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गोरखपुर: पीडब्ल्यूडी में भ्रष्टाचार के आरोप, जन कल्याण समिति ने उच्चस्तरीय जांच की उठाई मांग

गोरखपुर में पूर्वांचल ठेकेदार जन कल्याण समिति ने पीडब्ल्यूडी के एक अधिकारी पर भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर सरकारी धन के दुरुपयोग और निर्माण कार्यों में अनियमितताओं का लगाया आरोप, दोषियों पर कार्रवाई की मांग

गोरखपुर।गोरखपुर में पूर्वांचल ठेकेदार जन कल्याण समिति ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर बड़ा आरोप लगाया है।

गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में समिति के पदाधिकारियों ने विभाग के एक अधिशासी अभियंता स्तर के अधिकारी पर सरकारी धन के दुरुपयोग और ठेकेदारी कार्यों में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप

समिति के अध्यक्ष सभापति पाठक ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि संबंधित अधिकारी लंबे समय तक गोरखपुर के विभिन्न निर्माण खंडों में तैनात रहे। इस दौरान बजट में हेरफेर, अतिरिक्त मद (Extra Items) जोड़कर भुगतान कराने और कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने जैसी गंभीर अनियमितताएं की गईं।

उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय नियमों की अनदेखी कर करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों में वित्तीय गड़बड़ियां की गईं, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

उच्चस्तरीय जांच की मांग

समिति ने दावा किया कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। प्रेस वार्ता में एक कथित आलीशान होटल के निर्माण का भी जिक्र करते हुए उसकी आय के स्रोत की जांच कराने की मांग की गई।

समिति ने बताया कि इस संबंध में प्रमुख अभियंता (विकास एवं विभागाध्यक्ष), लोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश, लखनऊ को लिखित शिकायत भेजी जा चुकी है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

आंदोलन की चेतावनी

समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन आंदोलन करने को बाध्य होगा। उनका कहना था कि यह मामला केवल एक अधिकारी या विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा हुआ है।

प्रेस वार्ता में समिति के अन्य सदस्यों ने भी भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई। फिलहाल इन आरोपों पर संबंधित अधिकारी या विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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