गोरखपुर घाट हादसा: दो अधिवक्ताओं की मौत पर उठे भ्रष्टाचार के सवाल, पूर्व बार काउंसिल चेयरमैन ने लगाए गंभीर आरोप
गोरखपुर। राजघाट स्थित गुरु गोरक्षनाथ घाट पर गुंबद गिरने से दो अधिवक्ताओं की मौत के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। हादसे को लेकर अधिवक्ताओं में आक्रोश है और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
हादसे में अधिवक्ता आलोक अस्थाना निवासी राप्तीनगर और संजय सिंह निवासी शक्तिनगर की मौत हुई। दोनों अधिवक्ता अपने साथी अधिवक्ता विनोद तिवारी की मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए गुरु गोरक्षनाथ घाट पहुंचे थे। इसी दौरान बारिश के बीच आकाशीय बिजली गिरने के बाद गुंबद भरभराकर गिर गया, जिसके नीचे दबने से दोनों की जान चली गई।
न्यायिक कार्य से विरत रहे अधिवक्ता
घटना के बाद जिला बार एसोसिएशन के सभागार में अधिवक्ताओं की बैठक हुई। अधिवक्ताओं ने घटना पर नाराजगी जताते हुए न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया। इसके बाद मौके पर पहुंचे एसडीएम सदर को पांच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।
पूर्व चेयरमैन ने निर्माण में भ्रष्टाचार का लगाया आरोप
उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के पूर्व चेयरमैन मधुसूदन त्रिपाठी ने हादसे को लेकर निर्माण कार्य पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह महज हादसा नहीं बल्कि भ्रष्टाचार का परिणाम है। त्रिपाठी ने दावा किया कि घाट निर्माण में करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार की बात सामने आ रही है और प्रशासन पूरे मामले में लीपापोती कर रहा है।
उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि करीब 27.85 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए घाट में सरिया तक नहीं लगाए जाने का आरोप सामने आ रहा है। उन्होंने दूसरे शहरों में हुए निर्माण का उदाहरण देते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
पांच सूत्रीय मांगों को लेकर अधिवक्ताओं का प्रदर्शन
अधिवक्ताओं ने प्रशासन के सामने पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें ठेकेदार और कार्यदायी संस्था के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज करने, दोनों मृतकों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने और आश्रितों को सरकारी नौकरी देने की मांग शामिल है।
इसके अलावा घटना के बाद एंबुलेंस पहुंचने में हुई देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों पर कार्रवाई तथा घाट के सभी निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय जांच की मांग भी की गई।
प्रशासन ने गठित की जांच कमेटी
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी दीपक मीणा ने जांच कमेटी गठित कर दी है। वहीं नगर निगम ने घाट पर बने सभी गुंबदों पर चेतावनी बोर्ड लगाकर लोगों के बैठने पर रोक लगा दी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे में जान गंवाने वाले दोनों अधिवक्ताओं के परिवारों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं मृतक अधिवक्ता की पत्नी की तहरीर के आधार पर सीएमओ और ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अब जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि गुंबद गिरने के पीछे निर्माण की गुणवत्ता में लापरवाही थी या कोई अन्य तकनीकी कारण। हादसे के बाद घाट के निर्माण से जुड़े जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग लगातार तेज हो रही है।
