देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू, जानिए वंदे भारत से कितनी अलग है नई तकनीक
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने तकनीकी विकास की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड पर शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अत्याधुनिक ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह उपलब्धि भारत को हाइड्रोजन ट्रेन संचालित करने वाले चुनिंदा देशों की सूची में शामिल करती है।
हाइड्रोजन ट्रेन को लेकर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या यह भविष्य में वंदे भारत ट्रेनों की जगह ले लेगी? विशेषज्ञों के अनुसार इसका उत्तर 'नहीं' है। दोनों ट्रेनों की तकनीक, उद्देश्य और संचालन प्रणाली पूरी तरह अलग है तथा दोनों का उपयोग अलग-अलग परिस्थितियों में किया जाएगा।
हाइड्रोजन ट्रेन क्या है?
हाइड्रोजन ट्रेन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित होती है। इसमें हाइड्रोजन गैस को फ्यूल सेल में ऑक्सीजन के साथ रासायनिक प्रक्रिया से मिलाया जाता है, जिससे बिजली उत्पन्न होती है। यही बिजली ट्रेन के इलेक्ट्रिक मोटर को चलाती है। इस पूरी प्रक्रिया में धुआं या कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन नहीं होता। केवल जलवाष्प (भाप) निकलती है, जिससे इसे पर्यावरण के अनुकूल परिवहन प्रणाली माना जाता है।
वंदे भारत से कैसे अलग है?
वंदे भारत ट्रेन पूरी तरह बिजली से संचालित सेमी हाई-स्पीड ट्रेन है। इसके संचालन के लिए रेलवे ट्रैक के ऊपर ओवरहेड इलेक्ट्रिक वायर (OHE) का होना आवश्यक है। वहीं हाइड्रोजन ट्रेन अपने साथ मौजूद हाइड्रोजन ईंधन से स्वयं बिजली बनाकर चलती है। इसलिए इसे उन रेल मार्गों पर भी चलाया जा सकता है, जहां विद्युतिकरण नहीं हुआ है।
क्या हाइड्रोजन ट्रेन वंदे भारत की जगह लेगी?
रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेन वंदे भारत की प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि पूरक तकनीक है। वंदे भारत का उद्देश्य हाई-स्पीड, प्रीमियम और लंबी दूरी की यात्रा को तेज बनाना है, जबकि हाइड्रोजन ट्रेन का लक्ष्य गैर-विद्युतीकृत या कम यातायात वाले रेल मार्गों पर स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन उपलब्ध कराना है।
रेलवे ने हाइड्रोजन तकनीक क्यों अपनाई?
भारतीय रेलवे वर्ष 2030 तक कार्बन-न्यूट्रल बनने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है। जिन रेल मार्गों पर ओवरहेड बिजली लाइन बिछाना आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं है, वहां हाइड्रोजन ट्रेन बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। इससे डीजल ट्रेनों पर निर्भरता कम होगी, प्रदूषण में कमी आएगी और ईंधन आयात पर होने वाला खर्च भी घटेगा।
दोनों ट्रेनों में प्रमुख अंतर
- वंदे भारत – ओवरहेड बिजली से संचालित, सेमी हाई-स्पीड, प्रीमियम यात्री सेवा।
- हाइड्रोजन ट्रेन – फ्यूल सेल तकनीक से स्वयं बिजली उत्पन्न करती है, बिना धुएं और कम शोर के संचालन।
- वंदे भारत – केवल विद्युतीकृत रेल मार्गों पर संचालित।
- हाइड्रोजन ट्रेन – गैर-विद्युतीकृत रेलखंडों पर भी आसानी से संचालित हो सकती है।
- वंदे भारत – तेज गति और आधुनिक यात्री सुविधाओं पर केंद्रित।
- हाइड्रोजन ट्रेन – स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और कम परिचालन उत्सर्जन पर आधारित।
भविष्य की दिशा
भारतीय रेलवे आने वाले वर्षों में वंदे भारत, अमृत भारत, बुलेट ट्रेन और हाइड्रोजन ट्रेन जैसी विभिन्न तकनीकों का समानांतर विस्तार करेगी। इसका उद्देश्य अलग-अलग जरूरतों के अनुसार आधुनिक, सुरक्षित, तेज और पर्यावरण-अनुकूल रेल परिवहन उपलब्ध कराना है। विशेषज्ञों के अनुसार हाइड्रोजन ट्रेन भविष्य की हरित परिवहन प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगी, जबकि वंदे भारत देश की हाई-स्पीड रेल सेवाओं की प्रमुख पहचान बनी रहेगी।
