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12 घंटे काम, 3 दिन आराम! गुजरात में माइक्रोन के लिए नई शिफ्ट व्यवस्था मंजूर

12 घंटे काम, 3 दिन आराम! गुजरात में माइक्रोन के लिए नई शिफ्ट व्यवस्था मंजूर
माइक्रोन के साणंद प्लांट में 12 घंटे की शिफ्ट को मंजूरी, हफ्ते में तीन दिन मिल सकती है छुट्टी

गुजरात: गुजरात सरकार ने सेमीकंडक्टर कंपनी माइक्रोन के साणंद स्थित प्लांट में 12 घंटे की शिफ्ट व्यवस्था को मंजूरी दे दी है। हालांकि, इस व्यवस्था के तहत कर्मचारियों से सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम नहीं कराया जा सकेगा। ऐसे में 12 घंटे की शिफ्ट के आधार पर कर्मचारियों को सप्ताह में चार दिन काम और तीन दिन साप्ताहिक अवकाश का विकल्प मिल सकता है।

सरकार का यह फैसला सेमीकंडक्टर उद्योग की तकनीकी जरूरतों और राज्य में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

12 घंटे की शिफ्ट के पीछे क्या है वजह?

सेमीकंडक्टर निर्माण सामान्य औद्योगिक उत्पादन से काफी अलग होता है। चिप्स की असेंबली और टेस्टिंग नियंत्रित क्लीनरूम वातावरण में की जाती है, जहां अत्याधुनिक और महंगी मशीनें लगातार संचालित होती हैं। उत्पादन प्रक्रिया को बार-बार रोकने या शिफ्ट बदलने की संख्या बढ़ने से संचालन की दक्षता प्रभावित हो सकती है।

इसी को ध्यान में रखते हुए 12 घंटे की शिफ्ट व्यवस्था को मंजूरी दी गई है। लंबी शिफ्ट से शिफ्ट परिवर्तन कम होंगे और क्लीनरूम में कर्मचारियों की आवाजाही को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।

हर फैक्ट्री को नहीं मिलेगी 12 घंटे की शिफ्ट की छूट

सरकार की मंजूरी का मतलब यह नहीं है कि गुजरात की सभी औद्योगिक इकाइयां अब मनमाने तरीके से 12 घंटे की शिफ्ट लागू कर सकेंगी। ऐसी व्यवस्था लागू करने के लिए संबंधित इकाई को सरकार से पूर्व अनुमति लेनी होगी।

माइक्रोन के कर्मचारियों के लिए भी कुछ महत्वपूर्ण शर्तें निर्धारित की गई हैं। 12 घंटे की शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों की लिखित और स्वैच्छिक सहमति जरूरी होगी। इसके अलावा कुल साप्ताहिक काम की अवधि 48 घंटे से अधिक नहीं हो सकती। सरकार ने इस व्यवस्था के तहत काम करने वाले कर्मचारियों का अलग रिकॉर्ड रखने की शर्त भी रखी है।

गुजरात में सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा

माइक्रोन का साणंद प्लांट भारत के बढ़ते सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षेत्र में महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। प्लांट के पहले चरण में पांच लाख वर्ग फीट से अधिक क्षेत्र में क्लीनरूम सुविधा विकसित की जा रही है। यहां चिप्स की असेंबली और टेस्टिंग का काम शुरू होने के बाद उत्पादन क्षमता को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने की योजना है।

गुजरात सरकार सेमीकंडक्टर क्षेत्र को राज्य में निवेश और रोजगार का बड़ा केंद्र बनाने पर जोर दे रही है। सरकार के अनुसार, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत राज्य में मंजूर छह प्रमुख परियोजनाओं से करीब 1.40 लाख करोड़ रुपये के निवेश और लगभग 50 हजार प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

कर्मचारियों के लिए क्या बदलेगा?

12 घंटे की शिफ्ट व्यवस्था का सबसे बड़ा असर काम और छुट्टी के पैटर्न पर पड़ सकता है। यदि कर्मचारी सप्ताह में चार दिन 12-12 घंटे काम करते हैं, तो कुल कार्य अवधि 48 घंटे होगी और उन्हें तीन दिन साप्ताहिक अवकाश मिल सकता है।

हालांकि, यह व्यवस्था सभी कर्मचारियों पर अनिवार्य रूप से लागू नहीं होगी। स्वैच्छिक लिखित सहमति और निर्धारित साप्ताहिक कार्य सीमा जैसी शर्तों के कारण कर्मचारियों के हितों को भी ध्यान में रखा गया है।

कुल मिलाकर, गुजरात सरकार का यह फैसला केवल काम के घंटों में बदलाव नहीं है। इसके पीछे सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्र में उत्पादन क्षमता बढ़ाने, निवेश को आकर्षित करने और नई नौकरियां पैदा करने की कोशिश है। माइक्रोन के साणंद प्लांट में 12 घंटे की शिफ्ट व्यवस्था इसी व्यापक औद्योगिक नीति का हिस्सा मानी जा रही है।

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