केजरीवाल और भ्रष्टाचार एक-दूसरे के पर्याय बन गए हैं: भाजपा
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नयी दिल्ली।  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रविवार को आरोप लगाया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और भ्रष्टाचार एक-दूसरे का पर्याय बन गए हैं। पार्टी ने कहा कि केजरीवाल को मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।



दिल्ली परिवहन निगम द्वारा की गई 1,000 लो-फ्लोर बसों की खरीद में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर संवाददाता सम्मेलन में को संबोधित करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (आप) सरकार का प्रत्येक विभाग भ्रष्ट गतिविधियों में लिप्त है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल के मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए अनुबंध और निविदाएं तैयार की जा रही हैं।



भाटिया ने कहा, “पहले आबकारी नीति में, अब बसों की खरीद में अनियमितता... केजरीवाल और भ्रष्टाचार एक-दूसरे के पर्याय बन गए हैं।” भाजपा नेता ने कहा, “आप 'कट्टर ईमानदार' होने का दावा कैसे कर सकते हैं? लोग समझ गए हैं कि आप 'कट्टर भ्रष्ट' हैं... आपको मुख्यमंत्री बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।”



उन्होंने कहा कि “दोस्तों को लाभ देने के इरादे से” दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत को दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की बसों की निविदा व खरीद संबंधी समिति का अध्यक्ष बनाया गया। भाटिया ने आरोप लगाया कि इस निविदा के लिए, बोली प्रबंधन सलाहकार के रूप में डीआईएमटीएस की नियुक्ति गलत कामों को सुविधाजनक बनाने के लिए की गई थी।



भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि ‘आप’ “अनियमितताओं के आरोपों” का जवाब नहीं देती, बल्कि ध्यान भटकाने के लिए एक ऐसे मुद्दे उठाती है, जिसका कोई मतलब नहीं होता। भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने आरोप लगाया कि केजरीवाल सरकार ने कुछ कंपनियों के पक्ष में केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के निविदा नियमों और दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया है।



उन्होंने आरोप लगाया, “केजरीवाल सीवीसी में विश्वास नहीं करते, उनका एकमात्र मकसद डीसीसी है - डायरेक्ट कैश कलेक्शन।” दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने शनिवार को बसों की खरीद में कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए सीबीआई को एक शिकायत भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी।



इस साल जून में सक्सेना को संबोधित एक शिकायत में दावा किया गया था कि दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) ने “पूर्व नियोजित तरीके से” परिवहन मंत्री को बसों की निविदा व खरीद के लिए गठित समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया।



सूत्रों ने बताया कि शिकायत में कहा गया कि 1,000 लो फ्लोर बीएस-4 और बीएस-6 बसों के लिए जुलाई 2019 की खरीद बोली और मार्च 2020 में लो फ्लोर बीएस-6 बसों की खरीद व वार्षिक रखरखाव के अनुबंध के लिए लगाई गई दूसरी बोली में अनियमितताएं हुईं।


 

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