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गोरखपुर में सपा का बड़ा संगठनात्मक फैसला, जिला-महानगर समेत सभी फ्रंटल संगठनों की कार्यकारिणी भंग

गोरखपुर में सपा का बड़ा संगठनात्मक फैसला, जिला-महानगर समेत सभी फ्रंटल संगठनों की कार्यकारिणी भंग

गोरखपुर। समाजवादी पार्टी ने गोरखपुर में संगठन को लेकर बड़ा बदलाव किया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की अनुमति के बाद पार्टी ने जनपद गोरखपुर की जिला कार्यकारिणी और महानगर कार्यकारिणी समेत सभी फ्रंटल संगठनों की कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। पार्टी के केंद्रीय कार्यालय की ओर से 4 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में कार्यालय ज्ञाप जारी किया गया।

पार्टी के आदेश के अनुसार गोरखपुर के जिलाध्यक्ष और जिला कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों को उनके पदों से मुक्त कर दिया गया है। इसी तरह महानगर अध्यक्ष के साथ महानगर कार्यकारिणी को भी भंग कर दिया गया है। इसके अलावा फ्रंटल संगठनों के सभी जिला और महानगर अध्यक्षों के साथ उनकी कार्यकारिणी के पदाधिकारियों एवं सदस्यों को भी तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया गया है।

प्रदेश स्तर की कार्यकारिणियां भी भंग

सपा के जारी आदेश में गोरखपुर से जुड़ी पार्टी की राज्य कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों को भी तत्काल प्रभाव से पदमुक्त किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके साथ ही सभी फ्रंटल संगठनों की प्रदेश कार्यकारिणी के पदाधिकारियों और सदस्यों की कार्यकारिणी भी भंग कर दी गई है।

पार्टी कार्यालय से जारी कार्यालय ज्ञाप की प्रतिलिपि राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव रामगोपाल यादव, प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व जिलाध्यक्ष बृजेश कुमार गौतम, पूर्व महानगर अध्यक्ष शब्बीर कुरैशी, फ्रंटल संगठनों के सभी प्रदेश अध्यक्षों के अलावा गोरखपुर के पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और प्रमुख नेताओं को भी भेजी गई है।

नई कार्यकारिणी के गठन की तैयारी

समाजवादी पार्टी के इस फैसले के बाद गोरखपुर में संगठन के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। जिला और महानगर स्तर पर नई टीम के गठन को लेकर अब पार्टी नेतृत्व के अगले निर्देश का इंतजार किया जा रहा है।

कार्यकारिणियों के भंग होने के बाद पार्टी के स्थानीय संगठन में नई जिम्मेदारियों को लेकर चर्चाएं तेज होने की संभावना है। हालांकि नई जिला और महानगर कार्यकारिणी में किन नेताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी, इसे लेकर अभी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

पार्टी के इस संगठनात्मक फैसले को आगामी राजनीतिक गतिविधियों से पहले संगठन को नए सिरे से व्यवस्थित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

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