नई दिल्ली। देश में अरहर, मसूर, उड़द और चना जैसी प्रमुख दालों की कीमतों में तेजी के बीच इनके आयात में भी बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल से अगस्त के दौरान भारत में दालों का आयात पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 67 प्रतिशत बढ़कर 20.6 लाख टन पहुंच गया। वहीं, दालों के आयात पर होने वाला खर्च 38 प्रतिशत बढ़कर 1.18 अरब डॉलर हो गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में दालों की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
अरहर, उड़द और चना के दाम में बढ़ोतरी
उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, दालों की खुदरा कीमतों में पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि दर्ज की गई है। अरहर दाल की औसत कीमत करीब 132.75 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई है, जो एक साल पहले के मुकाबले लगभग 15 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह उड़द दाल 125.46 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गई है, जबकि चना दाल की कीमत करीब 93.48 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई है। उड़द की कीमत में लगभग 10 प्रतिशत और चना दाल में 7.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
मौसम और विदेशी बाजार का असर
दालों की कीमतों में तेजी के पीछे घरेलू उत्पादन को लेकर चिंता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बदलती परिस्थितियां प्रमुख वजह मानी जा रही हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में कम बारिश से दलहन फसलों की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। इसके अलावा रूस-यूक्रेन संघर्ष से आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ने वाले असर के कारण कनाडा से आने वाली मसूर और पीली मटर की कीमतों पर भी दबाव बढ़ा है। आयात शुल्क और विदेशी बाजार में बढ़ती लागत भी दालों की खरीद को महंगा बना सकती है।
मसूर और पीली मटर के आयात में बड़ी वृद्धि
आयात के आंकड़ों में मसूर और पीली मटर की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी सामने आई है। अप्रैल से अगस्त के बीच मसूर का आयात करीब 6.4 लाख टन रहा, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में लगभग तीन गुना है। वहीं, पीली मटर का आयात बढ़कर करीब 6.2 लाख टन पहुंच गया। इससे स्पष्ट है कि घरेलू मांग पूरी करने के लिए भारत विदेशी आपूर्ति पर भी निर्भर बना हुआ है।
सरकारी भंडार से कीमतों को मिल सकती है राहत
हालांकि, दालों की कीमतों में आगे कितनी बढ़ोतरी होगी, यह अभी तय नहीं है। सरकार के पास लगभग 45 लाख टन दालों का भंडार होने की जानकारी है। यह भंडार बाजार में आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों में अचानक उछाल को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। दूसरी ओर, घरेलू फसल की स्थिति, नई उपज की आवक और अंतरराष्ट्रीय बाजार में दालों की उपलब्धता भी कीमतों की दिशा तय करेगी।
आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है असर
दालें भारतीय परिवारों के दैनिक भोजन का अहम हिस्सा हैं। ऐसे में कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होने पर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के मासिक बजट पर सीधा असर पड़ सकता है। फिलहाल दालों के और महंगा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन वास्तविक स्थिति आने वाले महीनों में घरेलू उत्पादन, सरकारी भंडार और बाजार में आपूर्ति पर निर्भर करेगी।
