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Sawan 2026: सावन में शिवमय होगी काशी, बाबा विश्वनाथ के दरबार में उमड़ेगा आस्था का सैलाब

Sawan 2026: सावन में शिवमय होगी काशी, बाबा विश्वनाथ के दरबार में उमड़ेगा आस्था का सैलाब
29 जुलाई से शुरू होगा सावन, कांवड़ियों के स्वागत को तैयार काशी
 

वाराणसी। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी एक बार फिर शिवमय होने जा रही है। गुरु पूर्णिमा के उपरांत 29 जुलाई से सावन मास का शुभारंभ होगा और पूरे एक माह तक बाबा श्री काशी विश्वनाथ की नगरी ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से गुंजायमान रहेगी। सावन के आगमन को लेकर श्रद्धालुओं में अभी से उत्साह दिखाई देने लगा है, वहीं पर्यटन और होटल व्यवसाय से जुड़े लोग भी तैयारियों में जुट गए हैं।

सावन मास को भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र काल माना जाता है। इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु काशी पहुंचकर बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करते हैं। गंगा तटों पर आस्था का अनूठा संगम देखने को मिलता है और पूरा शहर धार्मिक रंग में रंग जाता है।

इस वर्ष सावन मास 29 जुलाई से प्रारंभ होकर 28 अगस्त को रक्षाबंधन के साथ संपन्न होगा। सावन के चार प्रमुख सोमवार 3, 10, 17 और 24 अगस्त को पड़ेंगे। इनमें विशेष रूप से 10 अगस्त का दिन प्रदोष व्रत के संयोग के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे उस दिन श्रद्धालुओं की संख्या रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने की संभावना है।

सावन के दौरान प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं और कांवड़ियों के आगमन को देखते हुए प्रशासन व्यापक व्यवस्थाओं की तैयारी में जुट गया है। भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष रूट डायवर्जन योजना लागू की जाएगी, जबकि मंदिर परिसर और प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए जाएंगे। पुलिस, प्रशासन, जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें भी पूरी तरह सक्रिय रहेंगी।

गंगा के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति को ध्यान में रखते हुए घाट क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जाएगी। वहीं श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, विश्राम स्थल और यातायात प्रबंधन की व्यापक व्यवस्था की जाएगी।

सावन केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि काशी की सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक है। इस दौरान शहर में भजन-संध्या, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, शिव महिमा से जुड़े आयोजन और धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला आयोजित की जाती है। मंदिरों, घाटों और गलियों में सजावट के साथ आध्यात्मिक वातावरण अपने चरम पर पहुंच जाता है।

सावन के आगमन के साथ ही काशी एक बार फिर शिवभक्ति के महासागर में डूबने को तैयार है, जहां श्रद्धा, संस्कृति और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

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