्के घाट और अन्य सुविधाएं विकसित की गईं, लेकिन समय बीतने के साथ कई स्थानों पर निर्माण कार्यों की स्थिति खराब होती जा रही है।

करोड़ों के विकास कार्यों के संरक्षण की मांग

स्थानीय लोगों की मांग है कि छतनाग घाट और प्राचीन शंख बेनी माधव मंदिर की सीढ़ियों का जल्द निरीक्षण कराया जाए। टूटे हुए हिस्सों की मरम्मत के साथ-साथ घाट पर नियमित साफ-सफाई और रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को परेशानी न हो।

लोगों का कहना है कि महाकुंभ जैसे बड़े आयोजन के लिए तैयार किए गए स्थायी ढांचे को यूं ही बदहाल छोड़ने के बजाय उसका संरक्षण जरूरी है। इससे न केवल सरकारी धन से तैयार संपत्तियों की सुरक्षा होगी, बल्कि प्रयागराज की धार्मिक और पर्यटन विरासत भी सुरक्षित रहेगी।

Share this story