×

ISRO वैज्ञानिकों की बड़ी चेतावनी, सूर्य की बढ़ती गर्मी से धरती की ओर गिर रहे पुराने सैटेलाइट

ISRO वैज्ञानिकों की बड़ी चेतावनी, सूर्य की बढ़ती गर्मी से धरती की ओर गिर रहे पुराने सैटेलाइट

सौर गतिविधि बढ़ने से अंतरिक्ष में बढ़ रहा ड्रैग, समय से पहले नीचे आ रहा स्पेस मलबा

Indian Space Research Organisation (ISRO) के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में बढ़ते मलबे और पुराने उपग्रहों को लेकर बड़ी चेतावनी जारी की है। इसरो के नेतृत्व में किए गए एक नए अध्ययन में सामने आया है कि सूर्य की बढ़ती सक्रियता पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद मृत सैटेलाइट और अंतरिक्ष मलबे को समय से पहले धरती की ओर खींच रही है।

Vikram Sarabhai Space Centre (VSSC), तिरुवनंतपुरम की स्पेस फिजिक्स लेबोरेटरी के वैज्ञानिकों ने पहली बार यह साबित किया है कि सौर गतिविधि के आधार पर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि अंतरिक्ष मलबा कितनी तेजी से नीचे गिरेगा। यह शोध Frontiers in Astronomy and Space Sciences में प्रकाशित हुआ है।

अध्ययन की मुख्य लेखिका Aisha M. Ashraf के अनुसार, जब सूर्य अत्यधिक सक्रिय होता है तो वह बड़ी मात्रा में पराबैंगनी विकिरण और आवेशित कण उत्सर्जित करता है। इससे पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल यानी थर्मोस्फीयर की गैसें गर्म होकर फैलने लगती हैं।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, गैसों के फैलने से वायुमंडल का घनत्व बढ़ जाता है, जिससे अंतरिक्ष में ड्रैग यानी अवरोध पैदा होता है। यही अवरोध सैटेलाइट्स की गति को धीमा कर उन्हें धीरे-धीरे नीचे की ओर खींचने लगता है।

शोध में बताया गया है कि जब सूर्य अपने 11 वर्षीय सौर चक्र के लगभग 67 प्रतिशत सक्रिय स्तर को पार कर जाता है, तब अंतरिक्ष मलबे के नीचे गिरने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।

वैज्ञानिकों ने 1960 के दशक में लॉन्च किए गए 17 अंतरिक्ष मलबों के टुकड़ों का करीब 36 वर्षों तक अध्ययन किया। यह अध्ययन सौर चक्र 22 से 24 तक किया गया। ये मलबे 600 से 800 किलोमीटर की ऊंचाई पर मौजूद थे। चूंकि इनमें खुद को नियंत्रित करने के लिए ईंधन नहीं था, इसलिए ये वायुमंडलीय बदलावों को समझने के लिए सटीक माध्यम साबित हुए।

अध्ययन में यह भी कहा गया है कि सक्रिय सैटेलाइट्स को अब अपनी कक्षा में बनाए रखने के लिए पहले से अधिक ईंधन की जरूरत पड़ेगी। वहीं, अंतरिक्ष मलबे के रास्ता बदलने से SpaceX के Starlink जैसे मेगा सैटेलाइट नेटवर्क के साथ टक्कर का खतरा भी बढ़ सकता है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों की योजना बनाते समय अब सौर गतिविधियों और अंतरिक्ष ड्रैग को ध्यान में रखना बेहद जरूरी होगा।

Share this story