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Gorakhpur News: गरीबी में भी सुदामा अपने सत्य और धर्म को नहीं छोड़ा- उमा शंकर शास्त्री

Gorakhpur News: गरीबी में भी सुदामा अपने सत्य और धर्म को नहीं छोड़ा- उमा शंकर शास्त्री

Gorakhpur News: गरीबी में भी सुदामा अपने सत्य और धर्म को नहीं छोड़ा- उमा शंकर शास्त्री

सहजनवा गोरखपुर:- थोड़ा ही प्रलोभन मिलने पर मनुष्य अपने नैतिक धर्म को छोड़ देता है। भक्त सुदामा धन्य थे,जिन्होंने अत्यंत गरीबी झेलने के बाद भी अपने धर्म का त्याग नहीं किया। झूठ और असत्य सहारा नहीं लिया। 

उक्त बातें पंडित उमाशंकर शास्त्री ने कही। वह नगर पंचायत घघसरा के वार्ड संख्या 11 परशुराम नगर के इटार चल रहे श्रीमद् भागवत् कथा व्यास पीठ के अखिरी दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं को कथा रसपान करा रहे थे।

उनहोंने कहा कि अधर्म के रास्ते प्राप्त होने वाला धन थोडे़ देर के लिए भले ही अच्छा लगता है, परंतु अततः दुखदायी होता है।  द्वारिका पहुचे पर भगवान् मधु सूदन ने उनका बहुत सतकार किया ।

वह चाहते थे कि सुदामा खुल कर कुछ हमसे कुछ मांग ले। परंतु सुदामा जी अपने मुख से अपने दुखों को नहीं कहा। इसके बावजूद भगवान् ने उन्हें सबकुछ दे दिया। सच्ची मित्रता इसी को कहते हैं कि मित्र यदि संकट में हो तो अपने क्षमता के अनुसार उसकी मदद कर देनी चाहिए। यही मित्र धर्म है। 

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कथा व्यास ने कहा कि-0 शास्त्रों में अनेकों प्रकार के दुखों का वर्णन किया गया है, परंतु दरिद्रता के समान मनुष्य के जीवन में दूसरा कोई दुख नहीं है। किसी मनुष्य की परीक्षा उसके इसी कठिन समय में होती है।

महापुरुष भीषण कठिनाई में अपने धर्म का त्याग नहीं करते हैं।  उक्त- अवसर पर मुख्य यजमान राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय, शेष मणि पाण्डेय समेत प्रधान रंगनाथन पाण्डेय रामदेव महगी प्रसाद वीरेंद्र भारतीय शशि मौल पाण्डेय अभिनव पाण्डेय बटाका बड़कनू, हरिराम पाण्डेय गोलू पान्डेय रंगनाथ पान्डेय जयराम शर्मा सर्वेश पान्डेय शत्रुघ्न पान्डेय समेत कई लोग मौजूद थे।

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