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घर में हुआ हादसा, रातभर किसी को नहीं लगी भनक, फिल्ममेकर संजय गुप्ता का 57 साल की उम्र में निधन

फिल्म निर्देशक संजय गुप्ता का 57 साल की उम्र में निधन हो गया। वर्सोवा स्थित घर में गिरने से सिर पर गंभीर चोट लगी। जानें हादसे की पूरी जानकारी और ‘कांटे’, ‘शूटआउट एट वडाला’ जैसी फिल्मों का सफर।

मुंबई। हिंदी सिनेमा के चर्चित फिल्म निर्देशक और निर्माता संजय गुप्ता का 30 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया। वह 57 वर्ष के थे। ‘कांटे’, ‘शूटआउट एट वडाला’, ‘काबिल’, ‘जिंदा’ और ‘मुसाफिर’ जैसी फिल्मों से अपनी अलग पहचान बनाने वाले संजय गुप्ता की मौत की खबर से फिल्म जगत में शोक की लहर है।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, मुंबई स्थित उनके घर पर गिरने से उनके सिर में गंभीर चोट आई थी। हादसे के समय घर में परिवार के सदस्य मौजूद थे, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी देर से हुई।

घर में कैसे हुआ हादसा?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संजय गुप्ता 30 अक्टूबर की रात अपने वर्सोवा स्थित आवास पर गिर पड़े थे। इस घटना में उनके सिर पर गंभीर चोट आई। बताया गया कि घर में उनकी पत्नी, दो बेटे और घरेलू सहायिका मौजूद थे। उस समय परिवार के सदस्य सो रहे थे, इसलिए हादसे का पता तत्काल नहीं चल सका। अगली सुबह घटना की जानकारी सामने आई।

Mumbai Saga Director Sanjay Gupta Has Start Preparing For His Upcoming Film  The Based On Graphic Four Part Book Rakshak - Entertainment News: Amar  Ujala - मुंबई सागा के अटकते ही संजय

हादसे की जगह को लेकर शुरुआती खबरों में बाथरूम का जिक्र किया गया, जबकि बाद की पुलिस रिपोर्ट में रसोई में फिसलकर गिरने की आशंका भी जताई गई। वर्सोवा पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट (ADR) दर्ज कर जांच शुरू की है। पुलिस के अनुसार, परिवार ने किसी तरह की साजिश या संदिग्ध परिस्थिति की आशंका नहीं जताई है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया था। फिलहाल मामले में पुलिस की जांच जारी है।

‘आतिश’ से शुरू हुआ था निर्देशन का सफर

संजय गुप्ता ने वर्ष 1994 में फिल्म ‘आतिश: फील द फायर’ से निर्देशन की शुरुआत की थी। इस फिल्म में संजय दत्त, आदित्य पंचोली और रवीना टंडन जैसे कलाकार नजर आए थे। पहली ही फिल्म से उन्होंने एक्शन और अपराध की दुनिया पर आधारित कहानियों को पर्दे पर पेश करने की अपनी शैली का परिचय दिया।

इसके बाद उन्होंने ‘राम शास्त्र’, ‘हमेशा’, ‘जंग’ और ‘खौफ’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। हालांकि, वर्ष 2002 में आई फिल्म ‘कांटे’ ने उन्हें हिंदी सिनेमा में खास पहचान दिलाई। फिल्म में अमिताभ बच्चन, संजय दत्त, सुनील शेट्टी, कुमार गौरव और महेश मांजरेकर सहित कई कलाकारों ने काम किया था।

‘शूटआउट’ सीरीज से बनाई अलग पहचान

संजय गुप्ता का नाम बॉलीवुड की एक्शन और क्राइम फिल्मों के साथ खास तौर पर जुड़ा रहा। वर्ष 2007 में आई ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ को उन्होंने प्रोड्यूस और सह-लेखन के साथ पर्दे पर उतारा। इसके बाद 2013 में ‘शूटआउट एट वडाला’ का निर्देशन किया। इन फिल्मों ने उन्हें गैंगस्टर और अंडरवर्ल्ड की कहानियों को बड़े पर्दे पर प्रभावशाली अंदाज में पेश करने वाले फिल्ममेकर के रूप में स्थापित किया।

उन्होंने अपनी फिल्मों में सिर्फ एक्शन तक खुद को सीमित नहीं रखा। ‘जज्बा’ में ऐश्वर्या राय बच्चन और ‘काबिल’ में ऋतिक रोशन तथा यामी गौतम के साथ उन्होंने अलग तरह की कहानियों पर काम किया। ‘जिंदा’, ‘मुसाफिर’, ‘एसिड फैक्ट्री’ और ‘मुंबई सागा’ भी उनकी चर्चित फिल्मों में शामिल हैं।

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संजय दत्त के साथ रही खास फिल्मी साझेदारी

संजय गुप्ता और अभिनेता संजय दत्त की जोड़ी ने कई फिल्मों में साथ काम किया। ‘आतिश’, ‘कांटे’, ‘मुसाफिर’ और ‘जिंदा’ जैसी फिल्मों में दोनों की साझेदारी देखने को मिली। गुप्ता की फिल्मों में तेज रफ्तार कहानी, दमदार संवाद और स्टाइलिश एक्शन को खास जगह मिलती थी।

निर्देशन के अलावा उन्होंने निर्माण के क्षेत्र में भी काम किया। वर्ष 2001 में उन्होंने व्हाइट फेदर फिल्म्स नाम से अपना प्रोडक्शन बैनर शुरू किया। इसके तहत कई फिल्मों का निर्माण किया गया। उनकी फिल्मी यात्रा तीन दशक से अधिक समय तक जारी रही।

फिल्म जगत में शोक

संजय गुप्ता के निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म जगत से जुड़े लोगों ने दुख जताया। फिल्ममेकर अशोक पंडित ने सोशल मीडिया पर उनके निधन की पुष्टि करते हुए उन्हें जीवंत व्यक्तित्व और जुनूनी फिल्मकार बताया। निर्देशक के अचानक चले जाने से उनके सहयोगियों, कलाकारों और प्रशंसकों में शोक है।

एक्शन और क्राइम फिल्मों को अपनी खास शैली में पेश करने वाले संजय गुप्ता का जाना हिंदी सिनेमा के लिए बड़ी क्षति है। उनकी बनाई फिल्में और उनका काम लंबे समय तक दर्शकों के बीच याद किया जाएगा।

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