सैंथवार-मल्ल को अलग जाति दर्ज करने की मांग पर उठे सवाल, प्रेस क्लब में पवन सिंह ने उठाए कई अहम प्रश्न
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में सैंथवार और मल्ल समुदाय को पिछड़ा वर्ग सूची में स्वतंत्र जाति के रूप में दर्ज करने तथा जाति प्रमाण-पत्र से "कुर्मी" शब्द हटाने की मांग के बाद यह मुद्दा अब सामाजिक और राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
इसी क्रम में गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में सैंथवार मल्ल महासभा के सदस्य पवन सिंह ने इस मांग पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे समाज के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया।
उन्होंने कहा कि जब समाज के युवा बेरोजगारी, शिक्षा और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं, तब केवल जातिगत पहचान को लेकर बहस खड़ी करना समाज के हित में नहीं है।
उनका सवाल था कि यदि जाति प्रमाण-पत्र से "कुर्मी" शब्द हट भी जाए, तो इससे युवाओं को रोजगार, छात्रों को शिक्षा या किसानों की आय में आखिर कितना बदलाव आएगा।
समाज की पहचान शिक्षा और विकास से बनती है
पवन सिंह ने कहा कि किसी भी समाज की असली पहचान उसके परिश्रम, शिक्षा, सामाजिक योगदान और विकास से होती है, न कि केवल जातिगत वर्गीकरण से।
उन्होंने कहा कि सैंथवार-मल्ल समाज ने हमेशा मेहनत, स्वाभिमान और सामाजिक एकता के साथ अपनी पहचान बनाई है और आज आवश्यकता शिक्षा, रोजगार तथा राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करने की है।
चुनाव के समय उठता है जातीय विवाद
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग हर चुनाव के समय "क्षत्रिय सैंथवार" और "कुर्मी सैंथवार" जैसे विवाद खड़े किए जाते हैं, जिससे समाज में भ्रम और विभाजन की स्थिति उत्पन्न होती है। उन्होंने इसे राजनीतिक लाभ के लिए समाज को वास्तविक मुद्दों से भटकाने का प्रयास बताया।
मामला न्यायालय में विचाराधीन
पवन सिंह ने स्पष्ट किया कि यह पूरा मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। इसलिए अंतिम निर्णय राजनीतिक बयानबाजी से नहीं बल्कि ऐतिहासिक दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर न्यायालय द्वारा ही लिया जाएगा। उन्होंने सभी पक्षों से न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करने की अपील की।
महासभा के नाम के इस्तेमाल पर भी उठाए सवाल
संगठनात्मक स्थिति स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि सैंथवार मल्ल महासभा एक पंजीकृत संस्था है, जिसका संचालन उसके संविधान के अनुसार होता है। वर्तमान में संस्था के अध्यक्ष अंशुमान सिंह हैं।
उन्होंने कहा कि संस्था की किसी भी अधिकृत बैठक में सैंथवार और मल्ल को अलग क्रमांक से दर्ज कराने संबंधी कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि महासभा के लेटरहेड का उपयोग कर इस प्रकार की मांग भेजी गई है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि वह किस अधिकार और किस प्रस्ताव के आधार पर किया गया। इस विषय पर संस्था की विधिवत बैठक बुलाकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग भी की गई।
सोशल मीडिया पर भ्रामक संदेशों को लेकर चेतावनी
प्रेस वार्ता में पवन सिंह ने सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक और भड़काऊ संदेशों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जातीय वैमनस्य फैलाने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायत दर्ज कराई जाएगी।
युवाओं से की यह अपील
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने समाज के युवाओं से अफवाहों और राजनीतिक बहकावे से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि समाज को शिक्षा, रोजगार, आर्थिक सशक्तिकरण और संवैधानिक अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भविष्य का निर्णय भावनाओं के आधार पर नहीं बल्कि तथ्यों, कानून और सामाजिक हितों को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए।
