डीएम दीपक मीणा ने महिला शिक्षिकाओं से किया आह्वान, बच्चों के भविष्य निर्माण में निभाएं अहम भूमिका
गोरखपुर। विकास भवन सभागार में जिलाधिकारी दीपक मीणा ने महिला शिक्षिकाओं को सम्मानित करते हुए उनके शैक्षणिक दायित्वों की सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं होते, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण, चरित्र विकास और उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। महिला शिक्षिकाएं अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ निर्वहन करते हुए छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करें, ताकि वे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकें।
जिलाधिकारी ने कहा कि किसी भी समाज और राष्ट्र की प्रगति उसकी शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे देश का भविष्य हैं। उन्हें किस प्रकार की शिक्षा, संस्कार और मार्गदर्शन मिलता है, उसी से उनके व्यक्तित्व और सोच का विकास होता है। ऐसे में शिक्षकों की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने महिला शिक्षिकाओं से आह्वान किया कि वे बच्चों को केवल किताबी ज्ञान देने के बजाय उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन, मेहनत, ईमानदारी और दूसरों के प्रति सम्मान की भावना भी विकसित करें।
उन्होंने कहा कि एक अच्छा शिक्षक वही है, जो प्रत्येक बच्चे की क्षमता को पहचानकर उसे आगे बढ़ने का अवसर देता है। कक्षा में सभी बच्चों की सीखने की क्षमता एक जैसी नहीं होती। कुछ बच्चे पढ़ाई में जल्दी आगे बढ़ जाते हैं, जबकि कुछ को अतिरिक्त समय और मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। शिक्षकों को ऐसे बच्चों पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि कोई भी विद्यार्थी स्वयं को कमजोर या उपेक्षित महसूस न करे। बच्चों को प्रोत्साहित करने और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करने से उनमें सीखने की रुचि बढ़ती है।
डीएम ने कहा कि महिला शिक्षिकाएं शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वे अपने अनुभव, व्यवहार और कार्यशैली से बच्चों को सकारात्मक दिशा दे सकती हैं। विद्यालय का वातावरण ऐसा होना चाहिए, जहां बच्चे बिना किसी संकोच के सवाल पूछ सकें, अपनी समस्याएं साझा कर सकें और नई चीजें सीखने के लिए प्रेरित हों। शिक्षकों का स्नेहपूर्ण व्यवहार बच्चों के मन में विद्यालय के प्रति लगाव पैदा करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षण कार्य को केवल नौकरी न समझकर समाज और राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण दायित्व के रूप में देखना चाहिए।

जिलाधिकारी ने इस बात पर भी जोर दिया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए नियमित शिक्षण, समय का सदुपयोग और बच्चों की पढ़ाई की निरंतर समीक्षा आवश्यक है। शिक्षक यह सुनिश्चित करें कि विद्यालय में आने वाला प्रत्येक बच्चा अपनी कक्षा के अनुरूप शैक्षिक दक्षताएं हासिल करे। बच्चों की पढ़ाई में आने वाली कठिनाइयों को समय रहते समझकर उनका समाधान किया जाए। इसके साथ ही अभिभावकों से संवाद बनाए रखना भी जरूरी है, जिससे घर और विद्यालय के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सके।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं है, बल्कि बच्चों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने योग्य बनाना भी है। उनमें तर्क करने, सही निर्णय लेने, समस्याओं का समाधान खोजने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने की क्षमता विकसित की जानी चाहिए। शिक्षक बच्चों को इस तरह तैयार करें कि वे आगे चलकर आत्मनिर्भर नागरिक बनें और देश के विकास में अपना योगदान दे सकें।
डीएम ने सम्मानित महिला शिक्षिकाओं को उनके योगदान के लिए बधाई देते हुए कहा कि सम्मान अपने आप में एक उपलब्धि होने के साथ ही भविष्य में और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा भी है। यह सम्मान शिक्षकों के समर्पण, मेहनत और जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने अपेक्षा की कि सभी शिक्षिकाएं इस प्रेरणा को अपने कार्यों में उतारेंगी और शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास करती रहेंगी।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे में कुछ विशेष प्रतिभा होती है। जरूरत केवल उसे पहचानने और सही दिशा देने की है। यदि शिक्षक धैर्य, लगन और सकारात्मक सोच के साथ बच्चों का मार्गदर्शन करें, तो सामान्य परिस्थितियों में पढ़ने वाले बच्चे भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। बच्चों के सपनों को आकार देने में शिक्षकों की भूमिका निर्णायक होती है। इसलिए शिक्षकों को अपने ज्ञान और कौशल को समय के साथ विकसित करते रहना चाहिए, ताकि बदलती शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके।
कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी धीरेंद्र त्रिपाठी मौजूद रहे।
