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वाराणसी में संपत्ति विवाद को लेकर पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्रा ने की प्रेसवार्ता, कहा-अकेला हो गया हूँ

 अपनी समस्या साझा करते हुए मुझे अत्यंत संकोच हो रहा है किंतु कुछ विकट परिस्थिति वश अत्यंत चिंतन मनन इस विषय पर बात करने के लिए विवश हूं

आपके सहयोग एवं स्नेह का ही परिणाम है कि आज मैं काशी की संगीत परम्परा के पर्याय के रूप में विश्व में अपनी पहचान बना पाया। संगीत जगत में आज मेरा जो भी स्थान है उसमें आप सभी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिसके लिये मैं आप सभी का हृदय से आभारी हूँ।


आज आपके समक्ष अपनी यह समस्या साझा करते हुए मुझे अत्यन्त संकोच हो रहा है किन्तु कुछ विकट परिस्थितिवश अत्यन्त चिन्तन-मनन के पश्चात् मैं आपसे इस विषय में बात करने के लिये विवश हो रहा हूँ।


जैसा कि सर्वविदित है मैं आजमगढ़ के हरिहरपुर ग्राम के एक अत्यन्त साधारण सांगीतिक पृष्ठभूमि वाले परिवार में जन्मा व पला बढ़ा। संगीत के प्रति मेरे रूझान को देखते हुए माता-पिता ने मुझे मुज़फ्फरपुर बिहार में उस्ताद अब्दुल गनी खाँ साहब के पास संगीत शिक्षा के लिये भेजा । तत्पश्चात् काशी नगरी को मैंने अपनी कर्म भूमि बनाया। लगभग 65 वर्षों से मैं काशी में निवास कर रहा हूँ एवं पूरा जीवन मैंने बनारस घराने की संगीत परम्परा को पूरे विश्व तक पहुँचाने में समर्पित कर दिया। मेरा आधे से ज्यादा जीवन अभावों में बीता है। मेरे लिये मान-सम्मान और संगीत साधना के अतिरिक्त कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं रहा है। धन सम्पत्ति अर्जित करना विदेशों में प्रवास एवं विलासितापूर्ण जीवन मेरी प्राथमिकता कभी नहीं रही। शायद मेरे इसी सन्यासी स्वभाव एवं आध्यात्मिक संगीत का प्रभाव है कि आप सबकी शुभकामनाओं से संगीत जगत में मुझे खूब आदर सत्कार एवं सभी प्रतिष्ठित सम्मान व पुरस्कार भी प्राप्त हुआ तथा कभी किसी विवाद या आरोप का मुझे सामना नही करना पड़ा। ये मुझ पर ईश्वर की विशेष अनुकम्पा रही।


छोटी पुत्री नम्रता का एकल स्थानान्तरण मिर्जापुर के प्रतिष्ठित महाविद्यालय के.बी.पी.जी. कालेज में प्रोफेसर संगीत गायन के पद पर हो गया। यह वही महाविद्यालय है जहाँ से वर्तमान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह जी ने शिक्षा ग्रहण की एवं एक शिक्षक के रूप में भी अपनी सेवायें दी। प्रिय योगी आदित्यनाथ जी के इस सहयोग हेतु मैं उनका आजीवन आभारी रहूँगा ।


विषय यह है कि कुछ माह पूर्व मेरे पुत्र एवं दोनों बड़ी पुत्रियों ने पारिवारिक आवश्यकता एवं मेरी अस्वस्थता को देखते हुए वसीयत बनाकर मेरी जो भी अर्जित सम्पत्ति है उसको सभी बच्चों में बंटवारा करने की मांग की। अपने परिवार की इस मांग को समझते हुए मैनें आगरा के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सम्पत्ति का बंटवारा करने में पूर्ण दक्षता रखने वाले प्रदीप कुमार सहगल को काशी बुलाकर अपने पूरे कुटुम्बीजनों की आपसी सहमति से 20 अप्रैल 2023 को रजिस्टर्ड बिल पंजीकृत वसीयत एवं एम0ओ0यू0 समझौता ज्ञापन बनवाकर इस सम्पत्ति का उचित विभाजन कर दिया जिस पर पूरे परिवार के हस्ताक्षर दो गवाहों की उपस्थिति में किये गये।


इस पूरे कार्य के दौरान मेरी तीसरी पुत्री ममता मिश्रा बाजपेयी कोई न कोई व्यवधान एवं अनुचित मांग उपस्थित करती रही। पूर्व में भी ममता ने अपने जीवन में कभी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का प्रयास नहीं किया लेकिन उसको विलासितापूर्ण जीवन की आदत कब और कहाँ से पड़ गयी पता नही चला। अपनी इन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये वह पहले भी परिवार से छल-कपट एवं अनैतिक क्रिया कलाप करती रही है लेकिन क्योंकि वह मेरी ही संतान है और उसके साथ मेरे परिवार का व मेरा मान-सम्मान जुड़ा है इसलिये मैंने सदा उसकी हर गलती को नज़रअन्दाज़ किया तथा कभी कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की।

बंटवारे में भी नियमतः जितना अंश उसका मेरी सम्पत्ति पर बनता था वह उसको दे दिया। ममता की पहली शादी किन्ही कारणों से असफल होने पर उसका सम्बन्ध विच्छेद हो गया था जिसके बाद पिछले वर्ष 2022 में उसका पुनः भदोही के एक सरकारी संस्थान में कार्यरत चन्द्रशेखर बाजपेयी से विवाह हो गया। मुझे पूर्ण आशा थी कि अब ममता एक खुशहाल और संतुष्ट जीवन व्यतीत करेगी और मेरे जीवन में किसी प्रकार का दखल नही देगी ना ही कोई विवाद उत्पन्न करेगी।


विगत तीन वर्षों से कोई मंच प्रदर्शन करने में भी खुद को असमर्थ पा रहा हूँ। पूरा जीवन संगीत सेवा और काशी की उपशास्त्रीय गायन परम्परा को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठा प्रदान करने के बाद यदि आज स्वयं मेरी प्रतिष्ठा छवि और मान-सम्मान को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है तो यह मेरे लिये, काशी के लिये एवं सम्पूर्ण संगीत जगत के लिये अत्यन्त अपमानजनक एवं दुर्भाग्यपूर्ण है।

साथ ही अपना पूरा जीवन माता पिता परिवार और मेरी गायन परम्परा को आगे ले जाने के लिये समर्पित करने वाली मेरी छोटी बेटी प्रोफेसर नम्रता मिश्रा का नाम बदनाम करने उसे जान से मारने की धमकी देने और सरकारी सेवा से झूठा आरोप लगाकर निष्काषित करवाने का जो दुष्प्रयास किया जा रहा है, वह हर समर्पित और निःस्वार्थ संतान के लिए दुख का विषय है।


अपने प्रति आपके स्नेह एवं सम्मान को देखते हुए मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप सभी इस उम्र में मेरे जीवन को तनावमुक्त एवं सम्मानजनक बनाये रखने में मेरी जो भी सम्भव सहायता हो वह करने की कृपा करेंगे। मेरी बेटी ममता को सद्बुद्धि प्रदान करने की दिशा में प्रयास करवायेंगे, साथ ही अनावश्यक रूप से बिना सत्य को जाने समाचार पत्रों एवं न्यूज चैनलों में मेरा नाम न उछले इसके लिये उचित कदम उठायेंगे। पूर्व की भांति भविष्य में भी आप सकारात्मक पत्रकारिता का परिचय देते हुए मेरे मान-सम्मान को धूमिल होने से बचायेंगे इसका मुझे पूर्ण भरोसा है।

मैंने बड़ी तपस्या संघर्ष व साधना के पश्चात् संगीत जगत में और आप सभी प्रशंसकों एवं स्नेहीजनों के हृदय में अपनी जगह बनायी है। कृपया उस छवि को धूमिल होने से बचाये एवं मुझे इस मानसिक प्रताड़ना से मुक्ति दिलवायें। यही मेरे लिये काशी मेरे प्रशंसकों एवं देश के चौथे स्तम्भ के रूप में स्थापित मीडिया जगत की तरफ से मेरा सबसे बड़ा पुरस्कार होगा।

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