गला काटने की कथित धमकी पर गरमाया निषाद समाज, डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन
गोरखपुर। गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में हुए थप्पड़ कांड को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कथित धमकी और राजनीतिक बयानबाजी तक पहुंच गया है। बांसगांव के दुर्गा मंदिर में एक बैठक के दौरान गला काटने की कथित धमकी दिए जाने के आरोप को लेकर निषाद समाज में नाराजगी जताई गई। इसी के विरोध में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद के पुत्र और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष अमित निषाद गुरुवार को समर्थकों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने धरना-प्रदर्शन कर प्रशासन से मामले में कार्रवाई की मांग की।
अमित निषाद ने कहा कि किसी भी समाज के खिलाफ हिंसक भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि बांसगांव दुर्गा मंदिर में बैठक के दौरान गला काटने जैसी बात कही गई। उन्होंने संबंधित लोगों से अपनी बात वापस लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। साथ ही प्रशासन से कथित बयान की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि किसी बयान पर आपत्ति होने पर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जा सकता है, लेकिन किसी व्यक्ति या समाज के खिलाफ हिंसा की धमकी देना गंभीर मामला है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि माफी नहीं मांगी गई तो निषाद पार्टी आंदोलन को आगे बढ़ाएगी।
दरअसल, विवाद की शुरुआत गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में हुई घटना से हुई थी। सपा के जिला अध्यक्ष की प्रेस वार्ता के दौरान नगीना सहानी के साथ कथित तौर पर मारपीट और थप्पड़ मारने की घटना सामने आई थी। मामले में नगीना सहानी की ओर से कैंट थाने में तहरीर दी गई थी। पुलिस ने अंशुमान सिंह, कमलेश सिंह और विमलेश सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
घटना के बाद कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने एक जनसभा में थप्पड़ मारने वाले का हाथ काटने संबंधी बयान दिया था। इसके बाद बांसगांव के दुर्गा मंदिर में ठाकुर समुदाय के एक समूह की बैठक को लेकर कथित रूप से गला काटने की धमकी दिए जाने का आरोप सामने आया। निषाद पार्टी ने इसी कथित बयान को लेकर आपत्ति जताई है।
अब मामला सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी तूल पकड़ता नजर आ रहा है। जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन के दौरान अमित निषाद ने प्रशासन से दोनों पक्षों के बयानों की जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि समाज में तनाव बढ़ाने वाले बयानों पर प्रभावी कार्रवाई जरूरी है, ताकि स्थिति बिगड़ने से रोकी जा सके।
