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महंगे हुए स्मार्टफोन! भारत में स्मार्टफोन हुए महंगे, आम आदमी के बजट पर बढ़ा दबाव

महंगे हुए स्मार्टफोन! भारत में स्मार्टफोन हुए महंगे, आम आदमी के बजट पर बढ़ा दबाव
 स्मार्टफोन खरीदना हुआ मुश्किल! 2 साल में 30% तक बढ़े मोबाइल के दाम, आम आदमी का बजट बिगड़ा

नई दिल्ली। देश में स्मार्टफोन अब केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि शिक्षा, बैंकिंग, सरकारी सेवाओं और डिजिटल भुगतान का अहम साधन बन चुका है। ऐसे समय में मोबाइल फोन की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं, खासकर मध्यम वर्ग और ग्रामीण परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले दो वर्षों में कई लोकप्रिय स्मार्टफोन मॉडलों की कीमतों में 10 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे बजट में स्मार्टफोन खरीदना पहले की तुलना में कहीं अधिक मुश्किल हो गया है।

एक समय था जब 10 से 12 हजार रुपये की कीमत में बेहतर फीचर्स वाला स्मार्टफोन आसानी से उपलब्ध हो जाता था। अब उसी श्रेणी के अधिकांश स्मार्टफोन 12 से 15 हजार रुपये या उससे अधिक कीमत पर बिक रहे हैं। वहीं, पहले 20 से 25 हजार रुपये में मिलने वाले मिड-रेंज स्मार्टफोन अब 30 हजार रुपये के आसपास पहुंच चुके हैं।

बाजार के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में स्मार्टफोन की औसत कीमत में 15 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। उदाहरण के तौर पर, वर्ष 2023 में लगभग 11,999 रुपये में उपलब्ध एक लोकप्रिय स्मार्टफोन का नया संस्करण अब करीब 14,999 रुपये में बेचा जा रहा है। इसके साथ ही पुराने मॉडलों पर मिलने वाली छूट में भी उल्लेखनीय कमी आई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कीमतों में वृद्धि के पीछे कई आर्थिक और तकनीकी कारण हैं। वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाएं, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की बढ़ती लागत, रुपये की विनिमय दर में कमजोरी, आयात शुल्क में बदलाव तथा बेहतर तकनीक वाले फीचर्स को मानक बनाए जाने से उत्पादन लागत बढ़ी है। अब अधिकांश कंपनियां 5G प्रोसेसर, AMOLED डिस्प्ले, उच्च गुणवत्ता वाले कैमरे और बड़ी बैटरी जैसे फीचर्स को सामान्य श्रेणी में शामिल कर रही हैं, जिससे कीमतों पर सीधा प्रभाव पड़ा है।

बाजार विश्लेषकों के अनुसार भारत में स्मार्टफोन की औसत बिक्री कीमत वर्ष 2022 में लगभग 18,500 रुपये थी, जो वर्ष 2025 तक बढ़कर करीब 23,000 रुपये पहुंच गई है। हालांकि कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बढ़ती उत्पादन लागत के साथ-साथ कंपनियां अपने लाभांश में भी वृद्धि कर रही हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में इसका प्रभाव और अधिक दिखाई दे रहा है। किसानों और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए स्मार्टफोन अब केवल बातचीत का साधन नहीं, बल्कि ऑनलाइन बैंकिंग, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, डिजिटल भुगतान तथा बच्चों की पढ़ाई का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। बढ़ती कीमतों के कारण अनेक परिवार नए स्मार्टफोन खरीदने में असमर्थ हो रहे हैं।

इसका असर छात्रों, महिलाओं और युवाओं पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सीमित बजट वाले विद्यार्थी अब पुराने मोबाइल का उपयोग लंबे समय तक करने या किस्तों (EMI) के माध्यम से महंगे स्मार्टफोन खरीदने को मजबूर हैं।

सरकार ने 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत देश में मोबाइल निर्माण को बढ़ावा देकर आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को कीमतों में अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी है। उपभोक्ता मामलों के जानकारों का मानना है कि कंपनियों को मूल्य निर्धारण में अधिक पारदर्शिता अपनानी चाहिए, जबकि सरकार को स्थानीय विनिर्माण को और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए आवश्यक प्रोत्साहन और सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्मार्टफोन की कीमतों में इसी प्रकार लगातार वृद्धि होती रही तो डिजिटल सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में डिजिटल समावेशन और 'डिजिटल इंडिया' के लक्ष्य को बनाए रखने के लिए किफायती स्मार्टफोन उपलब्ध कराना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गई है।

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