चंद्रग्रहण2021: साल का आखिरी चंद्रग्रहण शुरू, भारत में क्या होगा असर?
मून

 चंद्र ग्रहण 2021:आंशिक चंद्रग्रहण शुरू हो चुका है। इसे दुनिया के कई हिस्सों में देखा जा सकता है। यह साल 2021 का आखिरी चंद्रग्रहण होगा। माना जा रहा है यह 580 साल बाद सबसे लंबा चंद्र ग्रहण है। भारतीय समय के अनुसार यह चंद्रग्रहण सुबह 11 बजकर 34 मिनट से शुरू हो गया है जो शाम के 5 बजकर 59 मिनट पर समाप्त होगा।

साल 2021 का यह आखिरी चंद्रग्रहण होगा। इस ग्रहण के 15 दिनों बाद ही 04 नवंबर को साल का आखिरी चंद्रग्रहण लगेगा। 19 नवंबर को चंद्रग्रहण लगने के बाद अगले साल 08 नवंबर 2022 को चंद्रग्रहण देखने को मिलेगा।

हमेशा से ग्रहण की घटना को देखना अनोखा होता है। आज साल का आखिरी चंद्रग्रहण बस कुछ ही देर बाद शुरू हो जाएगा। भारत में दिन होने और उपच्छाया चंद्रग्रहण होने के कारण इस ग्रहण को नहीं देखा जा सकेगा। बाकी जगहों पर जैसे-अमेरिका, पूर्वी एशिया, उत्तरी यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में यह चंद्र ग्रहण दिखाई देगा। आप  You Tube पर सर्च करके ग्रहण की लाइव स्ट्रीमिंग देख सकते हैं। ग्रहण की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए Virtual Telescop, Timeanddate, CosmoSapiens चैनल पर जा सकते हैं।

चंद्रग्रहण का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

 ग्रहण एक खगोलीय घटना है लेकिन ग्रहण का धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों तरह का महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रग्रहण को अशुभ माना गया है। ऐसी मान्यताएं है कि ग्रहण के समय किसी भी तरह का शुभ कार्य नहीं किया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब पापी ग्रह राहु और केतु ग्रहण के समय चंद्रमा का ग्रास कर लेते हैं। इस स्थिति में कुछ समय के लिए चंद्र पर ग्रहण लग जाता है। इससे चंद्र ग्रहण कहते हैं। वहीं विज्ञान के नजरिए से जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है तो इस दौरान चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ने लगती है। 

580 साल बाद सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण लगने के बाद 15 दिनों के अंतराल पर साल 2021 का आखिरी सूर्य ग्रहण भी लगेगा। 04 दिसंबर 2021, शनिवार को मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर लगेगा। यह सूर्य ग्रहण वृश्चिक राशि में लगेगा जिस कारण से सभी राशियों को जातकों पर इसका प्रभाव देखने को मिलेगा।

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व 

 कार्तिक मास की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा,त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है । शास्त्रों में कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने का बहुत महत्त्व बताया गया है। माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से पूरे वर्ष गंगा स्नान करने का फल मिलता है। इस दिन गंगा सहित पवित्र नदियों एवं तीर्थों में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी दिन ब्रह्मा जी का ब्रह्म सरोवर पुष्कर में अवतरण हुआ था। इस दिन तीर्थयात्री पवित्र पुष्कर सरोवर में स्नान करके देवों की कृपा पाते है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था,जिससे देवगण बहुत प्रसन्न हुए और भगवान विष्णु ने शिवजी को त्रिपुरारी नाम दिया जो शिव के अनेक नामों में से एक है।

भारत में चंद्रग्रहण का प्रभाव और कहां-कहां दिखाई देगा

ज्योतिष और धर्मशास्त्रों में चंद्र ग्रहण की घटना को अच्छा नहीं माना जाता है। आज लगने वाला चंद्रग्रहण आंशिक होगा जिसका प्रभाव भारत में नहीं होगा। भारत में यह चंद्र ग्रहण मात्र एक उपच्छाया चंद्रग्रहण होगा। जिसे ग्रहण नहीं माना जाता है। ग्रहण मान्य नहीं होने के कारण इसका सूतक काल प्रभावी नहीं रहेगा। भारत में यह चंद्रग्रहण सू्र्यास्त  के समय ही असम और अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाको में देखा जा सकता है। सूतक काल का प्रभाव भारत में नहीं होने के कारण किसी भी तरह की पाबंदी पूजा-पाठ और धार्मिक क्रियाकालपों में नहीं होगा।

चंद्र ग्रहण में न करें ये काम

शास्त्रों में चंद्रग्रहण को अशुभ माना जाता गया है। जब ग्रहण काल शुरू होता है तो उस दौरान कुछ कार्य करना वर्जित होता है। ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ नहीं किया जाता। ग्रहण में गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी होती है। ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं घर से बाहर न निकलें और कोई भी धारदार चीज का प्रयोग न करें। ग्रहण के दौरान भोजन नहीं किया जाता।

नासा ने भी ट्वीट कर लोगों को आज के चंद्र ग्रहण को देखने के लिए आमंत्रित किया है,साथ ही बताया है कि दुनिया के किन हिस्सों में आज का चंद्र ग्रहण दिखाई देगा। 


पूरी दुनिया में रहे हैं मिथक

भारत में चंद्र ग्रहण को चंद्रमा पर राहु-केतु के हमले के रूप में देखा जाता रहा है। लेकिन दुनिया भर में चंद्र ग्रहण की वैज्ञानिक व्याख्या मालूम नहीं थी तो लोगों ने उसके लिए अलग अलग मिथक गढ़े। कई देशों में इसे अशुभ घटना के रूप में देखा जाता है। इन्का साम्राज्य में लोगों का मानना था कि ग्रहण के दौरान जैगुआर चांद पर हमला करके उसे खाने की कोशिश करता है। इन्का इस डर से भाले बनाते थे और इस जानवर को भगाने के लिए शोर मचाते थे। मेसोपोटामिया सभ्यता में लोग ब्लड मून को राजा पर ब्रह्मांड के हमले के प्रतीक के रूप में देखते थे।  इस दौरान किसी और को राजा की जगह पर बिठा दिया जाता था और राजा एक आम नागरिक बन जाता था। टोगो और बेनिन के बातामालिबा लोगों का मानना था कि चंद्र ग्रहण का वक्त सूर्य और चंद्रमा के संघर्ष का समय होता है और इंसानों को अपने मतभेद सुलझाकर दोनों को सुलह कराने की प्रेरणा देनी चाहिए। ऐसी ही अमेरिका में एक और मिथक है कि चंद्रमा बीमार है और इंसानों को उसके ठीक होने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। 

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