Yoga for Back Pain: कमर दर्द के लिए रामबाण इलाज, केवल इस 3 योगासन से जल्द मिलेगा दर्द से छुटकारा
Yoga for Back Pain: कमर दर्द से हैं परेशान? तो करें ये 3 योगासन, जल्द मिलेगा आराम

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Yoga for Back Pain: आज कल की लाइफस्टाइल  में खुद को बिजी जिंदगी खुद को स्वस्थ रखना  भूत जरूरी है सारा सारा हमारा सामी एलेक्ट्रोनिक  गेजेटस के साथ ही बीतता हैं। कई बार को खराब खाने-पीने और लाइफस्टाइल से कई बीमारियां पैदा हो जाती है या वजन बढ़ने लगता है। तो वही सारा दिन ऑफिस में कुर्सी पर भइथे बैठे वजन बढ़ने, पेट बाहर निकालने से लेकर शरीर के कई हिस्सों में आए दिन दर्द होता है। कुछ काम करने या भारी चीज उठाने से कमर में दर्द हो जाता, यहाँ हम आपको कुछ ऐसे योगासन के बारे में बताने जा रहे है जो आपकी दर्द से निजात पाने में मदद करेगा। 

 

 

 

ये तीन योगासन आपको दर्द से राहत देंगे 

 

 

 

हलासन

 

Benefits of Halasana Method of Halasana Yoga Tips Halasana karne ka tarika  brmp | Benefits of Halasana: इन लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है इस आसन का  अभ्यास, दूर भाग जाएंगी ये


हलासन सिरदर्द, नींद न आने की समस्याओं से निजात दिला सकता है।  यह आसन डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद है। इसे करने के लिए किसी बराबर जगह पर पीठ के बल लेट जाएं. ध्यान रहे कि इस दौरान दोनों पैर एक दूसरे से मिले हुए हो और दोनों हथेलियां जमीन पर कमर के पास लगी हुई हों।

इसके अलावा, मुंह ऊपर की तरफ और आंखें बंद हो। अब धीरे-धीरे पैरों को ऊपर उठाएं। ऐसा करते समय पेट को सिकोड़ें और सांस को अंदर लें। दोनों पैरों को सिर के पीछे लगाने की कोशिश करें।  इसके लिए हाथों का सहारा लें।  अब धीरे-धीरे पैरों को मोंड़ें और थोड़ा रुकने का प्रयास करें।  इस बात का ध्यान रखें कि घुटने मुड़े नहीं होना चाहिए। 

हलासन के फायदे (Benefits of Plough Pose)

मस्तिष्क व आंखों को स्वस्थ रखे हलासन

हलासन को इन्वर्जन श्रेणी में रखा जाता है, क्योंकि इसमें हृदय का स्तर मस्तिष्क से ऊपर होता है। हृदय का स्तर ऊपर होने के कारण मस्तिष्क व आखों में पोषण युक्त रक्त आसानी से पहुंच पाता है और उनका स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद मिलती है।

रीढ़ की हड्डी व पीठ को मजबूत बनाए हलासन

नियमित रूप से हलासन मुद्रा का अभ्यास करने से पीठ व रीढ़ की हड्डी के आसपास की मांसपेशियां मजबूत होने लगती हैं। जिन लोगों को कमर दर्द की शिकायत रहती है उनके लिए हलासन अच्छा विकल्प हो सकता है।

 हलासन लाए कंधे, बांह व टांगों में लचीलता

हलासन करते समय कंधे, बांह व टांगों की मांसपेशियों में लचीलापन आता है, जिससे इन अंगों में जकड़न व दर्द जैसी समस्याएं नहीं हो पाती हैं। हलासन से टांगों की मांसपेशियां भी लचीली बन जाती हैं।

पाचन को बढ़ाए हलासन

हलासन के दौरान पेट न सिर्फ पेट की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं इससे पेट, आंत व कई महत्वपूर्ण अंग उत्तेजित हो जाते हैं और प्रभावी रूप से काम करने लगते हैं। हलासन करने से पाचन क्रिया में सुधार होता है और कब्ज जैसी समस्याएं भी ठीक हो जाती हैं।

शारीरिक संतुलन बनाए हलासन

हलासन से समस्त स्वास्थ्य में सुधार होता है। जिन लोगों को उच्च रक्तचाप या उच्च रक्त शर्करा की समस्या है, उनके लिए भी हलासन लाभदायक हो सकता है। कुछ अध्ययनों के अनुसार हलासन अभ्यास करने से हाई बीपी व हाई ब्लड शुगर के स्तर को कम किया जा सकता है।

ऊपर बताए गए हलासन के स्वास्थ्य लाभ व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य और योगासन करने की विधि पर निर्भर करते हैं। हलासन मुद्रा से पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए उसे करने के सही तरीके के बारे में जानना जरूरी है।

हलासन करने के तरीके (Steps to do Plough Pose)

  • मैट या कंबल पर सीधा लेट जाएं और दोनों बांहों को नीचे की तरफ सीधा रखें
  • गहरी सांस लेते समय दोनों टांगों को ऊपर की तरफ उठा और 90 डिग्री का कोण बना लें

  • इसके बाद सांस छोड़ते हुए टांगों को अपने सिर की तरफ ले जाएं और घुटनों को माथे के करीब लाने की कोशिश करें
  •  जब टांगों और झुकना बंद कर दें तो कोहनी को मोड़कर हथेलियों को कमर के नीचे लगाकर सहारा दें।

  • हाथों को धीरे-धीरे कमर के ऊपरी सिरे की और ले जाएं ताकि आपके कूल्हे जितना हो सके ऊपर जा सकें
  • जब दोनों पैरों के अंगूठे फर्श को स्पर्श करने लगें तो इस मुद्रा को लगभग दो मिनट तक बनाकर रखें

  • इसके बाद सांस छोड़ते हुए हथेलियों को हटा लें और धीरे-धीरे रीढ़ की हड्डी को सीधा करें और टांगों को नीचे ले आएं।

हलासन करते समय सावधानियां (Precautions during Plough Pose)

क्षमता से अधिक समय तक करने की कोशिश न करें। 

यदि पैर के अंगूठे फर्श को छू नहीं पा रहे हैं, तो ज्यादा कोशिश न करें। 

शुरुआत में शरीर में लचीलता कम होती है, जो लगातार अभ्यास करने से बढ़ती रहती है। 

यदि आप सुबह के समय हलासन अभ्यास कर रहे हैं, तो ज्यादा स्ट्रेच करने की कोशिश न करें।  

पहली बार हलासन करने वालों को योग प्रशिक्षक से मदद लेने की सलाह दी जाती है। 

हलासन कब न करें (When not to do Plough Pose)

आपके कंधे, पीठ, पेट, या टांगों में दर्द है। 

आपके शरीर के किसी हिस्से में गंभीर चोट लगी है। 

आपको हृदय या अन्य अंदरूनी अंग संबंधी रोग है। 

आपने हाल ही में खाना खाया है। 

आपके मासिक धर्म चल रहे हैं। 

त्रिकोणासन

माइग्रेन-मोटापा जैसी 10 बीमारियों का काल है त्रिकोणासन, जानें करने का सही  तरीका - 10-health-benefits-of-trikonasana-yoga - Nari Punjab Kesari

त्रिकोणासन, हठ योग की श्रेणी का एक आसन है। यह दो शब्दों से मिलकर बना है, त्रिकोण और आसन। यहां त्रिकोण का मतलब है तीन कोणों वाला और आसन का मतलब है मुद्रा यानी तीन कोणों वाली मुद्रा।

त्रिकोणासन करने पर शरीर त्रिकोण जैसी मुद्रा में आ जाता है। इस कारण से इसे त्रिकोणासन कहते हैं। इस आसन में पैरों से लेकर हाथों और शरीर के कई अंग को लाभ पहुंच सकता है। आगे हम आपको विस्तार से बताएंगे कि त्रिकोणासन करने के फायदे कौन-कौन से फायदे हो सकते हैं। 

त्रिकोणासन करने के फायदे – Benefits of Trikonasana 

 कमर दर्द के लिए त्रिकोणासन के फायदे

त्रिकोणासन के फायदे कमर दर्द से राहत पाने में देखे जा सकते हैं। दरअसल, एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर प्रकाशित हठ योग के ऊपर किए गए एक शोध के मुताबिक नियमित योगाभ्यास करने से शरीर को लचीला बनाने में मदद मिल सकती है।

साथ ही योग कमर दर्द से राहत देने में भी मददगार हो सकता है। शोध में शामिल यागासनों में त्रिकोणासन को भी शामिल किया गया है।  हालांकि, कमर दर्द से राहत देने में त्रिकोणासन अकेले कितना कारगर होगा, इसे लेकर अभी और शोध की आवश्यकता है।

तनाव और चिंता को कम करने के लिए

चिंता और तनाव की स्थिति को दूर करने में भी त्रिकोणासन के लाभ देखे जा सकते हैं। दरअसल, एक अध्ययन में उन योगासनों की सूची का जिक्र मिलता है, जो तनाव और चिंता में कारगर परिणाम दे सकते हैं, जिसमें त्रिकोणासन को भी शामिल किया गया है।

शोध में इस बात का भी जिक्र मिलता है कि चिंता और तनाव के अलावा, योग नींद में सुधार करने और मूड को ठीक करने के साथ-साथ ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित करने में मददगार हो सकता है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि तनाव और चिंता में त्रिकोणासन के फायदे देखे जा सकते हैं।

पाचन क्रिया को सुधारने के लिए

योगासन पाचन क्रिया को ठीक करने में भी मदद कर सकते हैं। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध में उन योगासनों का जिक्र मिलता है, जो शरीर में जरूरी पोषक तत्वों के अवशोषण में मददगार हो सकते हैं, जिसमें त्रिकोणासन को भी शामिल किया गया है।

वहीं, इसी शोध में इस बात को साफ तौर से कहा गया है कि नियमित योग का अभ्यास पाचन में मदद करने के साथ-साथ डाइजेस्टिव ग्लैंड को लाभ पहुंचाने में मदद कर सकता। इस आधार पर कहा जा सकता है कि त्रिकोणासन पाचन को मजबूत बनाकर जरूरी पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ावा देने का काम कर सकता है।

मांसपेशियों की मजबूती के लिए

त्रिकोणासन शरीर को बाहरी और अंदरूनी रूप से ताकत प्रदान कर सकता है। शोध के अनुसार, त्रिकोणासन जांघ की मासपेशियों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। शोध में जिक्र मिलता है कि यह जांघ और कूल्हे की जकड़न को भी दूर करने में कारगर हो सकता है।

साथ ही बॉडी के सही पोस्चर को बनाए रखने में मददगार हो सकता है। यह खासकर ट्रंक और थाई मसल्स के लिए एक बेहतर फिजिकल थेरेपी हो सकती है ।

त्रिकोणासन करने का तरीका – Steps to do Trikonasana 

सबसे पहले किसी स्वच्छ और खुले स्थान पर योग मैट बिछाकर खड़े हो जाएं।

  • अब अपने पैरों के मध्य दो फुट की दूरी बनाएं और अपने हाथों को शरीर से सीधे सटाकर रखें।
  • इसके बाद आपको अपनी बांहों को शरीर से दूर कंधे तक फैलाना होगा।

  • अब सांस अंदर करते हुए दाएं हाथ को ऊपर उठाकर कान से सटा लें। साथ ही बाएं पैर को बाहर की ओर मोड़ दें।
  • इसके बाद आपको सांस बाहर छोड़ते हुए कमर से बाईं ओर झुकना होगा।

  • इस दौरान अपने घुटने न मोड़ें और दायां हाथ कान से सटाकर ही रखें।
  • अब अपने दाएं हाथ को जमीन के समानांतर लाने का प्रयास करें और साथ ही बाएं हाथ से बाएं टखने को छूने की कोशिश करें।

  • इस मुद्रा में 10 से 30 सेकंड तक रहने का प्रयास करें और सामान्य रूप से सांस लेने-छोड़ने की प्रक्रिया जारी रखें।
  • फिर सांस लेते हुए अपनी प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।

  • फिर कुछ सेकंड का विराम लेकर इस पूरी क्रिया को दाईं ओर से भी करें।
  • त्रिकोणासन के इस चक्र को तीन से चार बार किया जा सकता है।

 

धनुरासन

धनुरासन क्या है, जानें इसकी विधि और करने के लाभ | Hari Bhoomi

धनुरासन को धनुष आसन या धनुषासन (Bow Pose) भी कहा जाता है। इस आसन को करने के दौरान शरीर धनुष के जैसा आकार बनाता है। धनुरासन को हठ योग के 12 मूल आसनों में से एक माना जाता है। 

ये आसन योग विज्ञान में पीठ में स्ट्रेचिंग या खिंचाव पैदा करने के लिए बताए गए प्रमुख तीन आसनों में एक है। इस आसन के अभ्यास से पूरी पीठ को बढ़िया खिंचाव मिलता है। इस आसन के अभ्यास से कमर में लचीलापन बढ़ता है और कमर मजबूत होती है। 

धनुरासन करने से पहले जानें कुछ जरूरी बातें

धनुरासन का अभ्यास करने से पहले कुछ जरूरी बातों को जान लेना चाहिए। धनुरासन के अभ्यास से पहले पेट खाली होना चाहिए। इस आसन को शौच जाने के बाद ही किया जाना चाहिए। आसन करने से कम से कम 4 से 6 घंटे पहले ही भोजन कर लें। इससे पेट में भोजन को पचने का पर्याप्त समय मिल जाता है। अभ्यास के लिए भी जरूरी ऊर्जा आसानी से हासिल की जा सकती है। 

इस आसन को करने का सबसे अच्छा समय सुबह होता है। लेकिन अगर किसी वजह से भी आप इसे सुबह के वक्त न कर सकें तो इसका अभ्यास शाम के वक्त भी किया जा सकता है।

धनुरासन कैसे किया जाता है (How To Do Dhanurasana)

योग मैट पर पेट के बल लेट जाएं, पैरों को सटाकर रखें और हाथों को पैरों के पास रखें। 

 धीरे-धीरे घुटनों को मोड़ें और हाथों से टखने को पकड़ें। 

 सांस भीतर की ओर खींचें और सीने को उठाएं और जांघों को जमीन से ऊपर उठाएं। हाथों से पैरों को खीचें। 

सामने की तरफ देखें और चेहरे पर मुस्कान बनाए रखें। 

अपना ध्यान सांसों की गति पर केंद्रित करने की कोशिश करें। शरीर धनुष की तरह खिंचा हुआ रहे। जबकि हाथ धनुष की डोरी का काम करेंगे। 

तभी तक करें जब तक आप आसानी से आसन कर सकें। सांसें लंबी और गहरी लेते रहें। 

 करीब 15-20 सेकेंड के बाद, सांस छोड़ते हुए सामान्य हो जाएं।

धनुरासन के फायदे (Benefits of Dhanurasana)

1. धनुरासन का अभ्यास करने से कुछ जबरदस्त फायदे मिल सकते हैं। 

2. धनुरासन का अभ्यास करने से पीठ मजबूत होती है और पेट के निचले हिस्से की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। 

3. इस आसन के अभ्यास से नपुंसकता दूर करने में मदद मिल सकती है। 

4. धनुरासन से गर्दन, सीना और कंधे चौड़े हो जाते हैं। 

5. इस आसन को रोज करने से हाथों और पैरों की मांसपेशियां सुडौल बनती हैं। 

6. इस आसन से पीठ में लचीलापन भी बढ़ता है। 

7. धनुरासन को रोज करने से तनाव कम करने में मदद मिलती है।  

8. किडनी के संक्रमण से निपटने में भी धनुरासन बहुत मदद करता है।

 

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। 

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