आर्द्रा नक्षत्र 22 जून से होगा प्रारंभ, मानसून के आगमन का माना जाता है संकेत
हिंदू पंचांग के अनुसार वर्षा ऋतु का प्रमुख और महत्वपूर्ण आर्द्रा नक्षत्र इस वर्ष 22 जून से प्रारंभ होकर 6 जुलाई तक रहेगा। ज्योतिष एवं धार्मिक मान्यताओं में आर्द्रा नक्षत्र का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि इसी अवधि को वर्षा ऋतु और मानसून के आगमन का प्रमुख संकेत माना जाता है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार आर्द्रा नक्षत्र के दौरान सूर्य देव मिथुन राशि में स्थित रहते हैं। प्राचीन काल से ही किसान और मौसम के जानकार इस नक्षत्र की गतिविधियों पर विशेष नजर रखते आए हैं। मान्यता है कि आर्द्रा नक्षत्र में होने वाली वर्षा का प्रभाव पूरे वर्ष के मानसून और कृषि उत्पादन पर पड़ता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में आर्द्रा नक्षत्र को खेती-किसानी के लिए शुभ माना जाता है। किसान इस अवधि में वर्षा की स्थिति के आधार पर खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारी करते हैं। यदि आर्द्रा नक्षत्र के दौरान अच्छी वर्षा होती है तो इसे कृषि और जल संसाधनों के लिए लाभदायक माना जाता है।
धार्मिक दृष्टि से भी आर्द्रा नक्षत्र का विशेष महत्व है। इस अवधि में भगवान शिव की आराधना, पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। मान्यता है कि आर्द्रा नक्षत्र में किए गए धार्मिक कार्य विशेष फलदायी होते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि 22 जून से शुरू होने वाला यह नक्षत्र मौसम और कृषि दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रहेगा तथा लोगों की निगाहें मानसून की गतिविधियों पर टिकी रहेंगी।
