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गोरखपुर में बारिश बनी आफत: जलभराव से थमी शहर की रफ्तार, अंडरपास बंद और बाजारों में घुसा पानी

गोरखपुर में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से शहर के कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। अंडरपास में पानी भरने से यातायात प्रभावित है, जबकि राप्ती कॉम्प्लेक्स की 200 से अधिक दुकानों में पानी घुसने से व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ है।

गोरखपुर। लगातार दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने गोरखपुर शहर की व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। शहर के कई निचले इलाकों में जलभराव की गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। बारिश रुकने के कई घंटे बाद भी सड़कों, गलियों और बाजारों से पानी नहीं निकल सका, जिससे आम लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

सबसे अधिक परेशानी निचले इलाकों के निवासियों को झेलनी पड़ रही है। कई मोहल्लों में घरों के बाहर घुटनों तक पानी जमा है, जबकि कुछ स्थानों पर पानी घरों के अंदर तक पहुंच गया है। इससे स्कूल जाने वाले बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और रोजमर्रा के कामकाज पर निकलने वालों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

अंडरपास जलमग्न, यातायात व्यवस्था चरमराई

भारी जलभराव का सबसे ज्यादा असर शहर की यातायात व्यवस्था पर देखने को मिला। धर्मशाला पुल के नीचे स्थित अंडरपास और चारों फाटक अंडरपास पूरी तरह पानी में डूब गए, जिससे इन मार्गों पर आवागमन रोकना पड़ा। वैकल्पिक मार्गों पर वाहनों का दबाव बढ़ने से कई प्रमुख सड़कों पर लंबा जाम लग गया और लोगों को घंटों फंसे रहना पड़ा।

राप्ती कॉम्प्लेक्स में 200 से अधिक दुकानों में घुसा पानी

बारिश का सबसे बड़ा आर्थिक असर राप्ती कॉम्प्लेक्स में देखने को मिला, जहां चार फीट तक पानी भर जाने से 200 से अधिक दुकानें जलमग्न हो गईं। दुकानों में रखा सामान खराब होने से व्यापारियों को लाखों रुपये के नुकसान की आशंका है। कई व्यापारी मोटर पंप की मदद से पानी निकालने में जुटे रहे, लेकिन लगातार जलभराव के कारण राहत नहीं मिल सकी।

स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने नगर निगम की जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हर वर्ष बारिश के दौरान यही हालात बनते हैं, क्योंकि समय पर नालों की सफाई और ड्रेनेज सिस्टम की मरम्मत नहीं होती। कई बार शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं किए जाने से समस्या लगातार बनी हुई है।

नगर निगम की व्यवस्था पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने नगर निगम की जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हर वर्ष बारिश के दौरान यही हालात बनते हैं, क्योंकि समय पर नालों की सफाई और ड्रेनेज सिस्टम की मरम्मत नहीं होती। कई बार शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं किए जाने से समस्या लगातार बनी हुई है।

बिजली और स्वास्थ्य पर भी बढ़ा खतरा

जलभराव वाले क्षेत्रों में बिजली के खंभों और तारों के आसपास पानी भरने से शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ गया है। वहीं गंदे पानी के लंबे समय तक जमा रहने से डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों की आशंका भी बढ़ गई है। कई इलाकों में पेयजल व्यवस्था प्रभावित होने की भी सूचना है।

राहत कार्य तेज करने की मांग

शहरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि जलभराव वाले क्षेत्रों में तत्काल पंपिंग सेट लगाकर पानी निकाला जाए, नालों की सफाई कराई जाए और प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेज किए जाएं। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया जा रहा है।

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