ट्रेन में गाना बजाना या Reel देखना पड़ेगा भारी! ₹5000 जुर्माने और जेल तक पहुंच सकता है मामला
नई दिल्ली। ट्रेन में सफर के दौरान मोबाइल फोन के स्पीकर पर तेज आवाज में गाने सुनना, सोशल मीडिया रील देखना या जोर-जोर से फोन पर बात करना यात्रियों को महंगा पड़ सकता है।
दक्षिण रेलवे ने ऐसे यात्रियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अपने मंडलों को निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य रेल यात्रा के दौरान शांति बनाए रखना और सहयात्रियों को होने वाली परेशानी को रोकना है।
दक्षिण रेलवे के 6 अक्टूबर 2026 के निर्देश में रेलवे बोर्ड के 23 जुलाई 2012 के पुराने दिशा-निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है। रेलवे प्रशासन ने ट्रेनों और स्टेशन परिसर में मोबाइल फोन पर तेज आवाज में संगीत या वीडियो चलाने तथा ऊंची आवाज में बातचीत करने से बचने की सलाह दी है।
यात्रियों को जागरूक करने के लिए सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली से हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषाओं में घोषणाएं करने तथा नोटिस लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
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पहली बार नियम तोड़ने पर 1,000 रुपये तक जुर्माना
रेलवे अधिनियम की धारा 145 के तहत यात्रियों के लिए परेशानी पैदा करने वाले व्यवहार पर कार्रवाई की जा सकती है। संबंधित प्रावधानों के अनुसार, रेलवे परिसर या ट्रेन में उपद्रव करने वाले यात्री को हटाया जा सकता है और 1,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। अधिकृत रेलवे कर्मचारी निर्धारित नियमों के तहत कार्रवाई कर सकते हैं।
चेतावनी के बाद भी नहीं माने तो बढ़ सकती है परेशानी
यदि कोई यात्री रेलवे कर्मचारी के निर्देश के बावजूद उपद्रव जारी रखता है, तो लागू कानूनी प्रावधानों के तहत छह महीने तक की कैद, 5,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर बार स्पीकर पर रील देखने पर अपने आप 5,000 रुपये का जुर्माना या जेल होगी। कार्रवाई मामले की परिस्थितियों और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार होगी।

यात्रियों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
रेलवे ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे मोबाइल पर गाने, वीडियो और रील देखते समय ईयरफोन या हेडफोन का इस्तेमाल करें। फोन पर बातचीत धीमी आवाज में करें और अनावश्यक रूप से लंबी बातचीत से बचें। मोबाइल को साइलेंट या वाइब्रेशन मोड पर रखना भी बेहतर है।
यदि किसी सहयात्री की तेज आवाज से परेशानी हो रही है, तो यात्री रेलवे कर्मचारियों को इसकी जानकारी दे सकते हैं या रेल मदद के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
रेलवे का यह कदम यात्रियों को सफर के दौरान दूसरों की सुविधा का ध्यान रखने की याद दिलाता है। खासकर लंबी दूरी और एसी कोच में शांति बनाए रखना सभी यात्रियों की साझा जिम्मेदारी है।
