RBI ने समय रहते सही कदम उठाए, उच्च मुद्रास्फीति को बर्दाश्त करना जरूरी था: शक्तिकांत दास
शक्तिकांत दास

RBI took right steps in time, it was necessary to tolerate high inflation: Shaktikanta Das

मुंबई।  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पर बदलती परिस्थितियों के मद्देनजर सही समय पर कदम नहीं उठा पाने के आरोपों को खारिज करते हुए गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को नीतिगत कदमों का बचाव किया। 

 

 

 

शक्तिकांत दास ने कहा कि केंद्रीय बैंक अगर और पहले मुद्रास्फीति प्रबंधन पर ध्यान देने में लग जाता तो इसके परिणाम अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी हो सकते थे।



समाचार पत्र फाइनेंशियल एक्सप्रेस द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में दास ने कहा, ‘‘उच्च मुद्रास्फीति को बर्दाश्त करना आवश्यक था, हम अपने फैसले पर कायम हैं।’’ उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक आर्थिक परिवर्तनों की जरूरतों को देखते हुए कदम उठा रहा था।
 


दास ने कहा कि RBI के नियमों में यह स्पष्ट कहा गया है कि मुद्रास्फीति का प्रबंधन वृद्धि संबंधी हालात को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए।



उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारी के मद्देनजर आरबीआई ने वृद्धि की ओर ध्यान दिया और सुगम नकदी परिस्थितियां बनने दीं। इसके बावजूद 2022-21 में अर्थव्यवस्था 6.6 फीसदी संकुचित हो गई थी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक ने यदि अपना रुख पहले बदल लिया होता तो 2021-22 में वृद्धि पर इसका असर पड़ सकता था।



आरबीआई गवर्नर ने साफ किया कि मुद्रास्फीति से निपटने के लिए आरबीआई तीन या चार महीने पहले ध्यान नहीं दे सकता था।

शक्तिकांत दास ने कहा कि मार्च में जब आरबीआई को ऐसा लगा कि आर्थिक गतिविधियां वैश्विक महामारी से पहले के स्तर से आगे निकल गई हैं तब उसने मुद्रास्फीति को काबू करने की दिशा में काम करने का निर्णय लिया।

शक्तिकांत दास ने कहा कि केंद्रीय बैंक दरों में तत्काल बड़ी वृद्धि नहीं कर सकता था।



शक्तिकांत दास ने कहा कि फरवरी 2022 में अनुमान लगाया गया था कि 2022-23 में मुद्रास्फीति 4.5 फीसदी रह सकती है, वह कोई आशाजनक अनुमान नहीं था। 

 यह गणना भी कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल रहने के अनुमान को ध्यान में रखकर की गई थी लेकिन यूक्रेन पर रूस के हमले से परिदृश्य बदल गया।


 

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