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गौड़, मझवार और गड़रिया समाज के ST दावे पर प्रशासन ने सुनी बात, दस्तावेजों की जांच के बाद होगा फैसला

गौड़, मझवार और गड़रिया समाज के ST दावे पर प्रशासन ने सुनी समस्याएं

गोरखपुर। गौड़, मझवार और गड़रिया समाज को अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी का लाभ दिए जाने से जुड़े दावों और समस्याओं को लेकर बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में अहम बैठक हुई।

बैठक की अध्यक्षता एडीएम सिटी गजेंद्र कुमार ने की। इसमें संबंधित आवेदकों के साथ एसडीएम, तहसीलदार, अधिवक्ता और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में आवेदकों ने ST श्रेणी से जुड़े अपने दावों और लंबे समय से सामने आ रही समस्याओं को प्रशासन के सामने रखा। उन्होंने अपने पक्ष में मौजूद दस्तावेजों, अभिलेखों और अन्य साक्ष्यों की जानकारी अधिकारियों को दी।

दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर होगी जांच

एडीएम सिटी गजेंद्र कुमार ने सभी पक्षों की बात गंभीरता से सुनी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से राजस्व रिकॉर्ड, उपलब्ध दस्तावेजों और शासनादेशों के आधार पर प्रकरणों की स्थिति की जानकारी ली।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जातिगत श्रेणी और आरक्षण से जुड़े मामलों में किसी भी तरह का निर्णय निर्धारित नियमों और शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही लिया जाएगा। इसके लिए संबंधित अभिलेखों और दस्तावेजों की जांच जरूरी है।

एसडीएम और तहसीलदारों से मांगी गई प्रकरणों की जानकारी

बैठक में अलग-अलग क्षेत्रों से आए आवेदनों और लंबित मामलों की भी जानकारी ली गई। एसडीएम और तहसीलदारों ने अब तक की कार्रवाई और प्रकरणों की प्रक्रिया के बारे में एडीएम सिटी को अवगत कराया।

वहीं, बैठक में मौजूद अधिवक्ताओं ने भी मामलों से जुड़े कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर अपना पक्ष रखा।

आवेदकों को बार-बार कार्यालय के चक्कर न लगाने के निर्देश

एडीएम सिटी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जो मामले नियमों के दायरे में समाधान योग्य हैं, उनका गंभीरता से निस्तारण किया जाए।

उन्होंने कहा कि आवेदकों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और प्रत्येक मामले में नियमानुसार स्पष्ट कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

प्रशासन ने आवेदकों को भरोसा दिलाया कि उनके दस्तावेजों और अभिलेखों का नियमानुसार परीक्षण कर आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

बैठक के बाद आवेदकों ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया। उनका कहना था कि सभी संबंधित पक्षों को एक साथ बैठाकर समस्याएं सुने जाने से लंबे समय से चल रहे मामलों को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई है।

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