गंगा की धारा में बनी संत की कुटिया ढही, एक शिष्य लापता और दूसरा घायल
प्रयागराज। झूंसी क्षेत्र के बेला सैलाबी कछार में गंगा की गहरी धारा के बीच बनी संत बजरंग दास की कुटिया शुक्रवार शाम अचानक ढह गई। हादसे के समय कुटिया में मौजूद तीन शिष्यों में से एक लापता हो गया, जबकि दूसरा घायल हो गया। तीसरा शिष्य सुरक्षित बच गया। सूचना मिलने पर पुलिस और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और लापता शिष्य की तलाश में राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।
जानकारी के अनुसार, करीब 20 वर्ष पहले बदरा सोनौटी से लगभग दो किलोमीटर दूर बेला सैलाबी कछार में गंगा की धारा के बीच चार खंभों के सहारे कुटिया बनाई गई थी। संत बजरंग दास इसी कुटिया में रहकर तपस्या करते थे। गंगा में बाढ़ आने पर श्रद्धालु उन्हें समया माई मंदिर के पास बनी एक झोपड़ी में ठहराते थे।
बताया जाता है कि बीते अगस्त में आई बाढ़ के दौरान कुटिया में दरारें पड़ गई थीं और उसमें पानी भरने लगा था। इसके बाद बालू की बोरियों आदि की मदद से पानी को रोकने का प्रयास किया गया था। शुक्रवार शाम अचानक कुटिया भरभराकर गंगा में गिर गई। हादसे के समय वहां तीन शिष्य मौजूद थे।
इस दौरान दक्षिणी कोटवा निवासी हरीश सिंह लापता हो गया, जबकि दारागंज निवासी संदीप निषाद मलबे में दब गया। दक्षिणी कोटवा निवासी तीसरे शिष्य भोलू की नजर संदीप पर पड़ी तो उसने किसी तरह उसे बाहर निकाला और गंगा किनारे पहुंचाया। इसके बाद ग्रामीणों की मदद से संदीप को नजदीकी निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
हादसे की जानकारी मिलने पर संत के अनुयायी और श्रद्धालु मौके पर पहुंचने लगे, लेकिन घटनास्थल तक जाने वाले रास्ते में दलदल और गहरा पानी होने के कारण उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सूचना झूंसी पुलिस को दी गई। पुलिसकर्मियों ने घटनास्थल तक पहुंचने का प्रयास किया। बाद में एनडीआरएफ को भी सूचना दी गई। टीम ने मौके पर पहुंचकर लापता शिष्य की तलाश और बचाव कार्य शुरू किया।
