जन-धन योजना के 12 साल: 58 करोड़ से अधिक खाते, महिलाओं की भागीदारी बनी बड़ी उपलब्धि
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री जन-धन योजना 28 अगस्त को अपने 12 वर्ष पूरे करने जा रही है। वित्तीय समावेशन की दिशा में शुरू की गई इस योजना ने देश के करोड़ों लोगों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। योजना के तहत अब तक देशभर में 58 करोड़ से अधिक जन-धन खाते खोले जा चुके हैं।
इन खातों में करीब 32.72 करोड़ खाते महिलाओं के नाम पर हैं। यह आंकड़ा वित्तीय समावेशन के साथ-साथ महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैंकिंग सेवाओं से जुड़ने के बाद बड़ी संख्या में परिवारों के लिए बचत, सरकारी योजनाओं का लाभ और आर्थिक लेन-देन अधिक आसान हुआ है।
DBT से बढ़ी पारदर्शिता
प्रधानमंत्री जन-धन योजना के साथ प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी DBT व्यवस्था ने भी सरकारी योजनाओं के लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम करने, भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और सब्सिडी समेत अन्य सरकारी लाभों के वितरण को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिली है।
बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ा आम नागरिक
जन-धन योजना का असर केवल खातों की संख्या तक सीमित नहीं है। बैंकिंग व्यवस्था से दूर रहे लोगों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने के कारण आम नागरिकों के लिए आर्थिक लेन-देन और सरकारी योजनाओं तक पहुंच आसान हुई है। इससे लोगों में आर्थिक आत्मनिर्भरता और वित्तीय सुरक्षा को लेकर विश्वास भी बढ़ा है।
योजना के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर वित्तीय समावेशन की इस यात्रा को भारत के बदलते आर्थिक परिदृश्य से जोड़कर देखा जा रहा है। जन-धन योजना ने बैंक खाता उपलब्ध कराने के साथ नागरिकों को औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार किया है।
रानी अवंती बाई लोधी की गाथा भी होगी शामिल
जन-धन योजना की उपलब्धियों के साथ वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी के साहस, शौर्य और बलिदान को भी याद किया जा रहा है।
उन्होंने आत्मसमर्पण के बजाय वीरगति को चुना और अपने अदम्य साहस के कारण इतिहास में विशेष स्थान बनाया। उनका जीवन आज भी देशभक्ति, स्वाभिमान और साहस की प्रेरणा देता है।
