बड़हलगंज में बदलेगा रेल पुल का एलाइमेंट, सहजनवा-दोहरीघाट रेल परियोजना को मिली रफ्तार
गोरखपुर। सहजनवा-दोहरीघाट नई रेल लाइन परियोजना के तहत बड़हलगंज क्षेत्र में बनने वाले रेलवे पुल के एलाइमेंट में बदलाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी क्रम में जिलाधिकारी दीपक मीणा ने कलेक्ट्रेट सभागार में रेलवे अधिकारियों एवं इंजीनियरों के साथ समीक्षा बैठक कर परियोजना की प्रगति और एलाइमेंट परिवर्तन से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक में मुख्य राजस्व अधिकारी हिमांशु वर्मा, डिप्टी चीफ इंजीनियर अतुल त्रिपाठी समेत रेलवे विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और इंजीनियर उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि पुल के एलाइमेंट में प्रस्तावित बदलाव से जुड़े सभी तकनीकी एवं प्रशासनिक पहलुओं का गहन परीक्षण कर शीघ्र अंतिम प्रस्ताव तैयार किया जाए, ताकि निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा हो सके।
करीब 81 किलोमीटर लंबी सहजनवा-दोहरीघाट नई रेल लाइन परियोजना पूर्वांचल की महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना के तहत 11 से 12 नए रेलवे स्टेशन विकसित किए जाने प्रस्तावित हैं, जिनमें सहजनवा, मगहर, बांसगांव, पिपरौली, खजनी और उनवल प्रमुख हैं। परियोजना को तीन चरणों में पूरा किया जाना है।

पहले चरण में सहजनवा से बांसगांव तक लगभग 33 किलोमीटर रेल लाइन का निर्माण किया जा रहा है। इस खंड में मिट्टी भराई, पिलर निर्माण और अन्य आधारभूत कार्य तेजी से चल रहे हैं। रेलवे ने इस चरण को वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
परियोजना के तहत बड़हलगंज के निकट घाघरा (सरयू) नदी पर एक विशाल रेलवे पुल का निर्माण भी प्रस्तावित है, जो इस रेल मार्ग की सबसे महत्वपूर्ण संरचनाओं में से एक होगा। इसके अलावा गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण भी किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में यातायात व्यवस्था और अधिक सुगम होगी।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। अधिकांश प्रभावित किसानों को मुआवजा वितरित किया जा चुका है, जिससे निर्माण कार्य में अपेक्षित तेजी आई है। अधिकारियों ने बैठक के दौरान निर्माण स्थल पर चल रहे कार्यों की प्रगति से जिलाधिकारी को अवगत कराया और तय समयसीमा के भीतर परियोजना को पूरा करने का भरोसा दिलाया।
परियोजना के पूर्ण होने के बाद गोरखपुर, बड़हलगंज, दोहरीघाट तथा आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा। साथ ही गोरखपुर से वाराणसी और लखनऊ की ओर जाने वाली ट्रेनों के लिए एक वैकल्पिक रेल मार्ग उपलब्ध होगा, जिससे यात्रा अधिक सुगम होने के साथ क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
