महंगाई की मार से बिगड़ा घर का बजट, दाल-तेल से लेकर चीनी और गुड़ तक के बढ़े दाम
गोरखपुर। रोजमर्रा की जरूरतों में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सब्जियों के दाम पहले से ही घरेलू बजट पर असर डाल रहे थे, अब दाल, सरसों तेल, चना, चीनी और गुड़ जैसे जरूरी सामान महंगे होने से रसोई का खर्च और बढ़ गया है। सीमित आय वाले परिवारों के लिए महीने का राशन जुटाना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
बताया जा रहा है कि बाजार में दाल की कीमत करीब 80 रुपये से बढ़कर 150 रुपये किलो तक पहुंच गई है। इसी तरह सरसों तेल के दाम भी करीब 110 रुपये से बढ़कर 195 रुपये किलो तक बताए जा रहे हैं। चना 40 रुपये से बढ़कर करीब 90 रुपये किलो, चीनी 45 रुपये से बढ़कर करीब 70 रुपये और गुड़ 40 रुपये से बढ़कर लगभग 80 रुपये किलो तक पहुंचने की बात सामने आई है। प्याज के दाम भी करीब 70 रुपये किलो तक बताए जा रहे हैं।
बढ़ते राशन के दाम ने बढ़ाई परेशानी
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ रहा है। जिन परिवारों की आमदनी सीमित है, उनके लिए राशन पर बढ़ता खर्च दूसरी जरूरी जरूरतों को प्रभावित कर रहा है। किराया, बिजली, बच्चों की पढ़ाई, इलाज और आने-जाने के खर्च के बाद बची रकम से महीने भर का राशन चलाना मुश्किल होता जा रहा है।
कई परिवारों को अब रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाली चीजों की मात्रा कम करनी पड़ रही है। कहीं दाल की खपत घटाई जा रही है तो कहीं खाना बनाने में तेल का इस्तेमाल सीमित किया जा रहा है। महंगे राशन का असर बच्चों और बुजुर्गों की जरूरतों पर भी पड़ने की चिंता परिवारों में दिखाई दे रही है।
सब्जियों के बाद राशन की महंगाई की दोहरी मार
पहले सब्जियों के बढ़ते दामों ने लोगों की परेशानी बढ़ाई और अब जरूरी राशन की कीमतों में तेजी ने मुश्किल और बढ़ा दी है। परिवारों का कहना है कि आमदनी में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो रही, लेकिन खाने-पीने से लेकर घरेलू जरूरतों तक हर क्षेत्र में खर्च बढ़ता जा रहा है।
महीने की शुरुआत में तैयार किया गया राशन का बजट कई परिवारों के लिए महीने के बीच में ही बिगड़ने लगा है। ऐसे में लोगों को या तो दूसरी जरूरतों में कटौती करनी पड़ रही है या फिर उधार लेकर घरेलू खर्च पूरा करना पड़ रहा है।
कीमतों की निगरानी पर उठ रहे सवाल
रोजमर्रा की खाद्य वस्तुओं की कीमतों में अचानक होने वाली बढ़ोतरी को लेकर बाजार निगरानी की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि दुकानदार किस कीमत पर सामान खरीद रहे हैं और किस कीमत पर बेच रहे हैं, इसकी नियमित जांच होनी चाहिए।
लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग बाजार में खाद्य वस्तुओं के खरीद मूल्य, बिक्री मूल्य, बिल और स्टॉक की जांच करें। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कीमतों में वृद्धि के पीछे वास्तविक बाजार परिस्थितियां हैं या कहीं उपभोक्ताओं से निर्धारित कीमत से अधिक वसूली तो नहीं की जा रही।
सीमित आय वाले परिवारों के सामने बढ़ा संकट
महंगाई का सबसे अधिक दबाव उन परिवारों पर पड़ रहा है जिनकी मासिक आय पहले से ही सीमित है। ऐसे परिवारों के लिए राशन का खर्च बढ़ने का मतलब है कि बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य, कपड़े और अन्य जरूरी खर्चों के लिए उपलब्ध रकम कम होना।
लोगों का कहना है कि खाद्य पदार्थों की कीमतें सिर्फ बाजार का आंकड़ा नहीं हैं, बल्कि इसका सीधा असर परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। दाल, तेल, चीनी, चना और गुड़ जैसी चीजें हर घर की जरूरत हैं। ऐसे में इनकी कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आम उपभोक्ता के सामने घरेलू बजट को संतुलित करने की चुनौती बढ़ती जा रही है।
अब लोगों की नजर इस बात पर है कि बाजार में खाद्य वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित रखने और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए संबंधित विभाग की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।
