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मनरेगा में ‘पोखरा खेल’ का बड़ा आरोप! तीन साल में फिर वही तालाब, बढ़ा बजट तो उठे भ्रष्टाचार के सवाल

गोरखपुर के नरौली गांव में मनरेगा के तहत बंजरहा पोखरे पर दोबारा लाखों रुपये खर्च किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने वित्तीय अनियमितता, फर्जी मस्टर रोल और ऑनलाइन हाजिरी में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है।

गोरखपुर। विकासखंड पाली की ग्राम पंचायत नरौली में मनरेगा के तहत कराए जा रहे कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जिस बंजरहा पोखरे की खुदाई और सौंदर्यीकरण पर वर्ष 2022-23 में लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, उसी पोखरे को महज तीन वर्ष बाद फिर से योजना में शामिल कर अधिक बजट स्वीकृत कराया गया है। मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिला पंचायत राज अधिकारी को शिकायत पत्र सौंपते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2022-23 में बंजरहा पोखरे के विकास कार्य पर लगभग 3.91 लाख रुपये खर्च किए गए थे। अब उसी पोखरे के लिए करीब 6.74 लाख रुपये का नया बजट स्वीकृत होने से सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई जा रही है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी सार्वजनिक संपत्ति के मरम्मत, पुनर्वास या सौंदर्यीकरण कार्य के लिए सामान्य परिस्थितियों में 5 से 10 वर्ष का अंतराल होना चाहिए। केवल प्राकृतिक आपदा या आकस्मिक क्षति की स्थिति में ही इससे पहले पुनः कार्य कराया जा सकता है। ऐसे में ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि आखिर तीन वर्ष के भीतर दोबारा खुदाई और सौंदर्यीकरण की आवश्यकता क्यों पड़ी।

ग्रामीणों ने यह भी पूछा है कि यदि पोखरे में जलकुंभी या गाद जमा होने को आधार बनाकर पुनः कार्य कराया जा रहा है, तो क्या इसे प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में माना गया है? यदि ऐसा है तो संबंधित अभिलेख और प्रमाण सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

मामले में मनरेगा की ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कई मस्टर रोल में एक ही व्यक्तियों की तस्वीरें अलग-अलग कार्यों में अपलोड की गई हैं। उनका दावा है कि ऑनलाइन हाजिरी में जिन लोगों की तस्वीरें दिखाई गई हैं, वे वास्तविक श्रमिक नहीं हैं, बल्कि केवल फोटो खिंचवाने के लिए मौके पर लाए गए थे।

ग्रामीणों ने मांग की है कि ग्राम पंचायत नरौली में पिछले पांच वर्षों के दौरान पोखरों पर हुए सभी कार्यों का विवरण सार्वजनिक किया जाए। इसमें कार्य की तिथि, स्वीकृत बजट, कार्य का उद्देश्य और दो कार्यों के बीच का समय अंतराल स्पष्ट रूप से बताया जाए।

शिकायतकर्ता रिपुसूदन गुप्ता और काशी यादव ने प्रशासन से मांग की है कि जांच पूरी होने तक बंजरहा पोखरे पर चल रहे कार्य को तत्काल रोका जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका और गहरा सकती है।

वहीं मामले में प्रशासनिक पक्ष जानने के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। अधिकारियों का बयान मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।

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