केंद्र सरकार ने लिया बड़ा फैसला, अब सूर्यास्त के बाद भी हो सकेगा पोस्टमार्टम
सूर्यास्त के बाद भी हो सकेगा पोस्टमार्टम

केंद्र सरकार ने हत्या, आत्महत्या, बलात्कार, क्षत-विक्षत शव और संदिग्ध मामलों को छोड़कर, उचित बुनियादी ढांचे वाले अस्पतालों में सूर्यास्त के बाद शवों के पोस्टमॉर्टम की मंजूरी दे दी है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने सोमवार को खुद ट्वीट कर यह जानकारी दी. उन्होंने लिखा, “अंग्रेजों के समय की व्यवस्था खत्म! 24 घंटे हो पाएगा पोस्टमॉर्टम. पीएम नरेंद्र मोदी के ‘गुड गवर्नेंस’ के विचार को आगे बढ़ाते हुए, स्वास्थ्य मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि जिन हॉस्पिटल के पास रात को पोस्टमॉर्टम  करने की सुविधा है वो अब सूर्यास्त के बाद भी पोस्टमॉर्टम कर पाएंगे.”

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, “केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को विभिन्न स्रोतों से प्राप्त कई संदर्भों के जवाब में और सरकारी प्रक्रियाओं के अनुपालन संबंधी बोझ को कम करके जीवन की सुगमता को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप, आज से प्रभावी सूर्यास्त के बाद पोस्टमॉर्टम प्रोटोकॉल में बदलाव किए गए हैं.” इसने कहा, ‘मृतक के दोस्तों और रिश्तेदारों के अलावा, यह नई प्रक्रिया अंगदान और प्रतिरोपण को भी बढ़ावा देती है क्योंकि प्रक्रिया के बाद निर्धारित समय में अंगों को निकाला जा सकता है.’

इस संबंध में मंत्रालय को मिले कई अभ्यावेदनों की पड़ताल स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की एक तकनीकी समिति द्वारा की गई थी. मंत्रालय ने कहा कि इस बारे में चर्चा हुई कि कुछ संस्थान पहले से ही रात के समय पोस्टमॉर्टम कर रहे हैं और प्रौद्योगिकी में तेजी से प्रगति तथा सुधार को देखते हुए, विशेष रूप से आवश्यक प्रकाश व्यवस्था और पोस्टमॉर्टम के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे की उपलब्धता के चलते अस्पतालों में रात के समय अंत्य-परीक्षण करना अब संभव है.

इसने कहा कि संबंधित प्रोटोकॉल में कहा गया है कि अंगदान के लिए पोस्टमॉर्टम प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए और यह सूर्यास्त के बाद भी उन अस्पतालों में किया जाना चाहिए, जिनके पास नियमित आधार पर इस तरह के पोस्टमॉर्टम करने के लिए बुनियादी ढांचा है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि अन्य चीजों के साथ-साथ बुनियादी ढांचे की सुदृढ़ता का आकलन अस्पताल प्रभारी द्वारा किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि साक्ष्य मूल्य का महत्व कम नहीं किया गया है.

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