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Varanasi News: एनजीटी का बड़ा फैसला— असि गंगा की सहायक नदी है, नाला नहीं; एनएमसीजी से 6 हफ्ते में जवाब तलब

Varanasi News: एनजीटी का बड़ा फैसला— असि गंगा की सहायक नदी है, नाला नहीं; एनएमसीजी से 6 हफ्ते में जवाब तलब
वाराणसी। गंगा की सहायक नदियों को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने एक अहम टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि असि गंगा कोई नाला नहीं बल्कि गंगा की सहायक नदी है। इस मामले में एनजीटी ने नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) से 6 सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
एनजीटी का यह आदेश उस याचिका पर आया है जिसमें असि गंगा को नाला बताकर उसकी सफाई और संरक्षण को लेकर की जा रही लापरवाही पर सवाल उठाए गए थे। अधिकरण ने अपने अवलोकन में कहा कि ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यावरणीय दृष्टि से असि गंगा का महत्व है और इसे केवल नाले के रूप में परिभाषित करना उचित नहीं है।
एनजीटी की सख्त टिप्पणी
एनजीटी ने कहा कि किसी भी प्राकृतिक जलधारा को गलत श्रेणी में डालना न केवल पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे उसके संरक्षण प्रयास भी प्रभावित होते हैं। अधिकरण ने एनएमसीजी से यह स्पष्ट करने को कहा है कि असि गंगा के संरक्षण, पुनर्जीवन और प्रदूषण नियंत्रण के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
6 सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
एनजीटी ने निर्देश दिया है कि एनएमसीजी असि गंगा की वर्तमान स्थिति, प्रदूषण के स्रोत, किए गए कार्य और भविष्य की कार्ययोजना को लेकर हलफनामा सहित विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे। मामले की अगली सुनवाई रिपोर्ट दाखिल होने के बाद की जाएगी।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
असि गंगा वाराणसी की प्राचीन जलधाराओं में से एक है, जिसका उल्लेख धार्मिक ग्रंथों और इतिहास में मिलता है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि इसे सहायक नदी का दर्जा देकर संरक्षित किया जाए, तो गंगा की स्वच्छता और जल गुणवत्ता में भी सुधार संभव है।
वाराणसी। गंगा की सहायक नदियों को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने एक अहम टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि असि गंगा कोई नाला नहीं बल्कि गंगा की सहायक नदी है। इस मामले में एनजीटी ने नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) से 6 सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। एनजीटी का यह आदेश उस याचिका पर आया है जिसमें असि गंगा को नाला बताकर उसकी सफाई और संरक्षण को लेकर की जा रही लापरवाही पर सवाल उठाए गए थे। अधिकरण ने अपने अवलोकन में कहा कि ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यावरणीय दृष्टि से असि गंगा का महत्व है और इसे केवल नाले के रूप में परिभाषित करना उचित नहीं है। एनजीटी की सख्त टिप्पणी एनजीटी ने कहा कि किसी भी प्राकृतिक जलधारा को गलत श्रेणी में डालना न केवल पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे उसके संरक्षण प्रयास भी प्रभावित होते हैं। अधिकरण ने एनएमसीजी से यह स्पष्ट करने को कहा है कि असि गंगा के संरक्षण, पुनर्जीवन और प्रदूषण नियंत्रण के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। 6 सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश एनजीटी ने निर्देश दिया है कि एनएमसीजी असि गंगा की वर्तमान स्थिति, प्रदूषण के स्रोत, किए गए कार्य और भविष्य की कार्ययोजना को लेकर हलफनामा सहित विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे। मामले की अगली सुनवाई रिपोर्ट दाखिल होने के बाद की जाएगी। धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व असि गंगा वाराणसी की प्राचीन जलधाराओं में से एक है, जिसका उल्लेख धार्मिक ग्रंथों और इतिहास में मिलता है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि इसे सहायक नदी का दर्जा देकर संरक्षित किया जाए, तो गंगा की स्वच्छता और जल गुणवत्ता में भी सुधार संभव है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं में उम्मीद एनजीटी के इस फैसले से पर्यावरणविदों और स्थानीय नागरिकों में नई उम्मीद जगी है। उनका मानना है कि यह आदेश असि गंगा के पुनर्जीवन की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं में उम्मीद
एनजीटी के इस फैसले से पर्यावरणविदों और स्थानीय नागरिकों में नई उम्मीद जगी है। उनका मानना है कि यह आदेश असि गंगा के पुनर्जीवन की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।

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