मधुबनी में डूबने से 5 बच्चों की मौत, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई : डीएम
मधुबनी जिले के बिस्फी प्रखंड की सोहास पंचायत स्थित केरवार गांव में बुधवार को डूबने से पांच बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। घटना पर जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे पूरे जिले के लिए पीड़ादायक बताया।
डीएम ने घटना की जांच के लिए एसडीओ बेनीपट्टी और एसडीपीओ बेनीपट्टी को आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए घटना के मात्र पांच घंटे के भीतर ही मृतक पांचों बच्चों के परिजनों को आपदा प्रबंधन विभाग के प्रावधानों के तहत 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि उपलब्ध करा दी। डीएम स्वयं पूरे मामले की मॉनिटरिंग कर रहे थे।
घटना की सूचना मिलते ही डीएम ने अपर समाहर्ता (आपदा), जिला आपदा प्रभारी और एसडीओ बेनीपट्टी को तुरंत घटनास्थल पर पहुंचने का निर्देश दिया था।
जानकारी के अनुसार, हादसे में कुल छह बच्चे पानी में डूबे थे। ग्रामीणों की तत्परता से एक बच्चे को सुरक्षित बचा लिया गया, जिसका इलाज जारी है। पांच बच्चों को नहीं बचाया जा सका। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन की त्वरित सहायता के लिए आभार जताया।
जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने मुखियाओं, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों से डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाने की अपील की। उन्होंने खतरनाक जलजमाव वाले स्थलों, गहरे गड्ढों, तालाबों और नदी घाटों की पहचान कर चेतावनी बोर्ड लगाने, बैरिकेडिंग कराने और जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।
बरसात में बरतें ये सावधानियां
1. बच्चों को अकेले तालाब, नदी, पोखर या जलभराव वाले क्षेत्रों में न जाने दें।
2. खतरनाक घाटों, गहरे गड्ढों और तेज बहाव वाले पानी से दूर रहें।
3. पुलिया या ऊंचे स्थान से पानी में छलांग लगाकर स्नान न करें।
4. नदी या तालाब में उतरने से पहले गहराई और बहाव का आकलन करें।
5. खतरनाक स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाएं।
6. डूबते व्यक्ति को बचाने के लिए रस्सी, बांस या लकड़ी का प्रयोग करें। तैरना नहीं जानते तो पानी में न उतरें।
7. घरेलू कार्यों के दौरान भी जलस्रोतों के पास सतर्क रहें।
8. अभिभावक बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें।
डीएम ने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता केवल राहत देना नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना भी है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षकों, जीविका समूहों, आंगनबाड़ी सेविकाओं और सामाजिक संगठनों से गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया।
