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सड़क-नाली की बदहाली से नाराज ग्रामीण बोले- समस्या दूर नहीं हुई तो वोट नहीं, गांव में नेताओं की एंट्री भी बंद

सड़क बनी तालाब, गड्ढों में दफन विकास; बरईपार में ग्रामीणों का प्रदर्शन सड़क-नाली की बदहाली से नाराज ग्रामीण बोले- समस्या दूर नहीं हुई तो वोट नहीं, गांव में नेताओं की एंट्री भी बंद  गोरखपुर/सहजनवां। पाली ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत बरईपार में बदहाल सड़क और जलभराव की समस्या को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सड़क पर उतर आया। बखिरा-सहजनवां मुख्य मार्ग से पाली ब्लॉक स्थित बीआरसी तक जाने वाली सर्विस रोड की हालत बारिश के बाद बेहद खराब हो गई है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से राहगीरों और वाहन चालकों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।  ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की हालत इतनी खराब है कि बरसात के दिनों में सड़क और तालाब में अंतर करना मुश्किल हो जाता है। कई स्थानों पर गड्ढे चार से पांच फीट तक गहरे होने का दावा किया जा रहा है। पानी भरने के कारण गड्ढों की गहराई दिखाई नहीं देती, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है।  ग्रामीणों के मुताबिक सड़क पर जलभराव और गड्ढों के कारण आए दिन राहगीर और दोपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। पानी से भरे गड्ढों के कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।  ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क को कुछ वर्ष पहले दोबारा बनवाया गया था, लेकिन निर्माण के बाद गुणवत्ता और रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। कुछ ही समय में सड़क दोबारा टूटने लगी और अब कई जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं।  ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और नाली की समस्या को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित लोगों से शिकायत की गई, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन मिला। समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती गई।  इसी नाराजगी के चलते ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया और क्षेत्रीय नेताओं के खिलाफ नारेबाजी की।  प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि यदि गांव की सड़क और नाली की समस्या जल्द दूर नहीं की गई तो वे आगामी चुनाव में वोट नहीं देंगे। ग्रामीणों ने यह भी चेतावनी दी कि समस्या का समाधान नहीं होने पर गांव में चुनाव प्रचार के लिए आने वाले नेताओं का विरोध किया जाएगा।  ग्रामीणों ने कहा कि विकास योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन बरईपार में जमीनी स्थिति अलग तस्वीर दिखा रही है। सड़क के बार-बार खराब होने को लेकर उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सरकारी धन के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए।  ग्रामीणों ने सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सड़क का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ होता और समय-समय पर उसका रखरखाव किया जाता तो इतनी जल्दी सड़क की हालत खराब नहीं होती।  ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क की तत्काल मरम्मत कराने, जलनिकासी के लिए नाली का निर्माण कराने और सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। जब तक सड़क की स्थिति धरातल पर नहीं सुधरती, उनका विरोध जारी रहेगा।  प्रदर्शन के दौरान कृष्ण मोहन अग्रहरि, अयोध्या प्रसाद गुप्ता, सतीश गुप्ता, संदीप अग्रहरि, आकाश अग्रहरि, शिवम अग्रहरि, अभिषेक अग्रहरि, धीरज अग्रहरि, झुल्ली चौरसिया, नगीना, इंद्रेश, राम अवतार, नींबू लाल, दुर्गेश, विपिन, गणेश गौतम, हरिश्चंद्र, राजेश, अर्जुन, शिवम, संतोष, राजेंद्र, कपिल, अंगद, विनोद समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

गोरखपुर/सहजनवां। पाली ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत बरईपार में बदहाल सड़क और जलभराव की समस्या को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सड़क पर उतर आया। बखिरा-सहजनवां मुख्य मार्ग से पाली ब्लॉक स्थित बीआरसी तक जाने वाली सर्विस रोड की हालत बारिश के बाद बेहद खराब हो गई है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से राहगीरों और वाहन चालकों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की हालत इतनी खराब है कि बरसात के दिनों में सड़क और तालाब में अंतर करना मुश्किल हो जाता है। कई स्थानों पर गड्ढे चार से पांच फीट तक गहरे होने का दावा किया जा रहा है। पानी भरने के कारण गड्ढों की गहराई दिखाई नहीं देती, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है।

आए दिन गिर रहे राहगीर, स्कूली बच्चों की बढ़ी परेशानी

ग्रामीणों के मुताबिक सड़क पर जलभराव और गड्ढों के कारण आए दिन राहगीर और दोपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। पानी से भरे गड्ढों के कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क को कुछ वर्ष पहले दोबारा बनवाया गया था, लेकिन निर्माण के बाद गुणवत्ता और रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। कुछ ही समय में सड़क दोबारा टूटने लगी और अब कई जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं।

शिकायतों के बाद भी नहीं सुधरी स्थिति

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और नाली की समस्या को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित लोगों से शिकायत की गई, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन मिला। समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती गई।

इसी नाराजगी के चलते ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया और क्षेत्रीय नेताओं के खिलाफ नारेबाजी की।

‘सड़क नहीं तो वोट नहीं’

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि यदि गांव की सड़क और नाली की समस्या जल्द दूर नहीं की गई तो वे आगामी चुनाव में वोट नहीं देंगे। ग्रामीणों ने यह भी चेतावनी दी कि समस्या का समाधान नहीं होने पर गांव में चुनाव प्रचार के लिए आने वाले नेताओं का विरोध किया जाएगा।

ग्रामीणों ने कहा कि विकास योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन बरईपार में जमीनी स्थिति अलग तस्वीर दिखा रही है। सड़क के बार-बार खराब होने को लेकर उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सरकारी धन के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए।

सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच की मांग

ग्रामीणों ने सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सड़क का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ होता और समय-समय पर उसका रखरखाव किया जाता तो इतनी जल्दी सड़क की हालत खराब नहीं होती।

ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क की तत्काल मरम्मत कराने, जलनिकासी के लिए नाली का निर्माण कराने और सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। जब तक सड़क की स्थिति धरातल पर नहीं सुधरती, उनका विरोध जारी रहेगा।

प्रदर्शन के दौरान कृष्ण मोहन अग्रहरि, अयोध्या प्रसाद गुप्ता, सतीश गुप्ता, संदीप अग्रहरि, आकाश अग्रहरि, शिवम अग्रहरि, अभिषेक अग्रहरि, धीरज अग्रहरि, झुल्ली चौरसिया, नगीना, इंद्रेश, राम अवतार, नींबू लाल, दुर्गेश, विपिन, गणेश गौतम, हरिश्चंद्र, राजेश, अर्जुन, शिवम, संतोष, राजेंद्र, कपिल, अंगद, विनोद समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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