Chor Panchak 2026: चोर पंचक आज से शुरू, 4 अगस्त तक बरतें विशेष सावधानी, धन संबंधी कार्यों में रखें सतर्कता
Chor Panchak 2026: शुक्रवार, 31 जुलाई से चोर पंचक की शुरुआत हो गई है, जो 4 अगस्त तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार से आरंभ होने वाले पंचक को 'चोर पंचक' कहा जाता है। इस अवधि में विशेष रूप से धन, यात्रा और मूल्यवान वस्तुओं से जुड़े कार्यों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
मुहूर्त चिंतामणि में पंचक काल के दौरान कुछ कार्यों को वर्जित बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस समय लकड़ी का संग्रह करना, पलंग खरीदना या बनवाना, घर की छत का निर्माण कराना तथा दक्षिण दिशा की यात्रा करना शुभ नहीं माना जाता।
क्यों माना जाता है चोर पंचक संवेदनशील
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार चोर पंचक के दौरान किए गए कुछ महत्वपूर्ण कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं। इस अवधि में चोरी, धन हानि, कीमती सामान खोने, दस्तावेज गुम होने या आर्थिक नुकसान की आशंका अधिक मानी जाती है। इसी कारण कई लोग इस समय बड़े वित्तीय फैसले या नए व्यावसायिक कार्यों की शुरुआत करने से बचते हैं।
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस दौरान यात्रा, बड़े लेन-देन और महत्वपूर्ण निवेश जैसे कार्य सोच-समझकर करने चाहिए।
चोर पंचक में इन कार्यों से बचें
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लंबी दूरी की यात्रा करने से बचें।
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बड़ी धनराशि का लेन-देन न करें।
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सोना-चांदी, आभूषण या अन्य कीमती वस्तुओं की खरीद टालें।
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नए व्यापार या व्यवसाय की शुरुआत न करें।
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मूल्यवान सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने से बचें।
तुलसी पूजन का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान प्रतिदिन तुलसी की पूजा और जल अर्पित किया जा सकता है। हालांकि एकादशी और रविवार को तुलसी में जल अर्पित नहीं किया जाता, क्योंकि इन दिनों मां तुलसी भगवान विष्णु की आराधना में लीन मानी जाती हैं।
आर्थिक समृद्धि के लिए उपाय
धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि धन-संपत्ति में वृद्धि की कामना हो तो पंचक के शुक्रवार को तुलसी की सूखी मंजरी को स्वच्छ लाल कपड़े में बांधकर छोटी पोटली बना लें। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का स्मरण करते हुए "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः" मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें। मंत्र जाप के बाद इस पोटली को तिजोरी, धन रखने के स्थान या अलमारी में रखें। मान्यता है कि इससे आर्थिक समृद्धि और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
नोट: उपरोक्त जानकारी धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल परंपरागत मान्यताओं की जानकारी देना है।
