इस बार झूले पर आयी है माँ, हाथी पर बैठ करेंगी प्रस्थान
झूले पर आएंगी मां, हाथी पर प्रस्थान
महाअष्टमी व्रत 13 को, 14 को महानवमी और 15 को दशमी

वाराणसी | शक्ति की अधिष्ठात्री देवी दुर्गा की पूजा आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्र आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है। इस बार इसका आरंभ सात अक्टूबर से हो शुरू हो गया है अबकी षष्ठी तिथि का लोप होने से नवरात्र आठ ही दिनों का होगा।

पंचमी और षष्टि विहित दर्शन-पूजन एक साथ 11 अक्टूबर को किए जाएंगे। महाष्टमी व्रत 13 को किया जाएगा और महानिशा पूजन व बलिदान आदि होंगे। महानवमी व्रत और हवन आदि 14 को किए जाएंगे। विजयदशमी 15 अक्टूबर को मनाने के साथ दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।

दशमी तिथि में होगा प्रस्थान

ज्योतिषाचार्य के अनुसार मां जगदंबा का आगमन 7 अक्टूबर गुरुवार को झूले पर हो रहा है माता का झूले पर आगमन कष्टकारी कहा गया है। प्रस्थान शुक्रवार 15 अक्टूबर को दशमी तिथि में हाथी वाहन पर होगा। वह अच्छी वृष्टि का सूचक होता है।

पूजन विधिया 

सर्वप्रथम भगवान श्री रामचंद्र ने समुद्र तट पर शारदीय नवरात्र पूजा का प्रारंभ किया था अतएव वह राजस पूजा है। यथासंभव पूजा सामग्री से पूजन करना चाहिए। प्रतिपदा तिथि में संकल्प लेकर गणपति पूजन, मातृका पूजन , नांदी श्राद्ध इत्यादि के बाद मां परांबा का पंचोपचार पूजन करना चाहिए। देवी व्रत में कुमारी पूजन परम आवश्यक माना गया है। सामर्थ्य अनुसार नवरात्र भर प्रतिदिन यस समाप्ति के दिन नौ कुमारियो के चरण पखार देवीरूप मानकर अर्चन कर सादर यथारूचि मिष्ठान्न भोजन कराने के साथ वस्त्रादि से सत्कृत करना चाहिए।

नवरात्र का वैज्ञानिक पक्ष

शरदसन्तनामानौ दानवी ही भक्करौ ।
तयोरुपवशाम्त पूजा दिशा मता ॥ 

अर्थात शरद एवं वसंत नाम के दो भयंकर दानव विभिन्न रोगों के कारण हैं। इन ऋतु परिवर्तनों के समय विभिन्न राग-महामारी, ज्वर, शीतला, कफ, खांसी के निवारणार्थ पूर्ण स्वच्छतापूर्वक शारदीय व वासंती ये दो नवरात्र दुर्गा पूजा के लिए प्रशस्त है।

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